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शैव ग्राम में अहंकार मुक्त प्रवेश

भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं में ‘शैव ग्राम’ केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि चेतना के उच्च आयाम को छूने का एक जीवंत केंद्र है। यहाँ की हर एक शिला और हर एक मार्ग में गुरुदेव के दिव्य विचार और…

शैव ग्राम की सर्व कर्म साधना

शैव ग्राम की सर्व कर्म साधना “जाति संघर्ष से मुक्ति और समता मूलक समाज का निर्माण” की दिशा में एक बड़ी पहला है ! आज मानव सभ्यता भौतिक और तकनीकी विकास के अपने चरम बिंदु पर खड़ी है। हमारी उंगलियों…

शैव ग्राम – ईश्वर का घर

कंक्रीट के जंगल में कैद मानवता की मुक्ति के लिए निर्मित ‘शैव ग्राम’ 12 एकड़ में फैली एक बेहद खूबसूरत और शांत प्राकृतिक जीवन की अनुभूति है। इसे साक्षात ईश्वर के घर के रूप में बनाया गया है। यहाँ साधकों…

शेष सभी गुरु ठग हैं

सद्गुरु का मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि सत्य बाजार में बिकने वाली वस्तु नहीं है। यह आध्यात्मिक ऊर्जा का एक ‘अदृश्य’ जगत है, जहाँ कोई भी सहजता से गुरु का चोला पहनकर दुकान खोल सकता है। इसीलिये…

शनि छीनता क्यों है

आज विश्व जिन गहरे संकटों, मानसिक संताप और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है, उसका मूल कारण हमारी वह भूल है जिसमें हमने ब्रह्मांड को उसका हक़ देना बंद कर दिया है। प्राचीन सनातन व्यवस्था में अपनी आय का दसवां…

सामान्य व्यक्ति को वैश्विक ख्याति प्राप्त सन्त बनाने की कला

किसी भी सामान्य व्यक्ति को वैश्विक ख्याति प्राप्त सन्त बनने के लिये 6 चरण में कार्य करना पड़ता है ! पहला चरण मूल विचार और विशिष्ट छवि का निर्माण: सामान्य व्यक्ति आध्यात्मिक की पहचान केवल कर्मकांड तक सीमित न रखकर,…

विचारों की स्पष्टता और संवाद कला के योग

तेज और प्रज्ञा के मिलन से ही वह स्वतंत्र विचार उत्पन्न होता है, जो मनुष्य को भीड़ से निकालकर एक श्रेष्ठ विचारक बनाता है, उसके कुछ विशेष ग्रहीय योग होते हैं । वैदिक ज्योतिष में सूर्य को हमारी आत्मा, प्राण…

राज ऋषि विद्या क्या है

सफलता और अजेयता का आंतरिक विज्ञान संसार में स्थायी सफलता केवल धन, भूमि या बाहरी संसाधनों की मोहताज नहीं होती। राज ऋषि विद्या यह सिद्ध करती है कि किसी भी परिस्थिति के प्रति हमारी ‘आंतरिक प्रतिक्रिया’ ही हमारे उत्थान या…

मोटिवेशनल स्पीकर के चक्कर में आत्महत्या मत करो

बाजारवाद से प्रेरित वर्तमान ‘मोटिवेशनल उद्योग’ आज भारतीय युवाओं में ऊर्जा के बजाय गहरा अवसाद पैदा कर रहा है। रातों-रात सफलता के जो झूठे सपने मंच से बेचे जा रहे हैं, वह युवाओं को हताशा के ऐसे अंधेरे में धकेल…

मैं शिष्य क्यों नहीं बनाता हूँ

मानवीय चेतना और मनोविज्ञान की गहराइयों में उतरने पर मैंने किसी को भी बिना तैय्यारी के शिष्य नहीं बनाने का निर्णय लिया है, यह शिष्य न बनाने का निर्णय किसी अहंकार का नहीं, बल्कि मानव मन की जटिलताओं और उसकी…