अनुशासन जीवन की सबसे महंगी विलासिता है

यह कथन सतह पर एक तीखा विरोधाभास सा लगता है, क्योंकि सामान्यतः हम अनुशासन को एक ऐसा सरल नियम या ढर्रा मानते हैं जिसे कोई भी व्यक्ति थोड़ी सी जिद या मेहनत से अपना सकता है। लेकिन जब हम इस…

यह कथन सतह पर एक तीखा विरोधाभास सा लगता है, क्योंकि सामान्यतः हम अनुशासन को एक ऐसा सरल नियम या ढर्रा मानते हैं जिसे कोई भी व्यक्ति थोड़ी सी जिद या मेहनत से अपना सकता है। लेकिन जब हम इस…

आज के दौर में ‘पौष्टिक भोजन’ शब्द सुनते ही हमारे मन में एक स्वस्थ शरीर की छवि उभरती है। हम अक्सर यह मानते हैं कि जितना अधिक पोषक तत्वों से भरपूर और ऊर्जावान भोजन हम खाएंगे, हमारा स्वास्थ्य उतना ही…

आधुनिक मनुष्य जिस दुनिया में सांस ले रहा है, वह असल में ईंट-पत्थर या प्राकृतिक संपदा से अधिक, संगठनों और गढ़ी हुई व्यवस्थाओं का एक जटिल ढांचा है। शिक्षा प्रणाली से लेकर आर्थिक तंत्र और कॉरपोरेट संरचनाओं तक, यह सभी…

संविधान की प्रस्तावना और उसके आदर्श कागजों पर बहुत सुंदर और त्रुटिहीन लगते हैं, लेकिन यथार्थ की खुरदरी जमीन पर उतरते ही ये अक्सर खोखले और निरर्थक साबित होते हैं। समानता, न्याय और सार्वभौमिकता के यह सिद्धांत जब सत्ता, स्वार्थ…

जीवन में ईश्वर की कृपा को मापने का वास्तविक पैमाना क्या है? असीमित धन, कृत्रिम विलासिता या समाज में झूठा दिखावा? कदापि नहीं। परमेश्वर की सच्ची कृपा केवल उन सात शाश्वत स्तंभों में निवास करती है, दो वक्त की शुद्ध…

मैं कोई धर्म गुरु नहीं, एक विचारक हूँ परंपरागत रूप से धर्म गुरु अनुयायियों को चमत्कारों, कर्मकांडों और मान्यताओं के जाल में उलझाते हैं। वह प्रायः अनुयायियों को अपने ऊपर निर्भर बनाते हैं। इसके विपरीत, एक विचारक का कार्य व्यक्ति…

वर्तमान विद्यालयों की नींव 18 वीं और 19 वीं शताब्दी की औद्योगिक क्रांति के दौरान रखी गई थी। उस समय समाज को विचारशील मनुष्यों की नहीं, बल्कि कारखानों में काम करने वाले आज्ञाकारी मजदूरों की आवश्यकता थी। एक जैसी वेशभूषा…

दुनिया का सबसे बड़ा तानाशाह कोई राजनीतिक शासक या क्रूर सरकार नहीं, बल्कि हमारा अपना ‘विकृत चित्त समाज’ है। जिसे “सामाजिक तानाशाही” नाम दिया जा सकता है। यह एक ऐसा अदृश्य पिंजरा है, जो बिना किसी तार्किक आधार के, केवल…

सफल व्यक्ति में संत खोजने की नासमझी संसार के हर देश की अपनी एक अलग तासीर है, अपना एक अलग मनोविज्ञान है। किंतु भारत के जनमानस की सोच सबसे विचित्र और गहरे अंतर्विरोधों से घिरी हुई है। यहाँ के आम…

किसी भी संत को वैश्विक ख्याति प्राप्त महापुरुष के रूप में स्थापित करने के लिए एक सुनियोजित योजना और रणनीति की आवश्यकता होती है ! जिसे जन सम्पर्क योजना या मार्केटिंग कह सकते हैं ! किसी संत की पहचान केवल…