yogeshmishralaw

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जिंदगी बहुत सरल है, लेकिन हम इसे आडम्बर से कठिन बना देते हैं

जिंदगी की बुनियादी जरूरतें बहुत कम हैं, भूख के लिए भोजन, तन के लिए कपड़ा, रहने के लिए छत और मन के लिए थोड़ा सा प्रेम, सम्मान और संतुष्टि । और क्या चाहिये जीने के लिये ! यह सब पाना…

चीन का सरोगेसी वॉर

सरोगेसी वॉर से बिना युद्ध लड़े अमेरिका पर कब्ज़ा कर लेगा चीन?” पिछले लगभग 20 वर्षों में चीन के कई अमीर परिवारों ने अमेरिका के संसाधनों पर कब्ज़ा करने के लिये एक नया प्रयास किया है ! जिसमें हजारों चीनी…

गांव से ग्लोबल का दौर ख़त्म

राहु के गोचर चक्र में गांव से ग्लोबल की यात्रा पूरी हो गई है, अब केतु का गोचर चक्र शुरू हो रहा है, अब ग्लोबल से गांव की ओर लौटना ही होगा ! तैयारी कर लीजिए वरना बहुत पछताएंगे ।…

आपका कोई शत्रु नहीं है

कोई भी आपका दुश्मन नहीं है, हम दुनिया को अपने तरह से चलाने के लिये लोगों को अपना दुश्मन बन लेते हैं ! हम अक्सर अपनी परेशानियों, असफलताओं या रिश्तों में कड़वाहट का दोष दूसरों पर मढ़ देते हैं और…

ईश्वर को जानने की शर्त

अक्सर इंसान सोचता है कि जीवन को समझने का मतलब सिर्फ खुद को, अपने करियर को, अपने परिवार को या इंसानी समाज को समझ लेना है। लेकिन शिव इस भ्रम को तोड़ते हैं। वह कहते हैं कि जब तक हमारी…

ईश्वर को अन्दर नहीं तलाश पाये, तो बाहर कैसे तलाशोगे

अंतर्यात्रा का परम सूत्र: गुरुदेव योगेश कुमार मिश्रा के दर्शन का निचोड़ गुरुदेव योगेश कुमार मिश्रा के विचार मनुष्य को भ्रम और धार्मिक मनोरंजन से मुक्त करके आत्म-केंद्रित इन्द्रियगत संकीर्णता से परे ब्रह्मांडीय चेतना और आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाते…

RO का नहीं अभिमंत्रित जल पीजिए

भारतीय संस्कृति में जल को केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन, ऊर्जा और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। प्राचीन काल से ही पूजा-पाठ में ‘आचमन’ और ‘अभिमंत्रित जल’ (मंत्रों से सिद्ध किया हुआ पानी) का उपयोग होता…

आपकी उत्सुकता ही आपका बंधन है

मानव मस्तिष्क इस तरह से विकसित हुआ है कि जब भी कोई नई जानकारी, नया रहस्य या अनिश्चितता सामने आती है, तो हमारे भीतर डोपामीन नामक हार्मोन का स्राव होता है। यह हार्मोन हमें संतुष्टि ही नहीं देता, बल्कि और…

भक्ति अब व्यर्थ का विषय है

विश्व के बदलते बौद्धिक परिवर्तन के अनुसार अब भक्ति की कोई आवश्यकता नहीं है, इस सत्य को विश्व में लगभग सभी धर्मों ने तार्किक दृष्टि से स्वीकार कर लिया है, इसीलिये अब योरोप जहाँ से ईसाइयत पुर दुनियां में फैली…

अंतिम विकल्प शिवत्व की साधना है

मानवता का अंतिम विकल्प शिवत्व की साधना है शिवत्व साधना का अर्थ कृतिम सांसारिक बंधनों और अहंकार से मुक्त होकर स्व का आत्म-साक्षात्कार करना है। यह महज पूजा-पाठ कर्मकाण्ड नहीं, बल्कि स्वयं के रूपांतरण और भीतर दिव्यता के अवतरण की…