भाषा का चरित्र से संबंध
प्रत्येक व्यक्ति के चरित्र का निर्माण उसके पूर्व जन्म के संचित संस्कार और वर्तमान परिवेश के अनुरूप होता है ! किंतु एक विषय पर अभी तक मनोवैज्ञानिक चुप हैं कि क्या मनुष्य के द्वारा बोली जाने वाली भाषा का भी…
प्रत्येक व्यक्ति के चरित्र का निर्माण उसके पूर्व जन्म के संचित संस्कार और वर्तमान परिवेश के अनुरूप होता है ! किंतु एक विषय पर अभी तक मनोवैज्ञानिक चुप हैं कि क्या मनुष्य के द्वारा बोली जाने वाली भाषा का भी…
भारत वर्ष जो कभी विश्व गुरु रहा है ! जहां कभी चाणक्य जैसे राजनीतिज्ञ, पुष्यमित्र और विक्रमादित्य जैसे राजा, राणा प्रताप और शिवाजी जैसे योद्धा, महर्षि भरद्वाज और विश्वामित्र जैसे वैज्ञानिक, वराह मिहिर और महर्षि अगस्त्य से ज्योतिषी, चरक और…
परम्परागत भारतीय कृषि पर कार्पोरेट का जिस तरह से कब्ज़ा हो रहा है, उससे जो तस्वीर उभरकर आ रही है, वह अत्यंत ही भयावह है ! दुनिया भर में खेती का कार्पोरेटीकरण किया जा रहा है ! इसी की चपेट…
बताया गया है कि लोकसभा में किसानों के हितों में तीन बिल (विधेयक) पास हुये हैं ! लेकिन इन विधेयकों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल केंद्रीय मंत्री श्री हरसिमरत कौर बादल ने अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया…
क्या आप जानते हैं कि भारत में प्रतिवर्ष इतना अनाज पैदा होता है कि भारत यदि चाहे तो पूरी दुनिया के आठ सौ करोड़ लोगों को 6 माह तक अकेले भोजन उपलब्ध करवा सकता है ! लेकिन फिर भी भारत…
क्रांति के विषय में कोई भी बात करने के पहले दो बिंदुओं को समझ लेना परम आवश्यक है ! पहला क्रांति कभी भी भौतिक रूप में नहीं होती है ! भौतिक रूप से तो बस क्रांति के नाम पर उत्पात…
भारत में जो कभी 1,972 तरह के ग्रामीण कुटीर उद्योग थे ! उनमें से अब कुल 96 वस्तुओं के उत्पादक ग्रामोद्योग बचे हैं ! जिन्हें खनिज आधारित उद्योग, वनाधारित उद्योग, कृषि आधारित उद्योग, चमड़ा और रसायन उद्योग, गैर परम्परागत ऊर्जा…
2 फरवरी 1835 को ब्रिटेन की संसद में ‘थॉमस बैबिंगटन मैकाले’ के भारत के प्रति विचार और योजना ‘मैं भारत में काफी घूमा हूं ! दाएं-बाएं, इधर-उधर मैंने यह देश छान मारा और मुझे एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं दिखाई…
दुनिया में दो तरह के राष्ट्र हैं ! एक वह जहां के निवासी पीढ़ी दर पीढ़ी से वही निवास करते चले आ रहे हैं ! जैसे भारत, इंग्लैंड, अरब, चीन, रूस आदि और दूसरे ओर वह राष्ट्र हैं जहां के…
भारत को वित्तीय आत्मनिर्भर बनाने का पहला सूत्र यह है कि भारत में शिक्षा के साथ-साथ कम से कम एक अनिवार्य व्यवहारिक कौशल ज्ञान जरूर होना चाहिए ! जिससे व्यक्ति अक्षर ज्ञान के साथ-साथ जीविकोपार्जन के लिए भी प्रशिक्षण प्राप्त…