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पूतना राक्षसी नहीं चंद्रवंशीय क्षत्राणी थी !

पूतना राक्षसी नहीं बल्कि चंद्रवंशीय क्षत्राणी थी ! उसके बचपन का नाम स्वाति था और वह कंस के बचपन की मित्र और कंस के सेनापति प्रद्युम्न की पत्नी थी ! जब कंस को पता चला कि उसके पिता उग्रसेन के…

“नारी स्वतंत्रता” के नाम पर ही नारियों पर सर्वाधिक आक्रमण क्यों : Yogesh Mishra

आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया कि विभिन्न माध्यमों से हिन्दू लड़कियों को ही सुनियोजित षड्यन्त्र के तहत महिलाओं को “नारी स्वतंत्रता” का पाठ पढ़ा कर लिबरल, कम्यूनिस्ट आदि में क्यों परिवर्तित किया जा रहा है ! आप अगर…

नर्मदा अनादि शैव नदी है : Yogesh Mishra

जब पृथ्वी पर गंगा नहीं थी, तब भी अनादि काल से शैव नर्मदा नदी भारत के संस्कृति को सजो रही थी ! यह हिमालय से नहीं बल्कि अमरकंटक के तप स्थली से निकली थी ! शुरू में मामूली दिखने वाली…

नई विश्व व्यवस्था में कृतिम भुखमरी का दुष्चक्र

नई शिक्षा नीति बाबू नहीं वैश्विक मजदूर बनायेंगे : Yogesh Mishra ए. आई. अर्थात आर्टिफिसियल इटेलिजेंस या कृतिम बौद्धिकता के आने के बाद वैसे भी पूरी दुनियां में अब बाबू की जगह बौद्धिक मजदूरों की मांग बढ़ी है ! अगर…

नई विश्व व्यवस्था में कृतिम भुखमरी का दुष्चक्र

आने वाले समय में अन्न पर पहला हक़ रोटी, शराब और पेट्रोल में किसका होगा ! जैसा कि फोटो से स्पष्ट है कि गोदामों में अनाज सड़ता नहीं बल्कि किसी के इशारे पर जानबूझ कर खाने का अनाज सड़वाया जाता…

न खाऊँगा न खाने दूंगा का मनोविज्ञान : Yogesh Mishra

एक लोकप्रिय प्रभावशाली नेता के एक राजनीतिक बयान पर मेरी कई मनोचिकित्सकों से वार्ता हुई ! मुझे अलग-अलग व्यक्ति ने इस वक्तव्य के मनोविज्ञान को अलग-अलग तरह से समझाने की चेष्टा की ! किंतु मैं यह समझ पाया कि जो…

ध्यान लिंग साधना क्या है : Yogesh Mishra

ध्यान लिंग साधना शैवों की अति प्राचीन साधना पद्धति है ! इससे संसार में ब्रह्माण्डीय ऊर्जा से कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है ! ध्यान लिंग के निर्माण में एक ताँबे के शिव लिंग में ठोस किया हुआ पारा…

धर्म के लाशों को ढ़ोते धार्मिक गिरोह : Yogesh Mishra

अनादि काल से सृष्टि में एक ही धर्म रहा है ! वह प्रकृति का धर्म ! जो निरंतर मानव कल्याण के अनुरूप प्रकृति की तरह परिवर्तनशील रहा है ! किंतु दुर्भाग्य यह रहा कि मनुष्य ने प्राकृतिक धर्म को छोड़…

धर्म का अर्थ चक्र : Yogesh Mishra

क्या आप जानते हैं कि प्राचीन काल में धर्म का अर्थ चक्र किस तरह भ्रमण करता था ! आखिर वह क्या वजह थी कि पूरी दुनिया का सोना भारत में इकट्ठा होता था और भारत पूरी दुनिया का पेट भरता…

देवताओं ने छल से सीखी थी मृत संजीवनी विद्या : Yogesh Mishra

यह कथा उस काल की है ! जब वैष्णव जीवन शैली के पोषक देवता पूरी दुनियां में वैष्णव धर्म की स्थापना करना चाहते थे और शैव जीवन शैली के पोषक दानव के अपने अस्तित्व रक्षा के लिये विश्व व्यापी स्तर…