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गोस्वामी तुलसीदास हिंदू समाज के लिये आदर्श क्यों हैं ? : Yogesh Mishra

गोस्वामी तुलसीदास का नाम लेते ही व्यक्ति के ध्यान में रामचरितमानस का नाम स्वत: ही प्रगट हो जाता है लेकिन यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक, रामलला नहछू, गीतावली, दोहावली, विनय पत्रिका, बरवै रामायण और…

तर्पण मात्र अपने पूर्वजों से जुड़ी प्रक्रिया नहीं है : Yogesh Mishra

यह शास्त्रीय अवधारणा है कि तर्पण में पूर्वजों को अर्पित किया जाने वाले जल में दूध, जौ, चावल, तिल, चंदन, फूल आदि से हमारे पूर्वज तृप्त होकर हमें आशीर्वाद देते हैं ! इसके लिये कुशा के सहारे से जल की…

लंकेश काल रक्षिणी साधना : Yogesh Mishra

विशेष : इस लेख को बस सिर्फ शैव विचारक ही पढ़ें ! रावण ने कभी भी धन की प्राप्ति के लिए लक्ष्मी की आराधना नहीं की ! जबकि लक्ष्मी रावण के परम मित्र दक्षिण भारत के तटीय राजा सागर की…

धर्म के सभी प्रपंच धोखा हैं : Yogesh Mishra

ईश्वर ने कार्य कारण की व्यवस्था के तहत सृष्टि का निर्माण किया है ! जिसे जीव और प्रकृति मिलकर कार्य कारण की व्यवस्था के तहत चलाते हैं ! इस कार्य कारण की व्यवस्था को न तो देवता बदल सकता है…

भारत के युवाओं की समस्या : Yogesh Mishra

कहने को तो भारत एक अति विकसित विकासशील देश है ! रोज रोज विकास के नये –नये कहानी किस्से भी सुनने में आते हैं ! किन्तु इसके बाद भी आपने कभी यह महसूस किया कि गरीब परिवारों के बच्चे गरीबी…

भगवान शिव के सिर की गंगा का अपहरण : Yogesh Mishra

पौराणिक कथाओं के अनुसार ब्रह्मा जी के कमंडल से निकली जल देवी गंगा को भगवान शिव ने अपनी जटाओं में रोक लिया और फिर और वैष्णव के सूर्यवंशी महाराजा सगर के 60 हजार पुत्रों को मोक्ष देने हेतु उन्हीं के…

मौर्यवंशी शासक सनातन धर्म विरोधी थे : Yogesh Mishra

यह एक बहुत बड़ी भ्रांति है कि चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने अंतिम समय में बौद्ध धर्म अपना लिया था ! जबकि सच्चाई यह है कि चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य के दिशा निर्देश में लगभग 24 वर्ष तक शासन करने के…

गोस्वामी तुलसीदास खानदानी कवि थे : Yogesh Mishra

बहुत कम लोग यह जानते हैं कि गोस्वामी तुलसीदास खानदानी कवि थे ! इनके बाबा का नाम पं० सच्चिदानंद शुक्ल था ! जो अपने क्षेत्र के मशहूर कथावाचक एवं प्रसिद्ध भजन गायक भी थे ! वह अपने कथावाचन के लिए…

शैव और वैष्णव योगी में अंतर : Yogesh Mishra

भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद भगवत गीता के छंठे अध्याय के अठारहवे श्लोक में कहा है कि – यदा विनियतं चित्तमात्मन्येवावतिष्ठते !! निःस्पृहः सर्वकामेभ्यो युक्त इत्युच्यते तदा॥ 6/18 अर्थात्- जब (यदा), विशेष रूप से संयत किया हुआ (विनियतं), चित्त (चित्तम्),…

रावण ने काशी यात्रा क्यों नहीं की : Yogesh Mishra

काशी भगवान शिव द्वारा स्थापित अनादि नगरी होने के बाद भी शिव भक्त रावण ने अपने संपूर्ण जीवन काल में कभी भी काशी यात्रा नहीं की ! जबकि वह प्राय: काशी के ऊपर से पुष्पक विमान द्वारा कैलाश पर्वत भगवान…