क्या बात है क्यों हस्ती मिटती नहीं हमारी

मध्य युग में पूरे यूरोप पर राज करने वाला रोम ( इटली ) नष्ट होने के कगार पर आ गया है ! मध्य पूर्व को अपने कदमो से रौंदने वाला ओस्मानिया साम्राज्य (ईरान,सऊदी, टर्की) अब अपने घुटनो पर है !…
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मध्य युग में पूरे यूरोप पर राज करने वाला रोम ( इटली ) नष्ट होने के कगार पर आ गया है ! मध्य पूर्व को अपने कदमो से रौंदने वाला ओस्मानिया साम्राज्य (ईरान,सऊदी, टर्की) अब अपने घुटनो पर है !…

समस्त विश्व प्राचीन काल और मध्यकाल में अकाल मानसून के अनियमित होने के पड़ते थे ! परन्तु उच्च तकनीकी के आगमन के पश्चात अब अकाल प्रायोजित तरीके से डाले जाते हैं ! इस परम्परा की शुरुआत पूरे विश्व में ब्रिटिश…

जैसा कि आपको वैष्णव कथा वाचकों द्वारा बतलाया गया है कि पृथ्वी पर विष्णु ने बार-बार धर्म की स्थापना के लिये विधर्मियों के साथ 12 महा युद्ध लड़े ! जिसके लिये विष्णु को 8 अलग-अलग अवतार लेने पड़े ! लेकिन…

वैसे कहने को तो हम सभी राजा सूर्य, विवस्वान्, चंद्र, ऋषि, मुनि, मनु और कश्यप ऋषि आदि की संतानें हैं ! पर इतिहास साक्षी है हम हमेशा से मात्र अपने साम्राज्य विस्तार के लिये अपनों से ही लड़ते आये हैं…

कुछ विश्व प्रसिद्द डाक्टरों और वैज्ञानिकों का मत है कि क रोना वायरस की सैंपल टेस्टिंग के लिये जो “स्वॉब स्टिक” नाक के अंदर डाली जा रही है ! वह ‘ब्लड ब्रेन बैरियर’ को नष्ट कर रही है ! यह…

कंप्यूटर विज्ञान में कृत्रिम बुद्धि के शोध को “होशियार एजेंट” का अध्ययन माना जाता रहा है ! होशियार एजेंट अर्थात कोई भी ऐसा सयंत्र है जो अपने आसपास के वातावरण को देखकर, अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की कोशिश करता…

आज हमें कथावाचकों के भगवान की नहीं बल्कि उनके चरित्र विश्लेषण और कार्य शैली को जानने की आवश्यकता है ! भगवान के जीवन गाथा के दो पक्ष होते हैं पहला वह जिसे कथावाचक ढोलक मजीरा के साथ गा गा कर…

देश के हर कोनों से ऐसी सूचना प्राप्त हो रही है कि इस गंभीर महामारी के काल में जो लोग अपना पैसा लगाकर अपना घर, मकान, जेवर आदि बेचकर दूसरों की सेवा कर रहे हैं या दूसरों को जिंदा रखने…
क रोना एक बहुत बड़ा व विश्वव्यापी षड्यंत्र है ! अमेरिका जैसे पूंजीवादी देशों के शासक भी विश्व सत्ता के इशारे पर क रोना के मिथ को दुनिया में स्थापित करने के लिये अपने छ: लाख नागरिकों की जान भी…

इस पूरे ब्रह्मांड की उत्पत्ति ब्रह्म तत्व और ब्रह्म ऊर्जा में व्याप्त तरंगों से हुई है ! यह संसार भी उसी ब्रह्म तत्व और ब्रह्म ऊर्जा का प्रतिबिंब है ! इससे परे इस सृष्टि में कुछ भी नहीं है !…