Category Astrology

वैदिक ज्योतिष में राशियों का प्रयोग मात्र कृषि गणना के लिय होता था !

भारत का प्राचीनतम उपलब्ध साहित्य वैदिक साहित्य है ! वैदिक कालीन भारतीय यज्ञ किया करते थे ! यज्ञों के विशिष्ट फल प्राप्त करने के लियह उन्हें निर्धारित समय पर करना आवश्यक था इसलिए वैदिककाल से ही भारतीयों ने वहधों द्वारा…

जानिए कुण्डली में नकारात्मक ग्रहों के सकारात्मक परिणाम !

नकारात्मक दोष, विकृतियां, दोष किसी भी कुंडली में उपस्थित हो सकते हैं ! हालांकि, किसी को भी इसके बारे में चिंता नहीं करना चाहिए ! ज्योतिषीय अंतर्दृष्टि आपको इन नकारात्मक दोषों को सकारात्मक योगों में बदलने में मदद कर सकती…

जानिए गुरु चांडाल योग के हानि और लाभ !!

किसी कुंडली में गुरु अर्थात बृहस्पति के साथ राहु या केतु में से कोई एक स्थित हो अथवा किसी कुंडली में गुरु का राहु अथवा केतु के साथ दृष्टि आदि से कोई संबंध बन रहा हो तो ऐसी कुंडली में…

बिग बैंग के अनुसार ब्रह्मांड की समय रेखा !!

वर्तमान मे ब्रह्माण्ड के जन्म संबधित सबसे मान्य सिद्धांत बिग बैंग सिद्धांत है ! इसके अनुसार ब्रह्मांड का जन्म एक बिंदु से हुआ था ! विज्ञान द्वारा प्राप्त सभी प्रमाण इसी सिद्धांत के समर्थन मे है ! इसके अतिरिक्त अन्य…

जानिये ज्योतिष में बाधक ग्रह कब अरिष्टकारी होंगे !

वैदिक ज्योतिष में बाधक ग्रह का जिक्र किया गया है तो कुछ ना कुछ अरिष्ट होता ही होगा, लेकिन इन अनिष्टकारी बातों का अध्ययन बिना सोचे समझे नहीं करना चाहिये ! कुंडली की सभी बातों का बारीकी से अध्ययन करने…

जानिए बाधक ग्रह की आपके जीवन में बाधा !!

वैदिक ज्योतिष के अन्तर्गत अनगिनत योगों का उल्लेख मिलता है ! बहुत से योग अच्छे हैं तो बहुत से योग खराब भी हैं ! जन्म कुंडली में अरिष्ट की व्याख्या भावों के आधार पर भी की जाती है ! कुछ…

जानिए क्यों संस्कार गणना का इतिहास अदभुत है !

ऋग्वेद में संस्कारों का उल्लेख नहीं है, किन्तु इस ग्रंथ के कुछ सूक्तों में विवाह, गर्भाधान और अंत्येष्टि से संबंधित कुछ धार्मिक कृत्यों का वर्णन मिलता है ! यजुर्वेद में केवल श्रौत यज्ञों का उल्लेख है, इसलिए इस ग्रंथ के…

जानिए सनातन ज्योतिष को जानिये एक दृष्टि में !

ज्योतिषमान जागृत जगत की एक ज्योति का नाम ही जीवन है ! ज्योति का पर्याय ज्योतिष है अथवा ज्योतिस्वरूप ब्रह्म की व्याख्या का नाम ज्योतिष है ! वेदरूप ज्योतिष ब्रह्मरूप ज्योति का ज्योतिष है जिसका द्वितीय नाम संवत्कर ब्रह्म या…

कुंडली के अनुसार व्यवसाय में सफलता के योग !

आज के समय में जहाँ अपने करियर को लेकर अधिकांश युवा किसी ना किसी प्रोफेशनल कोर्स को करने के बाद एक जॉब की इच्छा रखते हैं वहीँ बहुत से लोग केवल स्वतंत्र व्यापार करने में ही रुचि रखते हैं किसी…

जानिए : विशिष्ट ग्रह योग क्या है !

किसी भी ग्रह की या ग्रहों की विशेष प्रकार की स्थिति को ज्योतिष में योग कहा जाता है ! योग का शाब्दिक अर्थ जोड़ या मिलना होता है ! इन योगों में भी ग्रह की स्थान विशेषगत राशि से युति…