कर्म, भाग्य और ज्योतिष का आपसी सम्बन्ध ! : Yogesh Mishra

कर्म, मनुष्य का परमधर्म है ! पूरी गीता ही निष्काम कर्म योग का ही शास्त्र है ! कर्म ही व्यक्ति को बंधन में बांधता है ! व्यक्ति का जन्म और मरण, उसके कर्मों के अनुसार होता है ! व्यक्ति का…

कर्म, मनुष्य का परमधर्म है ! पूरी गीता ही निष्काम कर्म योग का ही शास्त्र है ! कर्म ही व्यक्ति को बंधन में बांधता है ! व्यक्ति का जन्म और मरण, उसके कर्मों के अनुसार होता है ! व्यक्ति का…

आज के समय की संतान सम्बन्धी गंभीर समस्या गर्भपात के विशेष योगों में से प्रमुख 10 योगों की चर्चा की गयी है ! संतान “जातक” की कुंडली के पंचम भाव अर्थात कुंडली के दाहिने की और पाँचवे घर को कहा…

शुभ मुहूर्त में गर्भाधान संस्कार करने से सुंदर, स्वस्थ, तेजस्वी, गुणवान, बुद्धिमान, प्रतिभाशाली और दीर्घायु संतान का जन्म होता है ! इसलिये इस प्रथम गर्भधान संस्कार का महत्व सर्वाधिक है ! संस्कार का अर्थ संस्करण, परिष्करण, विमलीकरण अथवा विशुद्धिकरण से…

शास्त्रीय घटनायें यह बतलाती हैं कि जब भी कभी एक माह में तीन बार ग्रहण एक साथ पड़ते हैं तो पृथ्वी पर बहुत बड़ी उथल-पुथल होती है ! बड़े-बड़े युद्ध होते हैं ! आग अग्नि कांड होते हैं ! बाढ़…

आज कल बार बार चन्द्रमा रक्त वर्णीय हो रहा है ! इस साल जून और जुलाई के महीने में करीब 30 दिन के अंदर तीन बड़े ग्रहण लगने जा रहे हैं ! ऐसी ही घटना महाभारत युद्ध के पहले भी…

वैष्णव ऐसा मानते हैं कि धर्म की संस्थापना के लिये श्री विष्णु हर महायुग में दश अवतार लेते हैं ! जिनमें अन्तिम तो महायुग के अन्त में आते हैं जिनके लिये कालखण्ड बचता ही नहीं ! अतः नौ अवतार ही…

हमारे जीवन में अब अधिक जागरूकता और बुद्धिमत्ता आ गई है ! यही समय है जब सिर्फ जीवित रहने की भावना को दबा कर असीम बनने की चाह को बढ़ाया जा सकता है ! असीम होने की तीव्रता हममें इसलिये…

मैं मात्र नारद पुराण की बात नहीं करता ! भारत के कृष्ण भक्त सूरदास ने 500 साल पहले ही बदला दिया था कि 21 वीं सदी की शुरुआत होने के साथ ही विश्व बहुत बड़ी महामारी से जुझेगा ! जिस…

कहने को तो धरती हमारी माता है और हम उसकी संतान हैं ! मनुष्य धरती की छाती से उत्पन्न जल, अन्न तथा उसके वायुमंडल से ऑक्सीजन ग्रहण कर जीवन धारण करता है, लेकिन अपने क्षुद्र स्वार्थों की खातिर उसी धरती…

एक अधिवक्ता और ज्योतिषी होने के नाते प्रायः मेरे समक्ष आम चर्चा में यह प्रश्न खड़ा किया जाता है कि पुरुषार्थ बड़ा है या भाग्य ! आज मैं इस विषय पर अपना मत व्यक्त कर रहा हूं ! मेरे दृष्टिकोण…