संसार में सफलता आपके हाँथ में है ! : Yogesh Mishra

हमारे जीवन में अब अधिक जागरूकता और बुद्धिमत्ता आ गई है ! यही समय है जब सिर्फ जीवित रहने की भावना को दबा कर असीम बनने की चाह को बढ़ाया जा सकता है ! असीम होने की तीव्रता हममें इसलिये…

हमारे जीवन में अब अधिक जागरूकता और बुद्धिमत्ता आ गई है ! यही समय है जब सिर्फ जीवित रहने की भावना को दबा कर असीम बनने की चाह को बढ़ाया जा सकता है ! असीम होने की तीव्रता हममें इसलिये…

मैं मात्र नारद पुराण की बात नहीं करता ! भारत के कृष्ण भक्त सूरदास ने 500 साल पहले ही बदला दिया था कि 21 वीं सदी की शुरुआत होने के साथ ही विश्व बहुत बड़ी महामारी से जुझेगा ! जिस…

कहने को तो धरती हमारी माता है और हम उसकी संतान हैं ! मनुष्य धरती की छाती से उत्पन्न जल, अन्न तथा उसके वायुमंडल से ऑक्सीजन ग्रहण कर जीवन धारण करता है, लेकिन अपने क्षुद्र स्वार्थों की खातिर उसी धरती…

एक अधिवक्ता और ज्योतिषी होने के नाते प्रायः मेरे समक्ष आम चर्चा में यह प्रश्न खड़ा किया जाता है कि पुरुषार्थ बड़ा है या भाग्य ! आज मैं इस विषय पर अपना मत व्यक्त कर रहा हूं ! मेरे दृष्टिकोण…

न्याय के देवता और दंडनायक नाम से लोकप्रिय शनि देव मौनी अमावस्या के दिन शुक्रवार 24 जनवरी 2020 को अपनी राशि मकर में प्रवेश कर चुके हैं ! अपनी ही राशि मकर में आने के कारण वह अत्यधिक प्रभावशाली और…

संपूर्ण ब्रह्मांड में जो भी है वह द्रव्य एवं ऊर्जा का संगम है ! समस्त दृश्य एवं अदृश्य इन्ही दोनो के संयोग से घटित होता है ! हम और हमारा मस्तिष्क इसके अपवाद नहीं हैं ! सृष्टि के मूलभूत कणों…

वैदिक दर्शन के परिचय के लिये यह वेदान्गी भूत ज्योतिष दर्शन सूर्य के समान प्रकाश देने का काम करता है,अतएव इसे वेद पुरुष या ब्रह्मपुरुष का चक्षु: (सूर्य) भी कहा गया है ! ज्योतिषामयनं चक्षु: सूर्यो अजायत,इत्यादि आगम वचनों के…

सूर्य के उत्तरायण के आरंभ के सम्बन्ध में अनुशासन पर्व के 32वें अध्याय के पांचवें श्लोक को देखें:- उषित्वा शर्वरी श्रीमान पंचाशन्न गरोत्त में ! समयं कौरवा ग्रयस्य संस्कार पुरूषर्षभ: ! ! अर्थात पचास रात्रि बीतने तक उस उत्तम नगर…

प्राचीन काल से हमारे ऋषि-महर्षि ज्योतिष शास्त्र पर नवीन शोध करते रहे हैं ! आज भी यह शोधकार्य निरंतर चल रहा है, और युगों-युगों तक होता रहेगा ! फलित ज्योतिष में कुण्डली का फलादेश करने की अनेक पद्धितियां हैं !…

हम आज भाग्य की विशिष्ट शक्ति के दुरूपयोग पर चिंतन करते हैं जिसके कारण लगभग सभी साधक और साधारण मनुष्य न केवल अपनी हानि करते हैं बल्कि अपना स्वयं का भाग्य भी नष्ट करते हैं ! विषय गंभीर है पर…