जानिये यूरोप को अब क्यों नष्ट हो जाना चाहिये : Yogesh Mishra

कल रात्रि में मेरे एक शिष्य के बेटे का फोन इंग्लैंड से आया ! अन्य बातों के अतिरिक्त वह बतलाने लगा कि अति आधुनिक यूरोप में कोरोना का कितना प्रचंड कहर है और पूछने लगा कि ऐसा क्यों हो रहा…

कल रात्रि में मेरे एक शिष्य के बेटे का फोन इंग्लैंड से आया ! अन्य बातों के अतिरिक्त वह बतलाने लगा कि अति आधुनिक यूरोप में कोरोना का कितना प्रचंड कहर है और पूछने लगा कि ऐसा क्यों हो रहा…

मैंने अपने पूर्व के लेख में ईसाई शासकों द्वारा पूरी दुनिया में जो अत्याचार किये गये थे ! उनका विस्तृत वृत्तांत दिया है ! जिससे यह सिद्ध होता है कि वास्तव में यीशु मसीह जैसे संत की ओट में खड़े…

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कोई भी राष्ट्र नागरिकों के समूह से बनता है और यदि नागरिकों का समूह अशिक्षित और जाहिल होता है तो उस राष्ट्र का विकास हो पाना असंभव होता है ! इसके अतिरिक्त दूसरी…

जो लोग राजनीति की समझ नहीं रखते वह आपातकाल की सौ कमियां गिना देंगे ! लेकिन आपने कभी विचार किया कि आपातकाल के 19 महीनों में देश में जो हुआ ! क्या उसकी वास्तव में आवश्यकता देश को नहीं थी…

प्रायः लोग अंधभक्त और चमचे को एक ही मान लेते हैं ! लेकिन यह गलत है ! दोनों में ही गुणधर्म, प्रवृत्ति, आचार-विचार और उद्देश्यों के अनुरूप बहुत अंतर होता है ! चमचा वह नायाब जीव है ! जो अपने…

आजकल एक मूर्खतापूर्ण पोस्ट फेसबुक और व्हाट्सएप पर खूब घूम रही है कि धर्म छुट्टी पर है और विज्ञान काम कर रहा है ! यह तर्क ईसाइयों द्वारा लोगों की सनातन हिन्दू धर्म के देवी देवता और भगवान में आस्था…

शास्त्र पढ़ने के कई कारण होते हैं ! कुछ लोग शास्त्रों का अध्ययन अपना समय पास करने के लिये करते हैं ! तो कुछ लोग अपने बौद्धिक मनोरंजन के लिये भी शास्त्रों का अध्ययन करते हैं ! कुछ लोग ईश्वर…
शास्त्र पढ़ने के कई कारण होते हैं ! कुछ लोग शास्त्रों का अध्ययन अपना समय पास करने के लिये करते हैं ! तो कुछ लोग अपने बौद्धिक मनोरंजन के लिये भी शास्त्रों का अध्ययन करते हैं ! कुछ लोग ईश्वर…

यह जीव विज्ञान का बहुत ही सामान्य सा सिद्धांत है कि जो व्यक्ति जिस परिवेश में रहता है या जो भोजन करता है ! शरीर उसी के अनुरूप अपना विकास कर लेता है अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाये तो…

भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में स्वयं अर्जुन को उपदेश देते हुये कहा है कि तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया ! उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिन: !! अध्याय 4, श्लोक 34 ज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ, उनको भलीभाँति…