भारत में धर्मांतरण का कहर !

भारत में वर्ष 2030 तक प्रत्येक ग्राम में चर्च और प्रत्येक भारतीय के हाथ में बाईबिल पहुंचाने की ईसाइयों की महत्वाकांक्षी योजना है ! जिसे ‘मैंडेट मिशन’ का नाम दिया गया है ! इसका लक्ष्य भारत के पांच लाख गांवों…

भारत में वर्ष 2030 तक प्रत्येक ग्राम में चर्च और प्रत्येक भारतीय के हाथ में बाईबिल पहुंचाने की ईसाइयों की महत्वाकांक्षी योजना है ! जिसे ‘मैंडेट मिशन’ का नाम दिया गया है ! इसका लक्ष्य भारत के पांच लाख गांवों…

वाराणसी के राजेंद्र प्रसाद घाट से सटे मान मंदिर घाट स्थित मानसिंह वेदशाला में दिल्ली के जंतर मंतर जैसा ही मिनी जंतर मंतर बनवाया है ! इस जंतर मंतर का निर्माण जयपुर के महाराजा जय सिंह ने करवाया था !…

कश्यप ऋषि के नाम पर ही कश्यप सागर (कैस्पियन सागर) और कश्मीर का प्राचीन नाम था ! शोधकर्ताओं के अनुसार कैस्पियन सागर से लेकर कश्मीर तक ऋषि कश्यप के कुल के लोगों का राज फैला हुआ था ! कश्यप ऋषि…

भारत के संविधान के अनुच्छेद 369 औरअनुच्छेद 371 भारत में विशेष राज्य का दर्जा पाने वाले राज्यों की कुल संख्या 11 है ! अनुच्छेद 371 – (क) नागालैंड, अनुच्छेद 3- 71 – (ख) – असम 371 (ग) – मणिपुर आदि…

अनुच्छेद 370 तीन भागों में बंटा हुआ है ! जम्मू-कश्मीर के बारे में अस्थाई प्रावधान है ! जिसको या तो बदला जा सकता है या फिर हटाया जा सकता है ! अमित शाह के बयान के मुताबिक 370(1) बाकायदा कायम…

मुम्बई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के लिए महाराष्ट्र के समुद्री इलाकों के 54 हज़ार मैंग्रोव के पेड़ काटे जाएंगे ! यह बस शुरुआत है उस कथित विकास का जिसकी कीमत बस कुछ वर्षों बाद पूरा मुम्बई और महाराष्ट्र चुकाने वाला है…

आधुनिक युग मे लोकतन्त्र को सर्वश्रेष्ठ शासन प्रणाली माना जाता है ! समस्त विश्व में इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की जाती है ! क्यों न हो, इस प्रणाली मे जनता द्वारा जनता के कल्याण के लिए जनता द्वारा शासन किया जाना…

अमेरिकी सरकार की पेटेंट कानून से आज भी भारत पर निशाना साधकर रखा गया है ! बावजूद इसके, इसको लेकर ज्यादा हो-हल्ला नहीं हो पाता है क्योंकि मामला तकनीकी-कानूनी है जिसे समझना आसान नहीं है ! आईये हम इसे सरल…

देश में नक्सलवाद का सिलसिला पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी में साठ के दशक में शुरू हुआ ! प्रारम्भ में नक्सलवाद को इस तर्क के साथ आगे बढ़ाया गया कि अत्यंत पिछड़े इलाकों के गरीब-वंचित वर्ग और विशेषतः आदिवासी समाज को…

रेग्यूलेटिंग एक्ट जल्दबाजी में पारित किया गया था ! अतः लागू होने के कुछ समय पश्चात् ही इसके दोष स्पष्ट रूप से प्रकट होने लगे थे ! मद्रास तथा बम्बई की प्रेसीडेन्सियों पर बंगाल का पर्याप्त नियंत्रण नहीं था, जिसके…