पुराण वेदों का व्याख्यातिक स्वरूप है ! : Yogesh Mishra

वैसे आर्य समाजी पुराणों की बहुत आलोचना करते हैं ! दयानंद सरस्वती ने तो पुराणों के विषय में यहां तक कहा था कि “पुराणों की रचना लोगों ने भांग के नशे में की थी !” इसलिये आर्य समाजी यह मानते…

वैसे आर्य समाजी पुराणों की बहुत आलोचना करते हैं ! दयानंद सरस्वती ने तो पुराणों के विषय में यहां तक कहा था कि “पुराणों की रचना लोगों ने भांग के नशे में की थी !” इसलिये आर्य समाजी यह मानते…

वैसे तो कोरोना भागने के चक्कर में हमने देश भर में थालियाँ पीट डालीं ! कुछ उत्साही लोगों ने थालियों के साथ-साथ शंख भी बजाया ! जिसका विधर्मियों ने खूब जम के उपहास किया ! तब मेरे मन में एक…

आज संस्कृत भाषा के विषय में हमारे पास कई मिथ्या सूचनायें हैं ! उनमें से सब से प्रसिद्ध सूचना यह है कि संस्कृत भाषा के व्याकरणकर्ता कौन थे ? यदि कोई आप से कहे कि महर्षि पाणिनि संस्कृत के व्याकरण…

कुमारिल भट्ट, मंडन मिश्र और शंकराचार्य जैसे धर्म योद्धा ने जब भारत से बौद्ध धर्म उखाड़ कर फेक दिया और सनातन धर्म की पुनः स्थापना कर दी ! तब बौखलाये बौद्ध धर्म अनुयायियों ने भारत में सनातन धर्म की बरबादी…

26 जून 1975 की सुबह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रेडियो पर आपातकाल की घोषणा करते हुये पूरा देश को चौंका दिया ! उन्होंने राष्ट्र को समबोधित करते हुये बतलाया कि 25 जून 1975 की आधी रात से देश में…

किसी भी चीज को प्राप्त करने के लिये हमको उसका सही तरीका अपनाना होगा, अन्यथा वह काम ठीक से सम्पन्न नहीं होगा ! अगर हम बेवकूफीपूर्ण नैतिकता, सिद्धांत और मूल्यों की दुहाई देते रहेंगे तो इनसे कुछ भी कार्य बनने…

कर्म, मनुष्य का परमधर्म है ! पूरी गीता ही निष्काम कर्म योग का ही शास्त्र है ! कर्म ही व्यक्ति को बंधन में बांधता है ! व्यक्ति का जन्म और मरण, उसके कर्मों के अनुसार होता है ! व्यक्ति का…

मंत्र की उत्पत्ति विश्वास से और सतत मनन से हुई है ! आदि काल में मंत्र और धर्म में बड़ा संबंध था ! प्रार्थना को एक प्रकार का मंत्र माना जाता था ! मनुष्य का ऐसा विश्वास था कि प्रार्थना…

सनातन शास्त्रों का अध्ययन और अध्ययन उपरांत उसका मनन, चिंतन और व्याख्या यह सभी अत्यंत रहस्य पूर्ण प्रक्रिया है ! जिसे सामान्य सांसारिक बुद्धि से नहीं समझा जा सकता है क्योंकि जब व्यक्ति सांसारिक चिंतन वाला होता है ! तब…

भारत को लूटने के बाद ब्रिटेन और बाद में यूरोप में वर्ष 1780 से 1820 के बीच हुये प्रचंड औद्योगिक प्रगति के फलस्वरूप सामाजिक, आर्थिक, राजनितिक तथा वैचारिक क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन हुये ! इसका प्रभाव इंग्लैण्ड तक ही सिमित…