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रासायनिक हथियार और जैविक हथियार में अंतर  : Yogesh Mishra

रासायनिक हथियारों से आशय ऐसे हथियारों से है जिनमें इंसानी शरीर पर हमला करने वाले विषेलै एवं रासायनिक तत्व शामिल होते हैं ! रासायनिक हथियारों की कई श्रेणियां हैं ! कुछ रासायनिक हथियार ऐसे होते हैं जिनमें इंसान का दम…

मोटीवेशनल स्पीच, धंधा है जो गंदा है : Yogesh Mishra

प्राय: मोटीवेशनल स्पीच सुनता कौन है जो दुनियांदारी से अनभिज्ञ है और मोटीवेशनल स्पीच देता कौन है ? जो खुद कभी किसी धंधे में नहीं रहा है ! अर्थात मोटीवेशनल स्पीच का धंधा ठीक उस धार्मिक वैष्णव कथा वाचन जैसा…

मिट्टी बचाओ आंदोलन  का षडयंत्र : Yogesh Mishra

वैश्विक आंदोलन ‘सेव सॉयल’ के हिस्से के रूप में, ईशा फाउंडेशन और ‘कॉन्शियस प्लैनेट मूवमेंट’ के संस्थापक, जग्गी वासुदेव उर्फ़ सद्गुरु  जी महाराज  21 मार्च 2022 से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अपनी मोटरसाइकिल यात्रा लंदन से शुरू कर…

आज मांग नहीं बल्कि ब्राण्ड करता है कीमत को नियंत्रित : Yogesh Mishra

अर्थशास्त्र का सामान्य सिधान्त है कि किसी वस्तु की कीमत मांग और पूर्ति के संतुलन से निर्धारित होती है ! किंतु अब देखने में आ रहा है कि बाजार में वस्तु की कीमत का निर्धारण मांग और पूर्ति के संतुलन…

भारतीय शेयर बाजार का सांड विदेशी है : Yogesh Mishra

जब कोई शेयर बाजार निरंतर ऊपर की तरफ बढ़ता है, तो उसे बुल अर्थात सॉड बाजार कहा जाता है और जब किसी देश का कोई शेयर बाजार निरंतर नीचे की ओर गिरता है तो उसे बीअर अर्थात भालू बाजार कहा…

भारतीय अर्थव्यवस्था अब गूगल क्लाउड की गिरफ्त में : Yogesh Mishra

डिजिटल इंडिया बनाने वाले पे.टी.एम. के शेयर डाउन हो गये हैं और दूसरी तरफ अडाणी समूह ने गूगल क्लाउड के साथ मल्टी ईयर की साझेदारी कर भारत में गूगल क्लाउड तकनीकी के सहयोग से डिजिटल इंडिया बनाने की मुहिम को…

भगवान किसी का सहायक नहीं है : Yogesh Mishra

सभी वैष्णव धर्म शास्त्र कहते हैं कि ईश्वर के भरोसे जीवन नैया सकुशल पार हो जाती है लेकिन व्यवहारिकता की कसौटी पर कसने पर ऐसा पता चलता है कि ईश्वर का भरोसा एक अलग विषय है और संसार का लोक…

भगवान का दर्शन बहुत आसान है : Yogesh Mishra

भगवान का दर्शन बहुत आसान है, बस व्यक्ति का चित्त कमजोर होना चाहिये ! इसीलिए वैष्णव भक्त लोग लंबे उपवास करके चित्त को कमजोर बना लेते हैं ! जिससे कि वह शास्त्रों के अनुरूप जो भी कल्पना कर चुके हैं…

ब्रह्मा भी शिव के आधीन कैसे हैं : Yogesh Mishra

चित् वह है जो अपने को सब आवरणों से ढककर भी सदा अनावृत बना रहता है, सब परिवर्तनों के भीतर भी सदा परिवर्तनरहित बना रहता है ! उसमें प्रमाता प्रमेय, वेदक वेद्य का द्वैत भाव नहीं रहता, क्योंकि उसके अतिरिक्त…

बुढ़ापे से मूल्यवान कुछ भी नहीं है : Yogesh Mishra

पश्चिम के विकृत जगत ने पूरी शिद्दत से हमें यह बताने की चेष्टा की है कि बूढ़ा व्यक्ति किसी योग्य नहीं होता है, लेकिन सनातन जीवन शैली में बूढ़े व्यक्ति को परिवार ही नहीं समाज और राष्ट्र का आधार माना…