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पूर्वजों का साहित्यिक ज्ञान अद्भुत था : Yogesh Mishra

पश्चिम के विचारकों के अनुसार वैदिक ग्रंथों को लिपि के उपयोग के बिना ही मौखिक रूप से रचा और प्रसारित किया गया था !  जिसमें शिक्षक से लेकर छात्र तक एक अटूट संचरण रेखा मौजूद थी ! जिसे समाज द्वारा…

पूर्ण साधक के लिये सभी धर्म ग्रंथ व्यर्थ हैं : Yogesh Mishra

धर्म ग्रंथ दो तरह के होते हैं ! एक अनुभूति धर्म ग्रंथ और दूसरा ठगी धर्म ग्रंथ !  अनुभूति धर्म ग्रंथ से तात्पर्य उस धर्म ग्रंथों से है, जिनको हम से अधिक विकसित चेतना के स्तर के व्यक्तियों द्वारा ईश्वर…

पूतना वध का भ्रम : Yogesh Mishra

भगवान श्री कृष्ण की छठी पर विशेष लेख  आज भगवान श्री कृष्ण की छठी है ! वैष्णव पुराणों के अनुसार आज ही के दिन भगवान श्री कृष्ण ने पूतना का वध किया था ! पर प्रश्न यह है कि यह…

पुत्रेष्ठि यज्ञ का अज्ञात रहस्य : Yogesh Mishra

तीन तीन पत्नियों के होने के बाद भी शुक्राणु की निर्बलता के कारण राजवैध द्वारा लंबे समय तक चिकित्सा किये जाने के बाद भी जब 40 वर्ष की आयु बीतने तक राजा दशरथ को कोई उतराधिकारी पुत्र संतान प्राप्त नहीं…

पितृ पक्ष स्थापना का रहस्य : Yogesh Mishra

मनुस्मृति के अध्याय 3 के श्लोक 201 के अनुसार पितृ शब्द की उत्पत्ति पा रक्षणे धातु से है ! जो पालन या रक्षण करे वह पितृ है ! कर्मकाण्डी पंडितों के अनुसार पितृ शब्द का अर्थ एकवचन रूप पिता =…

नृत्य चिकित्सा का विज्ञान : Yogesh Mishra

नृत्य मानव सभ्यता के साथ विकसित हुई अनादि चिकित्सा पद्धति का एक स्वाभाविक स्वरूप है ! अति प्राचीन काल में जब नृत्य विज्ञान विकसित नहीं था ! उस समय भी शैव जीवन शैली के लोग अपनी नकारात्मक ऊर्जा को निकालने…

नाभि स्थल को शरीर का दसवां गुप्त द्वार : Yogesh Mishra

इस सृष्टि में परमात्मा ने मनुष्य को एक अद्भुत प्राकृतिक खजाना दिया है ! जिसे मणिपुर चक्र कहते हैं अर्थात नाभि स्थल ! इस नाभि स्थल की उत्पत्ति से ही गर्भ काल शुरू होता है ! अर्थात इस शरीर रूपी…

ध्यानी होने का भ्रम  : Yogesh Mishra

 उचित ज्ञान के अभाव में प्राय: व्यक्ति अपने संस्कारों की हठधर्मिता को नहीं पहचान पाता है और किसी अयोग्य  गुरु के मार्गदर्शन में फंस कर प्रतिदिन जीवन के डेढ़ 2 घंटे ध्यान के नाम पर बर्बाद करने लगता है !…

ध्यान का जीवन में महत्व : Yogesh Mishra

एक सच्चा ध्यान करने वाला व्यक्ति, तभी ध्यान में स्थित कहा जा सकता है, जब उसका मन कामनाओं और वासनाओं के द्वारा विक्षुब्ध होकर, इधर- उधर न भटक रहा हो ! जब तक किसी व्यक्ति की विषयभोग की इच्छाएँ हैं,…

धूर्त पदाधिकारियों से इंग्लैंड ने अपनी रक्षा कैसे की : Yogesh Mishra

साम्राज्यवाद की दौड़ में भारत को जीत लेने के बाद भारत के मूल चरित्र पर जब इंग्लैंड के समाजवादियों ने चिंतन किया तो यह पाया कि भारत का सामाजिक ढांचा इतना विकृत है कि यहां पर आने के बाद इंग्लैंड…