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जीवन की समस्याओं को मिटाना है तो शैव बनो : Yogesh Mishra

मनुष्य के जीवन में हर तरह की हर समस्या का कारण कृत्रिम जीवन पद्धति है ! जो हमें वैष्णव जीवन शैली से प्राप्त हुई है ! आज साम्राज्यवादी सोच भी इसी कृत्रिम जीवन पद्धति का विकसित रूप है ! कृत्रिम…

जीने की चाहत में मौत : Yogesh Mishra

शरीर के दो हिस्से है एक दिल और दूसरा दिमाग ! इन्हीं दोनों के सामंजस्य से शरीर चलता है ! यदि इनका सामंजस्य बिगाड़ जाये तो पहले तो शरीर बीमार पड़ता है, फिर नष्ट हो जाता है ! अर्थात मनुष्य…

राजा जनक के तीन शाश्वत प्रश्न : Yogesh Mishra

राजा जनक ने ब्राह्मण पुत्र अष्टावक्र से आत्मकल्याण के लिये तीन मौलिक प्रश्न किये !  1. ज्ञान कैसे प्राप्त होता है? 2.  मुक्ति कैसे होगी? और 3.  वैराग्य कैसे प्राप्त होगा? और यह तीनों प्रश्न ही समस्त अध्यात्म का सार…

चोल वंशियों ने बनाया था भारत को सोने की चिड़िया : Yogesh Mishra

300 ईसा पूर्व से 13वीं सदी चोल वंशियों का दक्षिण भारत पर शासन था ! अर्थात 1600 वर्षों तक कावेरी नदी घाटी में इस राजवंश ने शासन किया था और इनकी राजधानी तमिलनाडु स्थित वरायूर (अब तिरुचिरापल्ली) थी ! चोल…

चिंतन विहीन धर्म गुरु की तलाश : Yogesh Mishra

 आज ही नहीं अनादि काल से मनुष्य बहुत अधिक चिंतन के पक्ष में नहीं रहा है ! कुछ महत्वपूर्ण संवेदनशील व्यक्तियों ने जो चिंतन किया, उसी से सनातन धर्म ग्रंथों का निर्माण हुआ है !  मानव समाज सदैव से चिंतन…

ग्रह हमारे साथ कैसे काम करते हैं : Yogesh Mishra

एक वैज्ञानिक विश्लेषण आम ज्योतिषियों की अवधारणा है कि व्यक्ति के जन्म के समय ग्रह, पृथ्वी के किस दिशा से पृथ्वी पर अपना प्रकाश कैसा प्रकाश डालते हैं ! उसी के आधार पर व्यक्ति के जीवन की घटनायें घटती हैं…

गुरु कृपा आवश्यक क्यों है : Yogesh Mishra

गुरु में एक ऐसा आध्यात्मिक चुम्बकीय बल होता है कि गुरु के प्रति सम्पूर्ण समर्पण मात्र से ही व्यक्ति की रक्षा स्वत: होने लगती है ! इसलिए गुरु निवास स्थल को आश्रय की सकारात्मक ऊर्जा के कारण आश्रम कहा जाता…

गरीबी के मकडजाल से कैसे बचें : Yogesh Mishra

 आज के युग में पूरी दुनिया में वस्तु विनिमय का माध्यम अब मात्र धन रह गया है और धन अर्थात मुद्रा का मूल्य नियंत्रित करने का अधिकार मात्र सरकार के पास है !  अर्थात कितने धन से अब कितनी वस्तु…

क्या हनुमान जी की गदा काल्पनिक है : Yogesh Mishra

हनुमान ने अपने पराक्रम से एक लाख किंकर, अकंपान, जंबुमाली, अक्षय, देवांतक, तृषिरा, ध्रुमराक्स, कालनेमि, अहिरावण, महिरावण, सिम्हिका का वध और रावण, इंद्रजीत, लंकिनी को परास्त करने के साथ साथ कुंभकरण को घायल कर दिया था ! पर उन्होंने बाल्मीकि…

क्या सभी के लिये वैष्णव राजाओं की पूजा अनिवार्य है : Yogesh Mishra

 जैसा की मैंने अपने पूर्व के अनेकों लिखो में लिखा है कि भारत अनादि काल से शैव संस्कृति का अनुयायी रहा है !  भारत की उपजाऊ जमीन और प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करने के लिए कृषि प्रधान वैष्णव संस्कृति के…