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स्त्रियाँ जल का प्रतीक क्यों हैं : Yogesh Mishra

भगवान शिव की बहन मां सरस्वती जो कि ब्रह्म संस्कृति की जननी और पालनकर्ता थी ! जिनके प्रतीक रूप में अफगानिस्तान में प्राचीन काल में सरस्वती नदी बहा करती थी अर्थात सरस्वती जल के समान निर्मल थी ! जो विद्या,…

सुपरबग क*रोना से भी ज्यादा खतरनाक होगा : Yogesh Mishra

आधुनिक चिकित्सा जगत की सबसे महत्वपूर्ण और शोध परक पत्रिका “लांसेट” ने अपने शोध के द्वारा विश्व को यह अवगत कराया है कि वर्ष 2023 में एलोपैथिक दवाई की दुनिया में एक बहुत बड़ा भूकंप आने वाला है ! जिसे…

सामाजिक हिंसा का जिम्मेदार कौन : Yogesh Mishra

वासना से भरा पुरुष हमेशा स्त्री को वासना का एक साधन ही समझता है । वह उसे पुज्या नहीं भोग्या ही समझता है । वह हर पल वासना की दृष्टि से उसे देखता है । वह उसे प्रेम की नजर…

सांसारिक दरिद्रता वैष्णव जीवन दर्शन की देन है : Yogesh Mishra

 प्राय: वैष्णव विचारकों के मुख से यह बात सुनने में आती है कि लक्ष्मी और सरस्वती का मेल नहीं है अर्थात जो व्यक्ति संपन्न है वह विद्वान नहीं हो सकता और जो विद्वान है वह संपर्क नहीं हो सकता है…

“सनातन शैव परिवार” का पंजीकरण प्रारम्भ

 सनातन ज्ञान पीठ के संस्थापक श्री योगेश कुमार मिश्र ने गत 2 वर्षों में 300 से अधिक वक्तव्यों में भगवान शिव के अनन्य भक्तों के साधना, शक्ति और सामर्थ पर व्याख्यान दिये हैं ! तथा सनातन ज्ञान पीठ परिवार के…

सनातन शैव ग्राम क्या है : Yogesh Mishra

 मनुष्य को ईश्वर ने इस पृथ्वी पर अपनी स्वाभाविक अवस्था में जीवन निर्वाह के लिए भेजा था ! जिससे मनुष्य प्रकृति के रहस्य को समझते हुए अपना आंतरिक उत्थान कर सके ! लेकिन हम लोगों ने अपने सुविधाओं की तलाश…

सनातन धर्म वितण्डावादियों के हवाले : Yogesh Mishra

सामान्य भाषा में वितण्डावाद का अर्थ निरर्थक दलील, हुज्जत करना या निराधार लड़ाई-झगड़ा करना होता है ! जिसे दूसरे शब्दों में दूसरे की बातों या तर्कों की उपेक्षा करते हुए बस अपनी बात कहते चले जाने की क्रिया को वितण्डावाद…

सनातन धर्म और हिन्दू धर्म में अंतर : Yogesh Mishra

सनातन धर्म मानवता के साथ स्व विकसित, प्रकृति और पर्यावरण अनुगामी धर्म है ! इसे शैव जीवन शैली का धर्म भी कहा जा सकता है ! इसमें उपासना के लिए किसी भी भक्त पर किसी भी प्रकार का कोई कर्मकांड…

संपन्नता के लिए राम के साथ रुपये की भी चिंता करो : Yogesh Mishra

धर्म की उत्पत्ति समाज के मंदबुद्धि वर्ग के मनुष्यों को नियंत्रित करने के लिए की गई थी ! इसीलिए धर्म ने स्वर्ग-नरक, पाप-पुण्य, धर्म-अधर्म, देव-दैत्य, सुर-असुर जैसे सांकेतिक शब्दों का निर्माण किया ! जिन शब्दों के माध्यम से मंदबुद्धि के…

संपन्नता एक कला है, विज्ञान है : Yogesh Mishra

 यह समाज में बहुत बड़ी भ्रांति है कि पढ़े-लिखे लोग ही संपन्न हो सकते हैं ! जबकि व्यवहार में देखा जाता है कि किसी भी संपन्न व्यक्ति के लिये उसकी शिक्षा मात्र उसकी सम्पन्नता में सहायक है ! उसकी संपन्नता…