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आज शैव ग्राम की आवश्यकता क्यों है

मनुष्य प्रकृति से उत्पन्न एक प्राकृतिक जीव है ! प्रकृति ने इस मनुष्य की रक्षा लाखों वर्ष तक की है ! तभी आज हम इस पृथ्वी पर मौजूद हैं ! किंतु बाजारवाद के चलते अब हमने स्वयं को प्रकृति से…

अनुयाई होने का अर्थ : Yogesh Mishra

 किसी भी महापुरुष का अनुयाई होने का अर्थ नकल करना नहीं है ! किंतु यथार्थ में यह देखा जाता है कि जो व्यक्ति जिस महापुरुष के विचारों के अनुगमन का दावा करता है, वह अपनी वेशभूषा और जीवनशैली भी उसी…

अध्यात्म के नाम पर लफंगाई : Yogesh Mishra

 अपना सर्वस्व त्याग कर भारत में विश्व को दिशा देने वाले अनेक महान आध्यात्मिक संत हुए हैं ! पश्चिम जगत में भी बहुत से ऐसे विचारक हुए जिनके विचारों से घबरा पश्चिम जगत के शासकों ने उन्हें या तो क्रूस…

अधूरी रामायण : Yogesh Mishra

भगवान श्री राम के जीवन परिचय पर आज तक पृथ्वी के अलग अलग भूखंडों में 300 से अधिक रामायण विद्वानों द्वारा लिखी गई हैं ! जिससे स्पष्ट है कि भगवान श्री राम सदैव से मानवता के लिए एक आदर्श राजा…

हिन्दू धर्म में दो राजकुमारों की कहानी : Yogesh Mishra

यह हिंदुओं का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि कभी विश्व को  आध्यात्मिक ज्ञान का संदेश देने वाला हिन्दू समाज अब मात्र दो राजकुमारों की आधी अधूरी,  कपोल कल्पित कहानियों में उलझ कर रह गया है ! एक राम और दूसरा…

हिंदुत्व खतरे में है की परिभाषा क्या है : Yogesh Mishra

 यह बहुत गंभीर बात है की किन विषयों से हिंदुत्व खतरे में आ जाता है और कब हिंदुत्व को खतरा खत्म हो जाता है, इसे आज तक न तो किसी धर्म ग्रंथ में परिभाषित किया गया और न ही किसी…

हर व्यक्ति जन्म से शैव ही है : Yogesh Mishra

शैव जीवन शैली का अनुपालन करने वाले व्यक्ति की तीन पहचान होती है ! पहला वह संग्रह नहीं करता है ! दूसरा वह किसी से राग द्वेष नहीं रखता है और तीसरा वह सबको समान समझता है ! यह तीनों…

स्वर साधना से आयु कैसे बढ़ती है : Yogesh Mishra

आपने प्राय: देखा होगा कि संगीत में स्वर साधना करने वाले शास्त्रीय संगीत गायकों की आयु सामान्य व्यक्तियों से अधिक लंबी होती है ! साथ ही स्वर साधना करने वाले संगीतज्ञ अपने हम उम्र अन्य लोगों के मुकाबले अधिक स्वस्थ…

स्वयं से संवाद की कला : Yogesh Mishra

स्वयं से संवाद सनातन जीवन शैली का मूल आधार है ! जो व्यक्ति स्वयं से संवाद करना नहीं जानता वह कभी भी न तो संसार में सफल हो सकता है और न ही मृत्यु के उपरांत मुक्ति को प्राप्त कर…

स्त्रियां कभी युद्ध का कारण नहीं रहीं हैं : Yogesh Mishra

वैष्णव संस्कृति के पुरुष प्रधान समाज में स्त्रियों को सदैव से युद्ध का कारण बतलाया गया है !  फिर चाहे वह राम रावण का युद्ध हो या महाभारत का ! दोनों की वजह अहंकारी पुरुष ने माता सीता और द्रोपती…