प्रजनन से मनुष्य को मुक्ति : Yogesh Mishra

एक्टोलाइफ प्रजनन कम्पनी कृतिम पध्यति से प्रति वर्ष 30,000 मन चाहे बच्चे पैदा कर सकती है ! इस समय कंपनी के पास 75 लैब हैं जिन्हें जल्द ही 200 से अधिक बना लिया जायेगा ! इस पूरे कॉन्सेप्ट की शुरुआत…

एक्टोलाइफ प्रजनन कम्पनी कृतिम पध्यति से प्रति वर्ष 30,000 मन चाहे बच्चे पैदा कर सकती है ! इस समय कंपनी के पास 75 लैब हैं जिन्हें जल्द ही 200 से अधिक बना लिया जायेगा ! इस पूरे कॉन्सेप्ट की शुरुआत…

समाज में कुछ लोग ऐसे होते हैं कि जिनका काम ही दूसरों की आलोचना करना होता है अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाए कि चाहे कोई सामाजिक कार्यकर्ता हो, उद्योगपति हो, धार्मिक व्यक्ति हो, या अपने जीवन निर्वाह के लिए…

हनुमान ने अपने पराक्रम से एक लाख किंकर, अकंपान, जंबुमाली, अक्षय, देवांतक, तृषिरा, ध्रुमराक्स, कालनेमि, अहिरावण, महिरावण, सिम्हिका का वध और रावण, इंद्रजीत, लंकिनी को परास्त करने के साथ साथ कुंभकरण को घायल कर दिया था ! पर उन्होंने बाल्मीकि…

न्याय दर्शन कहते हैं कि वेदों की रचना ईश्वर ने की है ! क्योंकि यह मानवीय नहीं हो सकते हैं ! सांख्य दर्शन कहा कि वेदों की रचना ईश्वर ने भी नहीं की है ! वेद प्राकृतिक हैं ! प्रकृति…

शरीर के दो हिस्से है एक दिल और दूसरा दिमाग ! इन्हीं दोनों के सामंजस्य से शरीर चलता है ! यदि इनका सामंजस्य बिगाड़ जाये तो पहले तो शरीर बीमार पड़ता है, फिर नष्ट हो जाता है ! अर्थात मनुष्य…

यह प्रश्न हमेशा से मुझे कचोटता था कि आखिर देश के बंटवारे के समय कश्मीर से खींची गई रेखा ने जब कश्मीर, पंजाब, राजस्थान को दो हिस्से में बांट दिया तो गुजरात के ऊपर थारपारकर जिला, सिंध, पाकिस्तान से यह…

वैष्णव संस्कृति के पुरुष प्रधान समाज में स्त्रियों को सदैव से युद्ध का कारण बतलाया गया है ! फिर चाहे वह राम रावण का युद्ध हो या महाभारत का ! दोनों की वजह अहंकारी पुरुष ने माता सीता और द्रोपती…

भक्ति काल के दौर में व्यक्ति स्वप्रेरणा से ईश्वर की भक्ति करता था ! इसके लिए सबसे पहले वह अपने आराध्य को समझने की चेष्टा करता था ! जिसके लिए या तो वह शास्त्रों का अध्ययन करता था या फिर…

विश्व के कई देशों ने आज यह सिद्ध कर दिया है कि अब मनुष्य को भगवान की जरूरत नहीं रह गई है ! क्योंकि जिन देशों ने भगवान को नकार दिया है ! वह सभी देश आज पहले से अधिक…

जब किसी भी समाज में धन और सुविधाएं मनुष्य के ज्ञान और विवेक से अधिक हो जाती हैं, तो वह समाज विकृति की ओर बढ़ने लगता है ! भारतीय समाज ने भी यह दौर देखा है ! चोल वंश के…