शैवों को तर्पण की आवश्यकता क्यों नहीं है

सभी समाज में जीने के दो तरीके हैं, एक वैष्णव और दूसरा शैव जीवन शैली ! समाज को एक सुव्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए वैष्णव ने संचय, गृहस्थ और पितृ तर्पण को नितांत आवश्यक कर्म कहा है, क्योंकि यह…

सभी समाज में जीने के दो तरीके हैं, एक वैष्णव और दूसरा शैव जीवन शैली ! समाज को एक सुव्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए वैष्णव ने संचय, गृहस्थ और पितृ तर्पण को नितांत आवश्यक कर्म कहा है, क्योंकि यह…

शैव समाज लोगों के एक ऐसे समूह या समुदाय को कहते हैं, जो एक साथ रहते हैं और अपनी संपत्ति, संसाधनों, आय और जिम्मेदारियों को आपस में साझा करते हैं। इस व्यवस्था में व्यक्तिगत (निजी) संपत्ति की बजाय सामूहिक संपत्ति…

तेज और प्रज्ञा के मिलन से ही वह स्वतंत्र विचार उत्पन्न होता है, जो मनुष्य को भीड़ से निकालकर एक श्रेष्ठ विचारक बनाता है, उसके कुछ विशेष ग्रहीय योग होते हैं । वैदिक ज्योतिष में सूर्य को हमारी आत्मा, प्राण…

एक सामान्य व्यक्ति जब किसी गुरु के बाहरी आभामंडल और आडंबर में फंसकर उनके अनैतिक कृत्यों या अपराधों में सहभागी बन जाता है, तो यह रातों-रात घटने वाली घटना नहीं होती। यह चेतना के पतन और मानसिक दासता की एक…

शैव जीवन दर्शन का पूर्ण स्वरूप :– पहला कदम :– दिखावा छोड़कर अपने सहज समर्थ को स्वीकारिये ! आपको सुकून मिलेगा। दूसरा कदम :– दूसरों को अपनी स्वतंत्रता से जीने दीजिये ! किसी को अपने तरीके से चलाने की जिद्द…

शैव जीवन दर्शन मानता है कि “हर रोग अवचेतन का प्रगट स्वरूप है” ! अर्थात हमारे मन और शरीर के मध्य एक गहरा और अविभाज्य संबंध है। अब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी इस अवधारणा को ‘मनोदैहिक रोग’ के रूप में…

कुलार्णव तंत्र के नौवें उल्लास के आधार पर माता पार्वती भगवान शिव से कहती हैं :– “जीवः शिवः शिवो जीवः स जीवः केवलः शिवः। पाशबद्धः स्मृतो जीवः पाशमुक्तः सदाशिवः॥” आपके द्वारा उद्धृत यह पंक्तियाँ सनातन धर्म के ‘अद्वैत वेदांत’ और…

अभी बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर जी ने राजनीतिक कारणों से रामचरितमानस पर कुछ टिप्पणी कर दी और उसका परिणाम यह हुआ कि पूरे भारत का वैष्णव समाज शिक्षा मंत्री के टिप्पणी का विरोध करने लगा ! अब प्रश्न या…

अमेरिका की निवासी महिला केर्लिन फोर्ट जो कि एक व्यवसायिक फोटोग्राफर हों ! उनको माया सभ्यता के नागरिकों से वर्ष 2001 में एक 15 किलो का क्रिस्टल कपाल मिला है ! उस महिला ने इस क्रिस्टल कपाल का नाम आइंस्टाइन…

वैष्णव जीवन शैली में धर्म के नाम पर लूट की अलग-अलग दुकान चलाने के लिए दर्जनों देवी देवताओं का निर्माण वैष्णव धर्माचार्यों ने किया है ! और अलग-अलग देवी-देवताओं को अलग-अलग मानवीय इच्छाओं की पूर्ति करने का पर्याय बना दिया…