क्या भारत गृह युद्ध की तरफ बढ़ रहा है

जब किसी भी लोक तंत्र में न्यायपालिका, जांच एजेंसियां, शिक्षा बोर्ड और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का स्वतंत्र, निष्पक्ष जब ईमानदार नहीं रह जाती हैं तब देश न चाहते हुये भी धीरे धीरे गृह युद्ध की तरफ बढ़ जाता है…

जब किसी भी लोक तंत्र में न्यायपालिका, जांच एजेंसियां, शिक्षा बोर्ड और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का स्वतंत्र, निष्पक्ष जब ईमानदार नहीं रह जाती हैं तब देश न चाहते हुये भी धीरे धीरे गृह युद्ध की तरफ बढ़ जाता है…

ध्रुव राठी के भारत आगमन से संघ और बीजेपी डरी हुई है ! यह वही संघ और बीजेपी है, जिसने हिन्दू ही नहीं अपने पूर्ण समर्पित कार्यकर्ताओं को भी धोखा दिया है ! उसी का परिणाम है कि पूरे भारत…

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, भौतिक शरीर (पिण्ड) और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का अत्यंत गहरा संबंध है। जब किसी कुण्डली में उच्च चेतना और असाधारण खगोलीय ऊर्जा का निर्माण होता है, तो आधुनिक रासायनिक औषधियां (एलोपैथी) शरीर पर सकारात्मक प्रभाव नहीं डाल…

मेरा विचार आध्यात्मिक चेतना का सर्वोच्च और सबसे विशुद्ध शिखर है, जहां मार्गदर्शक का उद्देश्य अपने पीछे अनुयायियों की भीड़ खड़ी करना नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को ‘स्व में स्थिर’ करके उसे स्वयं का आलोक बनने के लिये प्रेरित करना…

शैव ग्राम मानवता की नई दिशा और प्राकृतिक ईश्वरीय ऊर्जा के साथ जीवन की कला का प्रत्यक्ष प्रगटीकरण है ! हाल ही में आयोजित एक विशेष बैठक में ‘शैव ग्राम’ नामक एक अत्यंत प्रभावशाली और महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की…

शैव ग्राम केवल 10 एकड़ का भूखंड या आवासीय प्रकल्प नहीं है; यह पिण्ड (मानव देह) और ब्रह्मांडीय लय के पूर्ण एकाकार का एक जीवंत ‘पारिस्थिकीय तीर्थ’ है। आधुनिक समाज कृत्रिम जीवनशैली, वैचारिक विषाक्तता और स्नायविक ताप से जल रहा…

आपने भी ने अपने जीवन में यह अनुभव किया होगा कि जब हम कोई ऐसा काम करते हैं जिसमें हमारी कोई रुचि नहीं होती, तो हमें बार-बार भूख लगती है, थकान हावी होने लगती है और मन किसी न किसी…

उच्च चेतना के महापुरुषों के लिए प्राकृतिक चिकित्सा केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि उनके भौतिक शरीर (पिण्ड) को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रचंड प्रवाह के बीच जीवित और संतुलित रखने का एकमात्र विशुद्ध वैज्ञानिक व्यवस्था है। जब चेतना पूरी तरह से…

प्राय: लोग जीवन की चुनौतियों, पारिवारिक कलह या असफलताओं से भागने के लिए ‘धर्म’ या ‘वैराग्य’ का चोला ओढ़ लेते हैं। इसे पलायनवाद कहा जाता है, आध्यात्मिकता नहीं। गृहस्थ आश्रम को सभी आश्रमों में सबसे श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि…

संसार के प्रशिक्षण स्थल में हम सब केवल सहयोगी हैं इस अनंत ब्रह्मांड में परम सत्य केवल एक ही है, और उस सत्य का बोध कराने वाले आदिगुरु केवल शिव हैं। जब हम चेतना के सर्वोच्च शिखर की बात करते…