yogeshmishralaw

yogeshmishralaw

आपदा में उदय की ग्रह व्यवस्था

जिस प्रकार सघन अंधकार ही भोर के प्रथम प्रकाश को जन्म देता है, उसी प्रकार मनुष्य की विपदाएं और उसकी कमजोरियां ही उसके वास्तविक उदय का मार्ग प्रशस्त करती हैं। वैदिक ज्योतिष में जन्म कुण्डली के छठे, आठवें और बारहवें…

आपके जीवन का दिशा-सूचक ग्रह

शरीर और चेतना का प्रथम मिलन बिंदु है लग्न, और लग्नेश का बल ही मनुष्य को आपदा से निकालकर उसके वास्तविक उदय का मार्ग प्रशस्त करता है। वैदिक ज्योतिष में ‘लग्न’ का अर्थ है मनुष्य का अपना शरीर, उसका स्वभाव,…

आध्यात्मिक संस्थान चलाने का तरीके

स्वयंसेवकों को आकर्षित करने और युवाओं को स्थायी रूप से एक वैचारिक आंदोलन से जोड़ने के लिए यह व्यावहारिक रणनीतियाँ सबसे अधिक कारगर सिद्ध होती हैं ! आज का युवा और विदेशी नागरिक कृत्रिम मार्केटिंग के बजाय प्रामाणिकता की ओर…

आत्मविश्वास जगाने में ग्रहों की भूमिका

आत्म-विश्वास किसी बाज़ार में बिकने वाली कृत्रिम वस्तु नहीं है, बल्कि यह सूर्य के सत्य और मंगल के पुरुषार्थ से जाग्रत होने वाली वह प्रखर अग्नि है जो मनुष्य को जीवन के हर समर में अजेय बनाती है। वैदिक ज्योतिष…

आत्मज्ञान से क्यों बचना चाहिए ।

सामान्यतः आध्यात्मिक जगत में ‘आत्मज्ञान’ को जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य और मोक्ष का द्वार माना जाता है। हर साधक इसी की प्राप्ति के लिए जप, तप और ध्यान करता है। लेकिन एक अत्यंत गूढ़ और व्यावहारिक दृष्टिकोण यह भी है…

भविष्य का जीवन असंभव के उस पार ही है

“असंभव” मानसिक जड़ता है, जो हमारे संकीर्ण सोच की अभिव्यक्ति मात्र है, जो हमारे अज्ञात भय और सीमित सोच से निर्मित होता है। इसे चिंतन पाथ को बदल कर बदला जा सकता है। भविष्य का जीवन सदैव असंभव के उस…

अब मनुष्य को धर्म ग्रंथों की कपोल कल्पित दुनिया से निकलना होगा

जैसे-जैसे विज्ञान और ब्रह्मांड को लेकर मनुष्य की समझ गहरी हो रही है, समाज में यह बहस तेज हो गई है कि हमें प्राचीन मान्यताओं को किस रूप में देखना चाहिए। मानव जाति के सामने आज जलवायु परिवर्तन, बीमारियां और…

अपने ही जीवन काल में मत मरो

मनुष्य केवल श्वास लेने और भौतिक सुख-सुविधाएं भोगने के लिये पैदा नहीं हुआ है। जो व्यक्ति केवल अपने वर्तमान और व्यक्तिगत स्वार्थ तक सिमट कर रह जाता है, उसका वैचारिक और आध्यात्मिक अस्तित्व उसके जीवित रहते ही समाप्त हो जाता…

अधिवक्ता को देवतों का सेनापति क्यों कहते हैं

यह पूरी दुनियां जब आपका शोषण कर रही होती है, आपको डरा रही होती है, उस समय आपका कोई साथ नहीं दे रहा होता है, तब अधिवक्ता ही है जो आपके अधिकारों की रक्षा के लिये अपना मान स्वाभिमान जीवन…

अदम्य साहस और प्रज्ञा का चरम उत्कर्षीय ग्रह योग

जिस मनुष्य के भीतर उद्यम का अदम्य साहस और विचार की निर्मलता एक साथ जन्म लेते हैं, वही अपने पुरुषार्थ से समाज का सच्चा उदय करता है। वैदिक ज्योतिष में मंगल को ऊर्जा, साहस, भूमि और पराक्रम का कारक माना…