मैं किडनी पेशेन्ट मात्र एक मन्त्र से ठीक हो गया
मैं हाल निवासी इन्दौर मध्यप्रदेश का रहने वाला हूँ और मैं भारत की 3 शीर्ष बड़ी आई.टी. कंपनी में कार्य कर चुका हूँ ! वर्तमान समय में भी एक प्रतिष्ठित आई.टी. कंपनी में ही कार्य कर रहा हूँ ! मुझे…
मैं हाल निवासी इन्दौर मध्यप्रदेश का रहने वाला हूँ और मैं भारत की 3 शीर्ष बड़ी आई.टी. कंपनी में कार्य कर चुका हूँ ! वर्तमान समय में भी एक प्रतिष्ठित आई.टी. कंपनी में ही कार्य कर रहा हूँ ! मुझे…

वाराही तंत्र ग्रंथों में मारण तंत्र एक विशिष्ठ तंत्र प्रक्रिया है ! जिसका प्रयोग विश्व की सभी संस्कृतियों में अपने अपने तरह से सदियों से होता आ रहा है ! मारण तंत्र क्रिया की सिद्धि के सात चरण हैं !…

सरल शब्दों में समझा जाये तो किसी भी रोग के लिए एक प्रयोगात्मक समय होता है ! इस दौरान रोग के कारण को ढूंढा जाता है ! फिर उस रोग के निदान के लिए विभिन्न तरह के शोध कार्य किये…

प्रायः माना जाता है कि जन्म कुंडली में यदि मंगल ग्रह 1,2,4,7,8 और 12 भाव में विद्यमान हों, तो जातक की जन्मकुंडली में मांगलिक दोष का निर्माण होता है ! जिस कारण जातक का दांपत्य जीवन में भी बिखराव उत्पन्न…

महाशिवरात्रि शैव का एक प्रमुख त्यौहार है । इसी दिन भगवान शिव ने जीव को प्रशिक्षित करने के लिये सृष्टि की शुरुआत की थी इसी लिये इसे शैवों के नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है ! यह भगवान…

अब्बासी यहूदियों का एक विद्रोही समूह था। जिन्होंने अपने को मुस्लिम घोषित किया और मध्य पूर्व एशिया में एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया जिसे आज भी “खिलाफत साम्राज्य” के नाम से जाना जाता है। मुस्लिम शब्द अरबी भाषा का शब्द…

भीष्म पंचक अनुष्ठान को कालांतर में वैष्णव के प्रभाव में विष्णु पंचक अनुष्ठान के नाम से भी जाना जाने लगा है। जो लोग कार्तिक मास के व्रत करने में असमर्थ हैं, वह कार्तिक के अंतिम 5 दिनों के दौरान यह…

जब आप भगवान शिव का कार्य करते हैं, तो आप जिस किसी भी कार्य को कर रहे होते हैं, उसमें भगवान शिव आपके सहायक हो जाते हैं ! जैसेआप कोई विद्यालय चलते हैं और आपको यह निरंतर चिंता बनी रहती…

हमारे पूर्वजों ने कभी भी भगवान पर भरोसा नहीं किया और अपने पुरुषार्थ से देश को सोने की चिड़िया बना दिया ! तब देश के सोने की चिड़िया बनने के बाद यूनानी षडयंत्रकारियों ने भारत को कमजोर करने के लिये…

सनातन ग्रंथों में भी धर्म के दस लक्षण बताए गए हैं: ब्रह्मचर्य, सत्य, तप, दान, संयम, क्षमा, शौच, अहिंसा, शांति, अस्तेय. इसमें भक्ति कहीं नहीं आती है ! भक्ति के नौ रूप हैं श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवा, अर्चना, वंदना, दास्य,…