शैवों के अनुसार भाग्य परिवर्तन का सिद्धांत

वैष्णव जीवन शैली में यह अवधारणा है कि यदि कोई व्यक्ति अपने भाग्य के दुखद क्षणों को बदलना चाहता है, तो उसे भगवान की भक्ति करनी चाहिए ! क्योंकि भगवान ही किसी व्यक्ति के भाग्य को बदल सकते हैं !…

वैष्णव जीवन शैली में यह अवधारणा है कि यदि कोई व्यक्ति अपने भाग्य के दुखद क्षणों को बदलना चाहता है, तो उसे भगवान की भक्ति करनी चाहिए ! क्योंकि भगवान ही किसी व्यक्ति के भाग्य को बदल सकते हैं !…

पूरे विश्व में एक मात्र शैव जीवन शैली ही है, जो संपूर्ण विश्व में मानवता की रक्षा कर सकती है, अन्यथा अन्य जीवन शैलियां तो मनुष्य का सर्वनाश कर ही रही हैं ! दूसरे शब्दों में मात्र शैव जीवन शैली…

शैव साधक की दिनचर्या वैष्णव साधकों से एकदम अलग होती है ! वैष्णव दूसरों मनुष्यों के बनाये नियम से जीते हैं जबकि शैव साधक प्रकृति का अनुकरण करते हैं ! शैवों के अनुसार यह पिण्ड शरीर ईश्वर का दिया वरदान…

मात्र शैव ही जीवन चक्र के समस्त वर्तुल को समझ सकता है । क्योंकि उसके इष्ट शिव ही सृष्टि चक्र के सृजन, पालन और संहार चक्र को नियंत्रित करते हैं। शिव ही ज्ञान और योग के अनादि स्रोत हैं ।…
इस विषय को एक उदाहरण से समझाता हूँ ! एक व्यक्ति के पास उसे अति प्राचीन एक पांडुलिपि मिली ! उस व्यक्ति ने जब उस पांडुलिपि का गहराई से अध्ययन किया तो उसे पता चला कि उसमें सोना बनाने का…

भगवान, देवता, दैत्य, दानव, असुर, राक्षस, भूत, प्रेत, पिशाच, जिन्न, यक्ष, किन्नर आदि सभी पिण्ड धारी या अपिण्डीय सभी ऊर्जा रूप में शिव का ही अंश हैं ! सब एक ही हैं जो अपने जन्म जन्मान्तर की वृत्ति और प्रवृत्ति…

इस संसार में जिसका भी जन्म होता है, उसे शनि की साढ़ेसाती और ढ़ैया के प्रभाव से गुजरना ही पड़ता है अब प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या शनि केवल कष्ट देते हैं ! ऐसा नहीं है ! शनि कभी…

एक भावुक गुरुजी थे । उनके बहुत सारे शिष्य थे । करोना काल में जब लॉकडाउन लगा, तब सब कुछ बंद हो गया ! लोग घरों में बैठकर उबने लगे और धीरे-धीरे समाज अवसाद की तरफ बढ़ने लगा । तब…

भगवान शिव की अदालत लग चुकी है ! जिसके कोतवाल भैरव जी महाराज हैं ! पेशकर शनि देव हैं ! जिनकी नजर से कोई नहीं बच सकता है और कलयुग के देवता, भ्रम और तकनीकी के प्रतिनिधि राहु जी महाराज…

डिप्रेशन का मूल कारण मोटिवेशनल पूंजीवादियों का वह खतरनाक मनोवैज्ञानिक हथियार है, जिसे पश्चिमी जगत ने अपने उपनिवेशवाद और पूंजीवाद के लिये ईजाद किया गया ! जो आज पूरी मानवता के लिए मनोवैज्ञानिक खतरा बन चुका है ! मानवता के…