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RO का नहीं अभिमंत्रित जल पीजिए

भारतीय संस्कृति में जल को केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन, ऊर्जा और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। प्राचीन काल से ही पूजा-पाठ में ‘आचमन’ और ‘अभिमंत्रित जल’ (मंत्रों से सिद्ध किया हुआ पानी) का उपयोग होता…

आपकी उत्सुकता ही आपका बंधन है

मानव मस्तिष्क इस तरह से विकसित हुआ है कि जब भी कोई नई जानकारी, नया रहस्य या अनिश्चितता सामने आती है, तो हमारे भीतर डोपामीन नामक हार्मोन का स्राव होता है। यह हार्मोन हमें संतुष्टि ही नहीं देता, बल्कि और…

भक्ति अब व्यर्थ का विषय है

विश्व के बदलते बौद्धिक परिवर्तन के अनुसार अब भक्ति की कोई आवश्यकता नहीं है, इस सत्य को विश्व में लगभग सभी धर्मों ने तार्किक दृष्टि से स्वीकार कर लिया है, इसीलिये अब योरोप जहाँ से ईसाइयत पुर दुनियां में फैली…

अंतिम विकल्प शिवत्व की साधना है

मानवता का अंतिम विकल्प शिवत्व की साधना है शिवत्व साधना का अर्थ कृतिम सांसारिक बंधनों और अहंकार से मुक्त होकर स्व का आत्म-साक्षात्कार करना है। यह महज पूजा-पाठ कर्मकाण्ड नहीं, बल्कि स्वयं के रूपांतरण और भीतर दिव्यता के अवतरण की…

हिंदुत्व के सर्वनाश का कारण

समाज को प्रबुद्ध गुरुओं से आत्म कल्याण हेतु ज्ञान नहीं बौद्धिक मनोरंजन चाहिये, इसके लिये सबसे अधिक दोषी तथाकथित लालची, आडम्बरी धर्म गुरु हैं, जो पहने तो भगवा कपड़े हैं लेकिन धूर्तता, मक्कारी, लोभ, ईर्ष्या, उनके रग रग में बसी…

हम दरिद्र क्यों हो जाते हैं !

प्राय: लोग पूंछते हैं कि हम दरिद्र क्यों हैं ? उत्तर है ईश्वरीय निवेश न करने के कारण लोग दरिद्र होते हैं, अर्थात जब हम धनवान होते हैं, तो कार्य की प्राथमिकता और धन के अहंकार में जीव जंतु, पशु…

सुपर अल नीनो का समाधान मात्र शैवों के पास है

कृपया मुर्ख इस लेख को न पढ़ें ! सुपर अल नीनो अति प्राचीन काल से मानवीय षड्यंत्र का हिस्सा है ! जिसे कृषि आधारित विकासशील देशों को नष्ट करने के लिए हथियार के तौर पर प्रयोग किया जाता रहा है…

शैवों को किसी कल्कि अवतार की जरुरत नहीं है

जब समाज में जब शासक कमज़ोर और अयोग्य होते हैं, तो जनता के विद्रोह को शांत करने के लिए वैष्णव धर्म गुरु ‘भविष्य के मसीहा’ या ‘अवतारवाद का सहारा’ लेते हैं। जो कि पूर्ण सुनी सुनाई कपोल कल्पित कल्पना है…

शैवों की जीव अघोर क्रिया साधना क्या है

भगवान शिव के उपासक जीव अघोर क्रिया साधना द्वारा दूसरे के ओरे में प्रवेश करके उसके रोग को अपने ओरे में खींच लेते हैं और उन रोगों को अपने जीवनी ऊर्जा के ताप से जला देते हैं। यह मृत संजीवनी…

शैवों का मोक्ष क्या है

यदि आप तनिक रुक कर अपनी दिनचर्या को अपने अस्तित्व से जोड़कर देखिये, तो आप पायेंगे कि आपका “मस्तिष्क” सामाजिक डेटा और अल्गोरिदम से प्रायोजित है ! धर्म, व्यवस्था और आस्था के नाम पर आपके रचनाकारों ने आपको अपने उद्देश्य…