ज्योतिष सीखने से पहले मानव मस्तिष्क जानिये : Yogesh Mishra

संपूर्ण ब्रह्मांड में जो भी है वह द्रव्य एवं ऊर्जा का संगम है ! समस्त दृश्य एवं अदृश्य इन्ही दोनो के संयोग से घटित होता है ! हम और हमारा मस्तिष्क इसके अपवाद नहीं हैं ! सृष्टि के मूलभूत कणों…

संपूर्ण ब्रह्मांड में जो भी है वह द्रव्य एवं ऊर्जा का संगम है ! समस्त दृश्य एवं अदृश्य इन्ही दोनो के संयोग से घटित होता है ! हम और हमारा मस्तिष्क इसके अपवाद नहीं हैं ! सृष्टि के मूलभूत कणों…

ईसाई धर्मान्तरण कैसे करते हैं ! ईसाई समाज की धूर्त खोपड़ी ने एक बड़ा सुनियोजित धीमा जहर घोला ! उन्होंने इतिहास में जितने भी कार्य हिन्दू समाज द्वारा जातिवाद को मिटाने के लिए किये गये ! उन सभी को छिपा…

आजकल दलितों के समर्थन में बहुत से एन.जी.ओ. मुस्लिम और ईसाई देशों से धन लाकर ब्राह्मणों के विरोध में काल्पनिक साहित्य का निर्माण कर रहे हैं ! ब्राह्मणों के विरोध में बहुत सी ऐसी ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन किया ला…

“दलित” और “शूद्र” में वही अंतर है जो स्वर्ण और पीतल में होता है ! आधुनिक और सामान्य अर्थ में, लोकविधान के अनुसार, सनातन धर्म के चार वर्णों में से चौथा वर्ण शूद्र कहलाता है ! इनका कार्य उद्योग करना…

कर्मों के परिणाम को भोगने का मुख्य आधार शरीर ही है ! शरीर को पोषण विभिन्न तरह के विटामिन और मिनिरल खनिज आदि से मिलता है ! जब व्यक्ति के शरीर में साधना, उपासना, व्रत आदि करने के कारण खनिज…

ध्यान यानी मेडिटेशन के सकारात्मक प्रभावों को अब वैज्ञानिक भी मानने लगे हैं ! ट्यूबिंगन मेडिकल कॉलेज के मनोविज्ञानियों ने दावा किया है कि ध्यान करने से कुछ दिनों के भीतर ही मस्तिष्क में जबरदस्त बदलाव आने लगता है !…

अब विकसित विज्ञान भी मानता है कि भूत-प्रेत की आकृति में अदृश्य एथरिक और एस्ट्रल ऊर्जा भारतीय संस्कृति के अनुसार प्रेत योनि के समकक्ष एक विशेष योनि है ! जो एक प्रकार से प्रेत योनि ही है, लेकिन प्रेत योनि…

याजिद अपने नापाक साजिश को अंजाम देने ही वाला था कि भारत की तरफ से घोड़े पर सवार होकर जनेऊ धारे माथे पर तिलक लगाये ‘हुसैनी ब्राह्मण’ कर्बला की तरफ बढ़ रहे थे ! यह भारत के यह सभी मोहम्मद…

रोहिंग्या मुसलमानों को आसरा देने की बात हो रही थी तो एक मौलाना ने फतवा जारी किया कि उन्हें अगर कोई भारत से बाहर निकलता है तो भारत का इतिहास उलट देंगे क्योकि वह मेरे भी है ! क्या हुआ…

गांधी मात्र राजनीति का विषय नहीं है ! विकास के नाम पर देश की सत्यानाश हुई अर्थव्यवस्था को देखते हुये हमें विकास की हमारी अवधारणा पर पुनर्विचार करना होगा ! विकास किसका ? विकास किसके लिए ? जैसे प्रश्न हमें…