मंगल दोष से भयभीत मत होईये !! Yogesh Mishra

अनेक प्रकार के शुभ-अशुभ ज्योतिषीय योग गणना में बताये जाते हैं ! जिनमें मंगल दोष को लेकर समाज में भय व्याप्त है ! इस भय के कारण प्राय: बहुत अच्छे-अच्छे संबंधों को छोड़ देना पड़ता है ! इस विषय मे…

अनेक प्रकार के शुभ-अशुभ ज्योतिषीय योग गणना में बताये जाते हैं ! जिनमें मंगल दोष को लेकर समाज में भय व्याप्त है ! इस भय के कारण प्राय: बहुत अच्छे-अच्छे संबंधों को छोड़ देना पड़ता है ! इस विषय मे…

पुराणों में देवासुर संग्राम और वैष्णवों का द्वन्द्व है ! सत्ययुग में हिरण्यकश्यपु और प्रहलाद की कथा, त्रेता में रावण और राम की कथा शैव और वैष्णवों के पारस्परिक संघर्ष की सूचक है ! किन्तु पुराणों के अनुसार शिव कैलाश…

ज्योतिष शास्त्र में बारह राशियों के आधार पर जन्मकुंडली के बारह भावों की रचना की गई है जिन्हें द्वाद्वश भाव कहते हैं ! आकाश मण्डल में बारह राशियों की तरह कुंडली में बारह भाव (द्वादश भाव) होते हैं ! जन्म…

वैदिक ज्ञान के वैज्ञानिक सम्बन्ध का एक उदाहरण ऋग्वेद के आठवें मण्डल के उपरोक्त मन्त्रा में मिलता है जिसका अर्थ है पर्वतों के समीप एवम् झरनों तथा नदियों के संगम के पास का प्राकृतिक वातारण मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में…

हम लोगों ने दुनिया को योग का सूत्र दिया है, ध्यान का सूत्र दिया है ! ध्यान करने का मतलब है अपनी शक्ति से परिचित होना, अपनी क्षमता से परिचित होना, अपना सृजनात्मक निर्माण करना, अहिंसा की शक्ति को प्रतिष्ठापित…

रत्नों पर कोई चर्चा करने के पहले “मैं” यह बतला देना चाहता हूं कि रत्नों को धारण करने का कोई भी विधान हमारे ऋषियों-मुनियों ने किसी भी “सनातन ज्योतिष ग्रंथ” में नहीं दिया है ! यह पद्धति “यूनान” से भारत…

प्रायः यह माना जाता है कि शिक्षा सभी समस्याओं का समाधान है ! किन्तु व्यवहारिक जगत में ऐसा नहीं है ! शिक्षा का एक मात्र उद्देश्य जो व्यावहारिक जगत में नजर आता है, वह यह है कि व्यक्ति को स्वतंत्र…

आधुनिक शिक्षा व्यवस्था भारत के सर्वनाश के लिये अंग्रेजों द्वारा निर्मित की गई थी ! जिसे हम आज भी ढोह रहे हैं ! आइये जानते हैं इसका वास्तविक इतिहास व भविष्य ! भारत में आधुनिक शिक्षा की नींव यूरोपीय ईसाई…

झूठ बोलने वाले शासक से मौन शासक फिर भी अच्छा है, कम से कम वह जनता को गुमराह तो नहीं करता ! लोकतंत्र से राजतंत्र फिर भी अच्छा था ! राजाओ के शासन काल में भारत के लोग ज्यादा सुखी…

आम भौतिक चमक-दमक से दूर भारत के किसी कोने में एक गांव था ! वह गांव इतना छोटा था कि उसने मात्र 5 परिवार रहते थे ! गांव का मुखिया “ठाकुर साहब” बहुत ही कर्मठ, ईमानदार, न्याय प्रिय और गांव…