धर्म से बड़ा धोख कोई नहीं है

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में तथाकथित ‘धर्म’ प्रायः रूढ़ियों, कर्मकांडों और विवेकहीन अंधे अनुकरण का पर्याय बन गया है। जहाँ तर्क और विश्लेषण समाप्त हो गया है, अब बस सिर्फ अंधविश्वास और भय बचा है। इसी सैद्धांतिक यथार्थ को गहराई से समझते…









