ईश्वर को जानने की शर्त

अक्सर इंसान सोचता है कि जीवन को समझने का मतलब सिर्फ खुद को, अपने करियर को, अपने परिवार को या इंसानी समाज को समझ लेना है। लेकिन शिव इस भ्रम को तोड़ते हैं। वह कहते हैं कि जब तक हमारी…

अक्सर इंसान सोचता है कि जीवन को समझने का मतलब सिर्फ खुद को, अपने करियर को, अपने परिवार को या इंसानी समाज को समझ लेना है। लेकिन शिव इस भ्रम को तोड़ते हैं। वह कहते हैं कि जब तक हमारी…

अंतर्यात्रा का परम सूत्र: गुरुदेव योगेश कुमार मिश्रा के दर्शन का निचोड़ गुरुदेव योगेश कुमार मिश्रा के विचार मनुष्य को भ्रम और धार्मिक मनोरंजन से मुक्त करके आत्म-केंद्रित इन्द्रियगत संकीर्णता से परे ब्रह्मांडीय चेतना और आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाते…

भारतीय संस्कृति में जल को केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन, ऊर्जा और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। प्राचीन काल से ही पूजा-पाठ में ‘आचमन’ और ‘अभिमंत्रित जल’ (मंत्रों से सिद्ध किया हुआ पानी) का उपयोग होता…

मानव मस्तिष्क इस तरह से विकसित हुआ है कि जब भी कोई नई जानकारी, नया रहस्य या अनिश्चितता सामने आती है, तो हमारे भीतर डोपामीन नामक हार्मोन का स्राव होता है। यह हार्मोन हमें संतुष्टि ही नहीं देता, बल्कि और…

विश्व के बदलते बौद्धिक परिवर्तन के अनुसार अब भक्ति की कोई आवश्यकता नहीं है, इस सत्य को विश्व में लगभग सभी धर्मों ने तार्किक दृष्टि से स्वीकार कर लिया है, इसीलिये अब योरोप जहाँ से ईसाइयत पुर दुनियां में फैली…

मानवता का अंतिम विकल्प शिवत्व की साधना है शिवत्व साधना का अर्थ कृतिम सांसारिक बंधनों और अहंकार से मुक्त होकर स्व का आत्म-साक्षात्कार करना है। यह महज पूजा-पाठ कर्मकाण्ड नहीं, बल्कि स्वयं के रूपांतरण और भीतर दिव्यता के अवतरण की…

समाज को प्रबुद्ध गुरुओं से आत्म कल्याण हेतु ज्ञान नहीं बौद्धिक मनोरंजन चाहिये, इसके लिये सबसे अधिक दोषी तथाकथित लालची, आडम्बरी धर्म गुरु हैं, जो पहने तो भगवा कपड़े हैं लेकिन धूर्तता, मक्कारी, लोभ, ईर्ष्या, उनके रग रग में बसी…

प्राय: लोग पूंछते हैं कि हम दरिद्र क्यों हैं ? उत्तर है ईश्वरीय निवेश न करने के कारण लोग दरिद्र होते हैं, अर्थात जब हम धनवान होते हैं, तो कार्य की प्राथमिकता और धन के अहंकार में जीव जंतु, पशु…

कृपया मुर्ख इस लेख को न पढ़ें ! सुपर अल नीनो अति प्राचीन काल से मानवीय षड्यंत्र का हिस्सा है ! जिसे कृषि आधारित विकासशील देशों को नष्ट करने के लिए हथियार के तौर पर प्रयोग किया जाता रहा है…

जब समाज में जब शासक कमज़ोर और अयोग्य होते हैं, तो जनता के विद्रोह को शांत करने के लिए वैष्णव धर्म गुरु ‘भविष्य के मसीहा’ या ‘अवतारवाद का सहारा’ लेते हैं। जो कि पूर्ण सुनी सुनाई कपोल कल्पित कल्पना है…