yogeshmishralaw

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मुझे कथावाचकों से बचाओ

आज जन्माष्टमी है, आज रात्रि भगवान श्रीकृष्ण का पूजन आदि करके प्रसाद लेकर मैं विश्राम कर ही रहा था कि मुझे स्वप्न में लगा जैसे भगवान श्रीकृष्ण मेरे स्वप्न में आये हैं, वह बहुत दुखी हैं और कह रहे हैं…

मुक्ति की कामना से बड़ी मुर्खता कोई नहीं है

केवल अपने दुखों और संघर्षों से घबराकर आत्म सुधार की जगह जन्म-मरण से मुक्ति की चाह रखना एक प्रकार का मानसिक पलायन ही है। ईश्वर का आदर्श और अवतार का मर्म समझे बिना इस तरह की कामना करना मानसिक रोग…

मुक्ति की अवधारण मानसिक रोगियों की सोच है

मध्यकाल से लेकर आधुनिक युग तक, धर्म गुरुओं और सांप्रदायिक व्याख्याकारों ने मोक्ष की जो स्वार्थी और पलायनवादी धारणा गढ़ी, उसने संपूर्ण समाज की ऊर्जा को कुंठित कर दिया। जब मुक्ति को संसार से भागकर जंगलों या आश्रमों में छिपने…

मानसिक शांति के लिये ग्रह योग

मानसिक उलझनें बाह्य परिस्थितियों का नहीं, अपितु मनुष्य के अपनी जड़ों और प्रकृति से अलगाव का परिणाम हैं, मिट्टी की ओर लौटना ही मन की सबसे बड़ी चिकित्सा है। वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन और संवेदनाओं का, तथा बुध…

महापुरुष प्रायः बीमार क्यों रहते हैं

शोध पत्र हमारे ब्रह्माण्ड में पृथ्वी अत्यन्त साधारण जीव के लिये निर्मित प्रशिक्षण स्थल है ! यहाँ पर जब उच्च चेतना स्तर के महापुरुष जीव के कल्याण के लिये जन्म ले लेते हैं, तो उन्हें ऊर्जीय अभ्यास अपनी उसी उच्च…

मन की असीम शांति और स्थिरता के योग

विचलित मन जीवन का सबसे बड़ा शत्रु है, और ज्ञान से प्रकाशित स्थिर मन असीम आनंद का द्वार है। संसार में मनुष्य की सबसे बड़ी खोज भौतिक संपदा नहीं, बल्कि मानसिक शांति है। वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को हमारे मन,…

भारत के आगामी 7 वर्ष

आगामी 90 दिन भारत की नियति में एक ऐसे प्रसव काल की तरह हैं, जिसके गर्भ में एक अत्यंत शक्तिशाली ‘नए भारत’ का बीज बोया जा चुका है। लेकिन किसी भी नए युग का जन्म भयंकर पीड़ा और पुरानी व्यवस्थाओं…

भारत की दरिद्रता का अदृश्य कारण ‘शोर’ भी है

जब हम भारत में गरीबी या दरिद्रता के कारणों की चर्चा करते हैं, तो अक्सर हमारा ध्यान भ्रष्टाचार, जनसंख्या, या शिक्षा की कमी जैसे पारंपरिक कारणों पर जाता है। लेकिन एक बहुत बड़ा, और अक्सर अनदेखा किया जाने वाला कारण…

भारत का धर्म व्यवसाय ही भारत के विकास में बाधा है

जब समाज को केवल चमत्कारों, पौराणिक कथाओं और कर्मकांडों में उलझा कर रखा जाता है, तो वहां वैज्ञानिक सोच और सवाल पूछने की प्रवृत्ति का विकास धीमा हो जाता है। किसी भी आधुनिक राष्ट्र के विकास के लिए विज्ञान, तकनीक…

भविष्य पीढ़ी का धर्म “परम मुक्ति” होगा

भविष्य में विज्ञान और तर्क, पारंपरिक अर्थों वाले ‘धर्म’ के सहयात्री नहीं होंगे, बल्कि वे एक परिष्कृत और अनुभवजन्य आध्यात्मिकता के सहयात्री बनेंगे। जब धर्म से कर्मकांड, पौराणिक कथाएं और अंधविश्वास छंट जाएंगे, तो जो शेष बचेगा वह मानव चेतना,…