देवता अपने साम्राज्य रक्षा के लिये बेटी भी दांव पर लगाते थे

आज की चर्चा से वैष्णव थोड़ा नाराज हो जाएंगे, लेकिन यह हमारा धार्मिक सत्य है, देवताओं ने अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए अपने घर की बेटियों को भी दांव पर लगाया है ! जिसका एक उदाहरण आज मैं…

आज की चर्चा से वैष्णव थोड़ा नाराज हो जाएंगे, लेकिन यह हमारा धार्मिक सत्य है, देवताओं ने अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए अपने घर की बेटियों को भी दांव पर लगाया है ! जिसका एक उदाहरण आज मैं…

शोध – 3 यह गुफा हिमालय के एक अत्यंत निर्जन गुप्त स्थान पर है, जहाँ एक दिव्य सन्त रहते हैं, भगवान शिव की कृपा से मुझे उनके दर्शन करने और आशीर्वाद लेने का अवसर मिला ! उनकी मेरे बारे कही…

आज के आध्यात्मिक समाज में वैष्णव द्वारा लम्बे समय से एक बहुत बड़ा षड्यंत्र चल रहा है कि वास्तविक भक्त की पहचान ही गरीबी है ! यह है “गरीबी का निरर्थक महिमामंडन”। हमें बचपन से सिखाया जाता है कि…

ईश्वर की प्रार्थना अक्सर एकांत, मौन और शांति से जुड़ी गहन प्रक्रिया है। लेकिन जब हम किसी अत्यंत अभावग्रस्त या दरिद्र व्यक्ति को ईश्वर की प्रार्थना करते देखते हैं तो उसे प्राय: चीख-चीख कर या रोते हुए भगवान को पुकारते…

यही तुम्हारे जीवन में असफलता का कारण है ! मनुष्य वास्तविक अर्थों में शारीरिक श्रम से नहीं थकता, बल्कि निराशा, दिशाहीनता और असफलता के बोध से टूट जाता है। हमारे जीवन के अधिकांश कष्टों का मूल कारण शारीरिक ऊर्जा की…

एक डॉलर पर इल्यूमिनिटी का निशान, खूनी लाल चन्द्र ग्रहण, उसके बाद कहीं न कहीं युद्ध और युद्ध में डालर की कीमत बढ़ना इन सब का आपस में क्या सम्बन्ध है ? एक डॉलर के नोट पर ‘इलुमिनाटी’ का निशान…

दुनियां में झूठ न होता, तो मैं मर जाता !! झूठ जीवन की बहुत बड़ी जरुरत है, उम्मीद झूठ के गर्भ से पनपती है ! जो व्यक्ति को जीने की उम्मीद देती है ! कल सब ठीक हो जायेगा, यह…

यह कथन एक शाश्वत सत्य है कि आधुनिक विश्वविद्यालयों से हमें केवल ‘सूचना’, डिग्रियां और आजीविका कमाने का कौशल मिलता है। लेकिन वास्तविक ‘ज्ञान’, आत्मबोध और ब्रह्मांड के गूढ़ रहस्यों की समझ जो एकांत, मौन और गहन चिंतन से ही…

जैन ब्रह्मांड विज्ञान के अनुसार, यह लोक (ब्रह्मांड) छह शाश्वत द्रव्यों से मिलकर बना है: जीव (चेतना), पुद्गल (पदार्थ), धर्म (गति का माध्यम), अधर्म (विश्राम का माध्यम), आकाश (स्थान) और काल (समय)। जैन दर्शन का स्पष्ट नियम है कि किसी…

लोग अक्सर जिसे “जीवन का संघर्ष” कहकर अपनी निराशा व्यक्त करते हैं, वह वास्तव में समाज द्वारा निर्धारित ढांचे और उसमें जीने की स्वाभाविक शर्तें हैं। जीवन है तो धोखे और धक्के तो लगे ही रहेंगे ! इसे सामाजिक दृष्टिकोण…