सुकून की कीमत

सुकून हमेशा ही सस्ता होता है, लेकिन हमारे दिखावे की आदत उसे महंगा बना देती है ! अर्थात मानसिक शांति को किसी तामझाम की जरूरत नहीं होती है। वह बहुत छोटी और सहज चीजों में मिल जाती है ! जैसे…
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सुकून हमेशा ही सस्ता होता है, लेकिन हमारे दिखावे की आदत उसे महंगा बना देती है ! अर्थात मानसिक शांति को किसी तामझाम की जरूरत नहीं होती है। वह बहुत छोटी और सहज चीजों में मिल जाती है ! जैसे…

आज मानवता कंक्रीट की दीवारों और कृत्रिम जीवन की घुटन में सिसक रही है। तनाव, अवसाद और बाज़ारवाद की अंधी दौड़ ने मनुष्य को मानसिक और शारीरिक रूप से खोखला कर दिया है। प्रकृति लहूलुहान है, बेज़ुबान जीव उजड़ रहे…

आज कल बहुत से ध्यान गुरु मौन को बहुत अधिक महत्व देते हैं लेकिन मेरा यह मानना है कि जब तक वैचारिक कुंठायें समाप्त न हो तब तक मौन व्यर्थ का विषय है । जब मन के भीतर वैचारिक कुंठाएं,…

अक्सर कई योग गुरुओं द्वारा संचालित इन मौन शिविरों में व्यक्ति को तार्किक अभिव्यक्ति से पूरी तरह रोक दिया जाता है। जिससे प्राकृतिक शंकाओं और विचारों को बाहर आने का रास्ता नहीं मिलता, तो वह दबी हुई ऊर्जा कुंठा और…

सफलता की राह पर चलते हुए अक्सर हमारा सामना ऐसे लोगों से होता है जो अपनी मीठी बातों या झूठे दावों से हमारे करीब आ जाते हैं। इन्हें ‘भ्रमित करने वाले साथी’ कहा जा सकता है। ऐसे व्यक्तियों की पहचान…

लक्ष्य प्राप्ति की यात्रा में सैकड़ों असफलता के पड़ाओ आते ही हैं । जो उन्हें पार कर जाता है, वहीं लक्ष्य तक पहुंच पाता है । जब हम कोई बड़ा और दूरदर्शी विजन लेकर चलते हैं, जब समाज के विकास…

साधारण सफलताएं तय रास्तों पर चलने से मिल जाती हैं, लेकिन बड़ी सफलता के लिए उस सीमा को पार करना पड़ता है, जिसे आम समाज असंभव मानता है। जब हम असंभव दिखने वाली चुनौतियों को पार करते हैं, हमारी वास्तविक…

शक्तिपात महाविज्ञान सनातन परंपरा का एक अत्यंत रहस्यमयी और प्रभावशाली अंग है। सरल शब्दों में, शक्तिपात का अर्थ है—”गुरु द्वारा शिष्य के भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा (कुंडलिनी शक्ति) का संचार करना।” यह साधना मार्ग का एक ऐसा शॉर्टकट है जहाँ साधक…

सहज परिस्थितियों में तो हर कोई बेहतर काम कर लेता है, लेकिन विपरीत परिस्थितियां ही ‘नेचुरल लीडर्स’ या असाधारण व्यक्तित्व का जन्म होता है। जब मुश्किलें सामने आती हैं, तभी इंसान में निखार आता है ! व्यक्ति के भीतर का…

कुलार्णव तंत्र के नौवें उल्लास के आधार पर माता पार्वती भगवान शिव से कहती हैं :– “जीवः शिवः शिवो जीवः स जीवः केवलः शिवः। पाशबद्धः स्मृतो जीवः पाशमुक्तः सदाशिवः॥” आपके द्वारा उद्धृत यह पंक्तियाँ सनातन धर्म के ‘अद्वैत वेदांत’ और…