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चातुर्मास में वैष्णव के पलायनवाद का कारण : Yogesh Mishra

आषाढ़ मास शुक्ल एकादशी से कार्तिक मास शुक्ल एकादशी तक का समय लौकिक चातुर्मास का होता है ! इसका वर्णन तरह तरह से वैष्णव धर्म ग्रंथों में खूब किया जाता है और बतलाया जाता है कि इस समय भगवान विष्णु…

घोषित तानाशाह और छद्म तानाशाह

किसी भी लोकतान्त्रिक देश के शासन व्यवस्था में तीन संवैधानिक और एक अघोषित अर्थात चार स्वतन्त्र अंग होते हैं ! पहला विधायिका – यह अंग देश की जनता द्वारा चुने गये जनप्रतिनिधियों द्वारा सामूहिक रूप से देश के संचालन के…

घृणा का व्यवसायी कौन : Yogesh Mishra

इस महाआपदा के काल में हजारों लोग, जिनमें पत्रकार, बुद्धिजीवी, एक्टिविस्ट, राजनेता, साधु-संत, मौलवी, उलेमा, पादरी, किसान, मजदूर, शिक्षक, नौकरशाह आदि सभी शामिल हैं ! अनेक प्रकार से संक्रमित मरीज, उनके परिवार तथा उनसे प्रभावित होने वाले लोगों की जो…

योग्य गुरु को योग्य शिष्यों की आवश्यकता क्यों होती है : Yogesh Mishra

गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा ! गुरु साक्षात परब्रह्मा, तस्मै श्री गुरुवे नमः !! अर्थात गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शिव हैं ! गुरु ही साक्षात परब्रह्म हैं, ऐसे गुरु को…

गालियों का सत्ता से सम्बन्ध : Yogesh Mishra

किसी को गालियां देने पर मिलने वाले सुख नाम अंग्रेजी भाषा में  “LALOCHEZIA” होता है ! इस सुख की प्राप्ति से व्यक्ति की भड़ास निकल जाती है और बड़ी-बड़ी सामाजिक हिंसायें रुक जाती हैं ! यह लोकतंत्र  में शांति बनाये…

क्रिश्चियन योगा के निशाने पर भारत : Yogesh Mishra

इन दिनों पूरी दुनियां “क्रिश्चियन योगा” प्रोपगंडा के तहत भारत का सनातन योग विज्ञान निशाने पर है और योग की दुकान चलने वाले भारत के तथाकथित योग गुरु टी.वी. पर अपना आक्सीजन लेबिल चेक कर रहे हैं ! जबकि योग…

क्या हमारे पूर्वज भी परमाणु हथियारों से लड़ते थे : Yogesh Mishra

भारत में जगह-जगह विकिरण की जांच करने वाले वैज्ञानिकों ने पाया कि जोधपुर से दस मील पश्चिम में तीन वर्ग मील क्षेत्र में रेडियोधर्मी राख की एक परत है ! जो पूर्व में वहां हुए किसी परमाणु हथियार की ओर…

क्या हमारा मस्तिष्क वैचारिक कूड़ा घर है : Yogesh Mishra

पूरी दुनिया का उपभोक्तावादी बाजार अब मानव मस्तिष्क को वैचारिक कूड़ा घर समझने लगा है ! इस मानवीय वैचारिक कूड़ा घर में सकारात्मक विचारों के स्थान पर घनघोर निम्न, छिछले, ओछे विचारों का आधुनिक विज्ञान की मदद से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस…

क्या हमारा धर्म ही हमें नष्ट कर रहा है : Yogesh Mishra

महाभारत के सिद्धांतों पर आधारित मनुस्मृति की वह उक्ति जो कि आठवें अध्याय के पन्द्रहवें श्लोक में वर्णित है ! ‘धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः ! तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत् !’ इस वाक्यांश का अर्थ…

क्या हम नर पिशाचों के साथ जीते हैं : Yogesh Mishra

 विषय बड़ा अजीब सा है ! लेकिन अब हमें चिंतन करना होगा कि क्या “वसुधैव कुटुम्बकम्” या “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की संस्कृति वाले देश में अब नर पिशाचों ने कब्जा कर लिया है ! जैसा कि करोना काल में स्पष्ट…