क्या योग वशिष्ठ शैव ग्रंथ है : Yogesh Mishra

वशिष्ठ ऋषि वैदिक काल के विख्यात थे ! इनके ज्ञान के कारण इन्हें सप्तर्षि में भी शामिल किया गया था ! यानि ऐसा माना जाता है कि इन्हें वेदों की रचना करने वाले ईश्वर द्वारा सत्य का ज्ञान प्राप्त हुआ…

वशिष्ठ ऋषि वैदिक काल के विख्यात थे ! इनके ज्ञान के कारण इन्हें सप्तर्षि में भी शामिल किया गया था ! यानि ऐसा माना जाता है कि इन्हें वेदों की रचना करने वाले ईश्वर द्वारा सत्य का ज्ञान प्राप्त हुआ…

वैष्णव कथा वाचक एक तरफ तो कहते हैं कि यदि व्यक्ति धर्म ग्रंथ वेद, पुराण, उपनिषद, वेदांत आदि का अध्ययन करता है, तो वह सभी तरह के विकारों से मुक्त हो जाता है ! और दूसरी तरफ यहीं कथावाचक कहते…

सनातन धर्म मानवता के साथ स्व विकसित, प्रकृति और पर्यावरण अनुगामी धर्म है ! इसे शैव जीवन शैली का धर्म भी कहा जा सकता है ! इसमें उपासना के लिए किसी भी भक्त पर किसी भी प्रकार का कोई कर्मकांड…

महर्षि वाल्मीकि का मूल नाम रत्नाकर था और इनके पिता ब्रह्माजी के मानस पुत्र प्रचेता थे ! ब्रह्मर्षि भृगु के वंश में उत्पन्न ब्राह्मण थे ! जिसकी पुष्टि स्वयं वाल्मीकि रामायण और महाभारत नामक ग्रन्थ से होती है ! ‘“संनिबद्धं…

यह त्रेता युग के उस समय की घटना है, जब वैष्णव आक्रांताओं द्वारा छल और बल से शैवों को इस पृथ्वी पर पूरी तरह से नष्ट करके वैष्णव साम्राज्य स्थापित करने का षड्यंत्र अपने चरम पर था ! वैष्णव आक्रांताओं…

वैष्णव मत दर्शन के अनुसार मनुष्य को 14 इंद्रियां प्राप्त हैं ! पांच ज्ञानेंद्रियां आंख, कान, नाक, जीभ और त्वचा; पांच कर्मेंद्रियां हाथ, पैर, मुंह, गुदा और लिंग और चार अंतःकरण मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार ! मन, बुद्धि, चित्त…

प्राय: वैष्णव विचारकों के मुख से यह बात सुनने में आती है कि लक्ष्मी और सरस्वती का मेल नहीं है अर्थात जो व्यक्ति संपन्न है वह विद्वान नहीं हो सकता और जो विद्वान है वह संपर्क नहीं हो सकता है…

जिस तरह प्रत्येक मनुष्य के बुद्धि का अपना एक स्तर होता है ! ठीक उसी तरह समाज की सामूहिक बुद्धि का भी अपना एक स्तर होता है ! इन दोनों ही तरह के बुद्धियों को विकसित करने का एक क्रम…

वाल्मीकि रामायण में सीता स्वयंवर का कोई वर्णन नहीं है ! महर्षि वाल्मीकि के अनुसार रावण की नानी केतुमती जिसे तुलसीदास ने ताड़का कहा, उसकी अकारण विश्वामित्र के उकसाने पर राम द्वारा हत्या कर दी गयी थी ! उस समय…

शैव साधना पद्धति के सात चरण हैं ! जो पूरी तरह से वैष्णव साधना पद्धति से भिन्न हैं ! शैव साधना में सबसे ज्यादा कार्य स्वयं अपने आप पर करना होता है, जबकि वैष्णव साधना पद्धति में सबसे अधिक कार्य…