अति ज्ञान की लालसा क्यों व्यर्थ है

सैद्धांतिक तौर पर, ‘बुद्धिमत्ता यह जानने में है कि किन चीज़ों को नज़रअंदाज़ करना है।’ जीवन में सफलता के लिए चयनात्मक दृष्टिकोण बहुत आवश्यक है, जिससे “ज्ञान” आपकी प्रगति का एक उपयोगी उपकरण बने, न कि ऐसा भारी बोझ बन…
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सैद्धांतिक तौर पर, ‘बुद्धिमत्ता यह जानने में है कि किन चीज़ों को नज़रअंदाज़ करना है।’ जीवन में सफलता के लिए चयनात्मक दृष्टिकोण बहुत आवश्यक है, जिससे “ज्ञान” आपकी प्रगति का एक उपयोगी उपकरण बने, न कि ऐसा भारी बोझ बन…

आज 04 अक्टूबर 2026 है, मेदिनी ज्योतिष के अनुसार, किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी स्थापना कुंडली, प्रमुख ग्रहों के गोचर और ग्रहणों के प्रभाव से गहराई से जुड़ा होता है। स्वतंत्र भारत की कुंडली वृषभ लग्न और कर्क राशि…

भारत की कुंडली (वृषभ लग्न) में कन्या राशि पांचवें भाव में आती है, जो शेयर बाजार, नीतियां और जनता की सोच का प्रतिनिधित्व करता है। 10 अक्टूबर 2026 को अश्विन कृष्ण अमावस्या है और चंद्रमा और सूर्य दोनों ही कन्या…

सुकून हमेशा ही सस्ता होता है, लेकिन हमारे दिखावे की आदत उसे महंगा बना देती है ! अर्थात मानसिक शांति को किसी तामझाम की जरूरत नहीं होती है। वह बहुत छोटी और सहज चीजों में मिल जाती है ! जैसे…

आज मानवता कंक्रीट की दीवारों और कृत्रिम जीवन की घुटन में सिसक रही है। तनाव, अवसाद और बाज़ारवाद की अंधी दौड़ ने मनुष्य को मानसिक और शारीरिक रूप से खोखला कर दिया है। प्रकृति लहूलुहान है, बेज़ुबान जीव उजड़ रहे…

आज कल बहुत से ध्यान गुरु मौन को बहुत अधिक महत्व देते हैं लेकिन मेरा यह मानना है कि जब तक वैचारिक कुंठायें समाप्त न हो तब तक मौन व्यर्थ का विषय है । जब मन के भीतर वैचारिक कुंठाएं,…

अक्सर कई योग गुरुओं द्वारा संचालित इन मौन शिविरों में व्यक्ति को तार्किक अभिव्यक्ति से पूरी तरह रोक दिया जाता है। जिससे प्राकृतिक शंकाओं और विचारों को बाहर आने का रास्ता नहीं मिलता, तो वह दबी हुई ऊर्जा कुंठा और…

सफलता की राह पर चलते हुए अक्सर हमारा सामना ऐसे लोगों से होता है जो अपनी मीठी बातों या झूठे दावों से हमारे करीब आ जाते हैं। इन्हें ‘भ्रमित करने वाले साथी’ कहा जा सकता है। ऐसे व्यक्तियों की पहचान…

लक्ष्य प्राप्ति की यात्रा में सैकड़ों असफलता के पड़ाओ आते ही हैं । जो उन्हें पार कर जाता है, वहीं लक्ष्य तक पहुंच पाता है । जब हम कोई बड़ा और दूरदर्शी विजन लेकर चलते हैं, जब समाज के विकास…

साधारण सफलताएं तय रास्तों पर चलने से मिल जाती हैं, लेकिन बड़ी सफलता के लिए उस सीमा को पार करना पड़ता है, जिसे आम समाज असंभव मानता है। जब हम असंभव दिखने वाली चुनौतियों को पार करते हैं, हमारी वास्तविक…