सामाजिक हिंसा का जिम्मेदार कौन : Yogesh Mishra

वासना से भरा पुरुष हमेशा स्त्री को वासना का एक साधन ही समझता है । वह उसे पुज्या नहीं भोग्या ही समझता है । वह हर पल वासना की दृष्टि से उसे देखता है । वह उसे प्रेम की नजर…
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वासना से भरा पुरुष हमेशा स्त्री को वासना का एक साधन ही समझता है । वह उसे पुज्या नहीं भोग्या ही समझता है । वह हर पल वासना की दृष्टि से उसे देखता है । वह उसे प्रेम की नजर…

प्राय: वैष्णव विचारकों के मुख से यह बात सुनने में आती है कि लक्ष्मी और सरस्वती का मेल नहीं है अर्थात जो व्यक्ति संपन्न है वह विद्वान नहीं हो सकता और जो विद्वान है वह संपर्क नहीं हो सकता है…

सनातन ज्ञान पीठ के संस्थापक श्री योगेश कुमार मिश्र ने गत 2 वर्षों में 300 से अधिक वक्तव्यों में भगवान शिव के अनन्य भक्तों के साधना, शक्ति और सामर्थ पर व्याख्यान दिये हैं ! तथा सनातन ज्ञान पीठ परिवार के…

मनुष्य को ईश्वर ने इस पृथ्वी पर अपनी स्वाभाविक अवस्था में जीवन निर्वाह के लिए भेजा था ! जिससे मनुष्य प्रकृति के रहस्य को समझते हुए अपना आंतरिक उत्थान कर सके ! लेकिन हम लोगों ने अपने सुविधाओं की तलाश…

सामान्य भाषा में वितण्डावाद का अर्थ निरर्थक दलील, हुज्जत करना या निराधार लड़ाई-झगड़ा करना होता है ! जिसे दूसरे शब्दों में दूसरे की बातों या तर्कों की उपेक्षा करते हुए बस अपनी बात कहते चले जाने की क्रिया को वितण्डावाद…

सनातन धर्म मानवता के साथ स्व विकसित, प्रकृति और पर्यावरण अनुगामी धर्म है ! इसे शैव जीवन शैली का धर्म भी कहा जा सकता है ! इसमें उपासना के लिए किसी भी भक्त पर किसी भी प्रकार का कोई कर्मकांड…

धर्म की उत्पत्ति समाज के मंदबुद्धि वर्ग के मनुष्यों को नियंत्रित करने के लिए की गई थी ! इसीलिए धर्म ने स्वर्ग-नरक, पाप-पुण्य, धर्म-अधर्म, देव-दैत्य, सुर-असुर जैसे सांकेतिक शब्दों का निर्माण किया ! जिन शब्दों के माध्यम से मंदबुद्धि के…

यह समाज में बहुत बड़ी भ्रांति है कि पढ़े-लिखे लोग ही संपन्न हो सकते हैं ! जबकि व्यवहार में देखा जाता है कि किसी भी संपन्न व्यक्ति के लिये उसकी शिक्षा मात्र उसकी सम्पन्नता में सहायक है ! उसकी संपन्नता…

प्रायः लोग सही समय पर सही निर्णय न लेने के कारण अपने आप को एक तनावपूर्ण जीवन में ढकेल लेते हैं और फिर उस तनाव से निकलने के लिए जीवन भर अतिरिक्त ऊर्जा लगाते रहते हैं ! जिसे वह लोग…

श्री एस. एस. उपाध्याय, पूर्व न्यायाधीश एवं पूर्व विधिक परामर्शदाता, मा० राज्यपाल, उत्तर प्रदेश, लखनऊ ने अपना मत प्रगट किया है कि ब्राह्मणों का एक वर्ग 21वीं शताब्दी में भी यह मानने को तैयार नहीं है कि भारत की लोकतांत्रिक…