जीव की तुरीय अवस्था ही उसे ब्रह्म बनाती है : Yogesh Mishra

“अहम् ब्रह्मास्मि” का उद्घोष साधक की यह उद्घोषणा है कि उसने अपने मन को साधते-साधते अब मन के स्तर पर तुरीय की अवस्था को प्राप्त कर लिया है ! अर्थात वह जीव जिसने कभी कामना और वासना के प्रभाव में…








