राष्ट्रीय फूल नहीं हो सकता किसी राजनीतिक दल का चुनाव चिह्न Yogesh Mishra

खुले आम हो रहा है राष्ट्रीय प्रतीक अधिनियम 1950 का उलंघन !

राष्ट्रीय प्रतीक अधिनियम 1950 के अंतर्गत विधि के अनुसार भारत में 16 राष्ट्रीय प्रतीकों को मान्यता दी गई है ! जो कि निम्न हैं :-

1 राष्‍ट्रीय ध्‍वज
2 राष्ट्रभाषा
3 राष्‍ट्रीय पक्षी
4 राष्‍ट्रीय पुष्‍प
5 राष्‍ट्रीय पेड़
6 राष्‍ट्र–गान
7 राष्‍ट्रीय नदी
8 राष्ट्रीय चिन्ह
9 राष्‍ट्रीय जलीय जीव
10 राजकीय प्रतीक
11 राष्‍ट्रीय पंचांग
12 राष्‍ट्रीय पशु
13 राष्‍ट्रीय गीत
14 राष्‍ट्रीय फल
15 राष्‍ट्रीय खेल
16 राष्‍ट्रीय मुद्रा चिन्ह

यहाँ हम चर्चा करते हैं “राष्ट्रीय पुष्प” अर्थात “राष्ट्रीय फूल” की ! भारत का राष्ट्रीय फूल “कमल” (नेलंबो न्यूसिपेरा गार्टन) है ! यह एक पवित्र पुष्प है तथा प्राचीन भारतीय कला और पुराणों में इसका एक महत्त्वपूर्ण स्थान है ! कमल का फूल देवी लक्ष्मी का भी प्रतीक है ! जिससे इसका एक अलग आध्यात्मिक व सांस्कृतिक महत्व है ! प्राचीनकाल से ही इसे भारतीय संस्कृति का शुभ प्रतीक माना जाता रहा है !

जिसे चुनाव आयोग ने भारतीय जनता पार्टी के चुनाव चिन्ह के रूप आरक्षित कर रखा है ! जिसका प्रयोग भाजपा पिछले 33 वर्षों से कर रही है ! जो कि राष्ट्रीय प्रतीक अधिनियम 1950 का स्पष्ट उलंघन है ! इस हेतु मुंबई हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर यह दावा किया गया है कि “कमल” राष्ट्रीय प्रतीक अधिनियम 1950 के अनुसार एक “राष्ट्रीय फूल” है ! कोई राजनीतिक दल अपने चुनाव चिन्ह के रुप में इसका इस्तेमाल नहीं कर सकता है !

जैसे किसी भी राष्ट्रीय प्रतीक जैसे राष्‍ट्रीय ध्‍वज(तिरंगा), राष्ट्रीय चिन्ह (अशोक की लाट), राष्‍ट्रीय मुद्रा (‘र’), राष्‍ट्र–गान (जन गण मन) आदि को कोई भी व्यक्ति या संस्था निजी प्रयोग में नहीं ला सकता है ! ठीक उसी तरह “राष्ट्रीय पुष्प” कमल को भी कोई भी व्यक्ति या संस्था निजी पहचान के लिये राष्ट्रीय प्रतीक अधिनियम 1950 के अंतर्गत प्रयोग में नहीं ला सकता है ! यही विधि कि व्यवस्था है !

ठीक इसी तरह राष्ट्रीय फूल एवं भा. ज. प. चुनाव चिन्ह कमल के साथ भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के फोटो का प्रयोग भी गलत है ! इस हेतु लखनऊ हाईकोर्ट में एक याचिका प्रताप चन्द्रा ने दाखिल की है ! जिसमें कहा गया है कि सितंबर, 2016 में रिलायंस जियो ने अपने विज्ञापन के जरिये जियो 4जी सेवा को मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना डिजिटल इंडिया के तौर पर प्रचारित किया था ! 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा के बाद पेटीएम ने अपने विज्ञापन में इस कदम को ई-वॉलेट्स का इस्तेमाल बढ़ाने में मददगार बताते हुए स्वागत किया था ! उसके द्वारा छपवाए गए विज्ञापनों में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर थी ! जो कि गलत बतलाया गया है !

अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !

योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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