Samvidhan Parivartan

भारत की न्याय व्यवस्था भारतीय समाज के अनुरूप नहीं है !! Yogesh Mishra

हमारा न्याय और उनका न्याय दो विपरीत अवधारणा है ! जो किसी भी रूप में राष्ट्र के अनुकूल नहीं है !! न्याय बड़ा खूबसूरत शब्द है ! साथ में सम्मानित भी ! परंपरा में वह शब्दों का ‘अभिजन’ है ! इसीलिए जो व्यक्ति ईमानदार और न्यायकर्ता है, जिसके पास न्याय …

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संविधान में परिवर्तन क्यों जरुरी है ? Yogesh Mishra

झूठ बोलने वाले शासक से मौन शासक फिर भी अच्छा है, कम से कम वह जनता को गुमराह तो नहीं करता ! लोकतंत्र से राजतंत्र फिर भी अच्छा था ! राजाओ के शासन काल में भारत के लोग ज्यादा सुखी थे, वो राजा राज्य की प्रजा को अपनी संतान के …

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भारतीय संविधान के अनुसार भारत के 98% राजनीतिज्ञ चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं रखते हैं ! Yogesh Mishra

भारत के संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार भारत के नागरिक के मतदाता होने की कुछ निर्धारित शर्तें हैं ! जैसे कि मतदाता को 18 वर्ष से अधिक आयु का होना चाहिये ! उसे भारत का नागरिक होना चाहिये साथ ही वह पागल, अपराधी, भ्रष्ट या अवैध आचरण करने वाला …

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क्या भारत में मनोरोगी (पागल) भी सदन का सदस्य हो सकता है ? Yogesh Mishra

भारतीय चुनाव आयोग भारत में दो तरह के चुनाव नियंत्रित करती है ! पहला लोकसभा और दूसरा राज्यों की विधानसभा के चुनाव ! इन चुनावों को लड़ने के लिए चुनाव प्रत्याशियों का भारत का नागरिक होना आवश्यक है ! इसके साथ ही वह व्यक्ति जो चुनाव प्रत्याशी के रूप में …

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क्या आप जानते है ? प्रधानमंत्री का चुनाव रैलियों में जाना संविधान विरुद्ध है !! Yogesh Mishra

“हमारे खर्चे पर ही हमको हरवाने के लिये आते हैं प्रधानमंत्री” – एक जन प्रतिनिधि चुनाव प्रत्याशी की व्यथा कथा जैसा कि भारतीय संविधान की व्यवस्था है कि भारत का प्रधानमंत्री भारत की कार्यपालिका का प्रमुख होने के नाते भारतीय संविधान के अनुसूची 3 के अनुसार यह शपथ लेता है …

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लोकतंत्र का हत्यारा है “व्हिप” का काला कानून | Yogesh

यह देश की पुनः गुलामी का कारण बनेगा !! राजीव गांधी ने 1985 में इसा काला कानून बनाया कि हमारे लोकतंत्र का प्रत्याशी हमेशा-हमेशा के लिए पोलिटिकल पार्टियों की गुलामी करने के लिये मजबूर हो गया ! सन 1600 में ब्रिटेन से एक कंपनी निकली थी ! जिसने भारत को …

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चुनावी घोषणापत्र पर हो जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिये !! Yogesh Mishra

हमारे देश में, चुनावी घोषणापत्रों को सचमुच कोई नहीं पढ़ता है ! घोषणापत्र मतदाताओं को बमुश्किल ही प्रभावित कर पाते हैं या राजनीतिक दलों के लिए वोट जुटा पाते हैं ! इसके बजाय यह कहना उचित होगा कि यह एक राजनैतिक बौद्धिक या वैचारिक कसरत से अधिक कुछ नहीं है …

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जानिये कैसे प्रधानमंत्री द्वारा विशेष राजनैतिक दल के चुनाव प्रत्याशियों के लिये वोट मांगना संविधान विरुद्ध है !Yogesh Mishra

भारतीय संविधान में यह व्यवस्था है कि जब भी कोई व्यक्ति भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेता है, तो उसे भारतीय संविधान के अनुसूची 3 के अंतर्गत निम्नलिखित शपथ लेनी पड़ती है ! संघ के मंत्री के लिए पद की शपथ का प्ररूप ‘मैं, अमुक, ईश्वर की शपथ …

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जानिये किस प्रकार हमारा संविधान मंदिरों की धार्मिक व्यवस्था पर हमला करता है | Yogesh Mishra

वैसे तो ब्राह्मणों को सभी शूद्र गली देते हैं लेकिन यदि मौका मिले तो ब्राह्मण बनने में शूद्र पीछे नहीं हैं ! राजनैतिक दलों ने अपने राजनैतिक लाभ के लिये तिरुमला तिरुपति बोर्ड ने 447 दलितों को मंदिर का ब्राह्मण पुजारी बना कर वामपंथियों के मुंह पर करारा थप्पड़ मरने …

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26 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है गणतंत्र दिवस | Yogesh Mishra

भारत में 26 जनवरी खास महत्व रखता है। इसी दिन भारत का संविधान लागू हुआ था यानि देश में कानून के राज की शुरुआत हुई। 26 जनवरी को राष्ट्रीय पर्व का दर्जा प्राप्त है। हर साल इस दिन को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। भारत अपने गणतंत्र दिवस के …

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