गुरु में एक ऐसा आध्यात्मिक चुम्बकीय बल होता है कि गुरु के प्रति सम्पूर्ण समर्पण मात्र से ही व्यक्ति की रक्षा स्वत: होने लगती है ! इसलिए गुरु निवास स्थल को आश्रय की सकारात्मक ऊर्जा के कारण आश्रम कहा जाता है ! जहाँ की सकारात्मक आध्यात्मिक ऊर्जा से व्यक्ति स्वत: सुरक्षित हो जाता है !
इसलिये वर्ष में कम से कम एक बार गुरु आश्रय स्थल पर अवश्य जाना चाहिये क्योंकि संसार में गुरु की आध्यात्मिक ऊर्जा ही आपकी रक्षक है, जो आप व आपके परिवार की रक्षा कर सकती है !
और कभी भी गुरु के यहाँ खाली हाथ नहीं जाना चाहिये, क्योंकि खाली हाथ जाने वाला व्यक्ति खाली हाथ ही लौटता है ! यही ईश्वर की व्यवस्था है !
गुरु के निकट जाने से उसका आध्यात्मिक ओर स्वत: ही आपके ओरे की नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है और आपको आपके विकास की ओर उन्नत कर देता है !
हमसे जाने अनजाने न जाने कितने गलत काम हो जाते हैं ! जिससे व्यक्ति ही नहीं जीव जन्तु, पेड़ पौधा, मनुष्य आदि बहुतों का दिल दुखी हो जाता है !
इन्हीं दुखी दिलों की बद्दुआओं के कारण हमारा जीवन नकारात्मक प्रभाव के आधीन हो जाता है ! जिससे बचने के लिये समय-समय पर तीर्थ यात्रा या गुरु आश्रय स्थल पर निवास करके इसकी नकारात्मकता को अवश्य दूर करते रहना चाहिए !
नहीं तो यही नकारात्मक ऊर्जा संगृहीत होकर आपके प्रारब्ध की सकारात्मक ऊर्जा को जन्म जन्मान्तरण के लिये नष्ट कर देता है ! जिससे आप के विकास में हजारों तरह की अज्ञानत बाधाएं खड़ी होती हैं ! जिनका निदान हम समझ भी नहीं पाते हैं और हम जीवन भर परेशान होते रहते हैं !
इसीलिये नित्य ईश्वर भक्ति की तरह समय समय पर तीर्थ यात्रा और गुरु कृपा का आशीर्वाद अवश्य लेते रहना चाहिये ! यह आध्यात्मिक व्यवस्था सभी धर्मों में मान्यता प्राप्त है !!