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बुद्धिजीवियों की दुर्गति क्यों होती है : Yogesh Mishra

 भगवान श्री कृष्ण के श्री मुख से निकली हुई श्रीमद भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं कहा है कि यदि ज्ञानमार्गी साधकों का ज्ञान मार्ग में समर्पण नहीं है और वह मात्र वेदों का अनुकरण कर रहे हैं…

फेसबुक कलह केंद्र कैसे बना  : Yogesh Mishra

 मैने अपने निजी संज्ञान में वर्ष 2011 जनवरी से फेसबुक प्रयोग कर रहा हूं ! उस समय भारत में गिने-चुने बुद्धजीवी लोग ही फेसबुक का प्रयोग किया करते थे और जो लोग प्रयोग किया करते थे ! वह सामान्यतया समाज…

प्रश्न विहीन समाज के निर्माण की शुरुआत वैष्णव लेखकों ने की थी : Yogesh Mishra

जैसा कि मैं पहले के लेखों में लिख चुका हूं कि प्रश्न ही समाज की धड़कन है ! जिस समाज में प्रश्न खड़े नहीं होते हैं, वह समाज उस मरे हुए व्यक्ति की तरह है ! जिसकी धड़कन बंद हो…

पृथ्वी का संचालन हिमालय की दिव्य संतों की ऊर्जाओं से ही होता है !

धरती पर ऊर्जा के दो केंद्र हैं ! देव ऊर्जाओं के लिये हिमालय और आसुरी ऊर्जाओं के लिये साऊथ इस्ट एशिया ! दोनों के इस पृथ्वी पर समान अधिकार है ! हिमालय की ऊर्जाओं के आचार्य वृहस्पति हैं और साऊथ…

क्या पूरा विश्व विश्व सत्ता के षडयंत्रों की चपेट में है : Yogesh Mishra

विश्व का अति विकसित देश जर्मन यह मानता है कि उनका चांसलर एंजेला डोरोथी मर्केल गुप्त रूप से देश के जर्मन लोगों की जगह मध्य पूर्व और एशियाई लोगों के साथ मिला हुआ है और योजना के लिये कार्य कर…

पूतना राक्षसी नहीं चंद्रवंशीय क्षत्राणी थी !

पूतना राक्षसी नहीं बल्कि चंद्रवंशीय क्षत्राणी थी ! उसके बचपन का नाम स्वाति था और वह कंस के बचपन की मित्र और कंस के सेनापति प्रद्युम्न की पत्नी थी ! जब कंस को पता चला कि उसके पिता उग्रसेन के…

“नारी स्वतंत्रता” के नाम पर ही नारियों पर सर्वाधिक आक्रमण क्यों : Yogesh Mishra

आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया कि विभिन्न माध्यमों से हिन्दू लड़कियों को ही सुनियोजित षड्यन्त्र के तहत महिलाओं को “नारी स्वतंत्रता” का पाठ पढ़ा कर लिबरल, कम्यूनिस्ट आदि में क्यों परिवर्तित किया जा रहा है ! आप अगर…

नर्मदा अनादि शैव नदी है : Yogesh Mishra

जब पृथ्वी पर गंगा नहीं थी, तब भी अनादि काल से शैव नर्मदा नदी भारत के संस्कृति को सजो रही थी ! यह हिमालय से नहीं बल्कि अमरकंटक के तप स्थली से निकली थी ! शुरू में मामूली दिखने वाली…

नई विश्व व्यवस्था में कृतिम भुखमरी का दुष्चक्र

नई शिक्षा नीति बाबू नहीं वैश्विक मजदूर बनायेंगे : Yogesh Mishra ए. आई. अर्थात आर्टिफिसियल इटेलिजेंस या कृतिम बौद्धिकता के आने के बाद वैसे भी पूरी दुनियां में अब बाबू की जगह बौद्धिक मजदूरों की मांग बढ़ी है ! अगर…

नई विश्व व्यवस्था में कृतिम भुखमरी का दुष्चक्र

आने वाले समय में अन्न पर पहला हक़ रोटी, शराब और पेट्रोल में किसका होगा ! जैसा कि फोटो से स्पष्ट है कि गोदामों में अनाज सड़ता नहीं बल्कि किसी के इशारे पर जानबूझ कर खाने का अनाज सड़वाया जाता…