किसी विकास के विरोध का सुनियोजित षड्यंत्र भी उसी विकास का हिस्सा होता है : Yogesh Mishra

आपको यह जानकर बहुत आश्चर्य होगा कि विश्व बैंक जब किसी कार्य योजना के लिये किसी देश को कोई लोन देता है, तो उस कार्य योजना का विरोध करने वाले समूह को भी उस कुल परियोजना के मूल्य का 3% पैसा टुकड़ों-टुकड़ों में दे दिया जाता है !

अर्थात मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि विश्व को चलाने वाले योजनाकार मनुष्य का यह मनोविज्ञान जानते हैं कि जब भी कोई विकास कार्य कहीं भी शुरू किया जायेगा, तो यथा वादी सोच रखने वाले व्यक्तियों का समूह उस विकास कार्य में अवरोध जरुर पैदा करेंगे !

अतः विश्व बैंक किसी भी विकास कार्य के विरोध के लिये जब भी किसी भी देश को कोई भी पैसा लोन के रूप में देता है, तो उसका 3% पैसा उस क्षेत्र में उस विकास कार्य का विरोध करने वाले व्यक्तियों के लिये सुरक्षित रख लेता है ! जिसे आवश्यकतनुसार उनके पास प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी न किसी एन.जी.ओ. के माध्यम से पहुंचा दिया जाता है !

इसके पीछे एक दूसरा सबसे बड़ा कारण यह भी है कि पूरी दुनिया को लोन बांटने वाला विश्व बैंक यह जानता है कि यदि किसी भी विकास कार्य के लिये जो लोन हमने दिया है, वह कार्य यदि समय से पूरा हो गया, तो उनके लोन की अदायगी समय से होनी शुरू हो जायेगी ! जिससे वह अपना नियंत्रण उस लोन लेने वाले देश पर लम्बे समय तक नहीं बना पायेंगे ! इस हेतु किसी भी विकास के प्रोजेक्ट को डिले करने के लिये उस विकास कार्य का विरोध करने वाली संस्था को यह विश्व बैंक के नुमाइंदे एन.जी.ओ. के माध्यम से 3% तक की धनराशी उस विरोध करने वाली संस्था को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिये तैयार रखी जाती है !

यह विकासशील देशों में विकास कार्यों में अवरोध पैदा करने के लिये एक विश्वव्यापी सुनियोजित षड्यंत्र है !

वर्तमान समय में इसका स्वरूप बदल दिया गया है, अब आदमी विरोध भी ईमानदारी से नहीं करता है ! अत: अब विश्व बैंक यह विरोध करने का पैसा किसी एक विशेष एन.जी.ओ. को न देकर छोटे-छोटे टुकड़ों में अनेक एन.जी.ओ. को देने लगा है !

क्योंकि उनके अनुभव में यह आया कि जब कोई एन.जी.ओ. किसी विकास कार्य का विरोध करता है, तो उसका विरोध जान सहयोग न मिलने के कारण बहुत लंबे समय तक नहीं टिक पाता है ! ऐसी स्थिति में अब विश्व बैंक के योजनाकारों ने यह निर्णय लिया कि किसी भी विकासशील देश के विकास कार्य के लिये कोई योजना आरंभ की जायेगी, तो उसके विकास कार्य का विरोध के लिये अब किसी एक एन.जी.ओ. के स्थान पर अनेक छोटे-छोटे एन.जी.ओ. को आर्थिक सहायता दी जायेगी ! जिससे उस विकास कार्य में हर कदम पर अड़चन पैदा की जा सके !

जिसमें वह लोग सफल भी हैं ! आप भारत के किसी भी विकास प्रोजेक्ट को उठाकर देख लीजिये ! जिसके लिये विश्व बैंक से लोन लिया गया हो ! आप पायेंगे कि उस विकास के प्रोजेक्ट में दर्जनों तरह के व्यक्तियों के द्वारा अलग-अलग समय में अवरोध पैदा किया जाता है और अनावश्यक रूप से उस विकास प्रोजेक्ट को विलंबित किया जाता है !

और जब उस विकास प्रोजेक्ट में पर्याप्त विलंब हो जाता है, तो वही विरोध करने वाले व्यक्ति या तो निष्क्रिय हो जाते हैं या सहयोग प्रदान करने लगते हैं !

यही विश्व बैंक का एक सुनियोजित षड्यंत्र है ! जिससे विकासशील देश कभी भी विकसित देश न बनने पाये इसके लिये अपनाया जाता है !!

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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