जानिए । कुण्डली में सूर्य के किस भाव में होने से क्या चिन्ता मिलती है ? Yogesh Mishra

प्रश्न कुण्डली में सूर्य के किस भाव में होने से क्या चिन्ता मिलती है ?

सूर्य पहले भाव में हो तो किसी के द्वारा कपट करने और छल करने की चिन्ता है,किसी ने झूठ कहकर बदनाम किया है।

सूर्य के दूसरे भाव में होने से जो कार्य किया जा रहा है उसके अन्दर लगने वाले धन बल या बाहु बल या भाग्यबल की चिन्ता है

तीसरे भाव में किसी के द्वारा किये जाने वाले झगडे की चिन्ता है

चौथे भाव में किसी के प्रति जलन चल रही है,

पांचवें भाव में सन्तान या शिक्षा या खेल की हार-जीत की चिन्ता है।

छठे भाव में रास्ते में जाते वक्त या आते वक्त कोई काम किया जाना था उसकी चिन्ता है।

सातवें भाव में होने पर जीवन साथी या साझेदार के अहम भरे शब्द कहने की चिन्ता है।

आठवें भाव में ह्रदय की बीमारी या नौकर के द्वारा काम नहीं करने की चिन्ता है।

नवें भाव से विदेश में रहने वाले व्यक्ति की चिन्ता है,

दसवें भाव में राज्य या सरकार द्वारा परेशान किये जाने की चिन्ता है,

ग्यारहवें भाव में सरकार से या पुत्र अथवा पिता के धन की चिन्ता है,

बारहवें भाव में आने जाने वाले रास्ते और शत्रु द्वारा परेशान किये जाने की चिन्ता है।

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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