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देव शक्तिपात महाविज्ञान

शक्तिपात महाविज्ञान सनातन परंपरा का एक अत्यंत रहस्यमयी और प्रभावशाली अंग है। सरल शब्दों में, शक्तिपात का अर्थ है—”गुरु द्वारा शिष्य के भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा (कुंडलिनी शक्ति) का संचार करना।” यह साधना मार्ग का एक ऐसा शॉर्टकट है जहाँ साधक…

जीवन की बाधायें ही व्यक्ति को विशेष बनाती हैं

सहज परिस्थितियों में तो हर कोई बेहतर काम कर लेता है, लेकिन विपरीत परिस्थितियां ही ‘नेचुरल लीडर्स’ या असाधारण व्यक्तित्व का जन्म होता है। जब मुश्किलें सामने आती हैं, तभी इंसान में निखार आता है ! व्यक्ति के भीतर का…

जीव ही सदाशिव है

कुलार्णव तंत्र के नौवें उल्लास के आधार पर माता पार्वती भगवान शिव से कहती हैं :– “जीवः शिवः शिवो जीवः स जीवः केवलः शिवः। पाशबद्धः स्मृतो जीवः पाशमुक्तः सदाशिवः॥” आपके द्वारा उद्धृत यह पंक्तियाँ सनातन धर्म के ‘अद्वैत वेदांत’ और…

जिंदगी बहुत सरल है, लेकिन हम इसे आडम्बर से कठिन बना देते हैं

जिंदगी की बुनियादी जरूरतें बहुत कम हैं, भूख के लिए भोजन, तन के लिए कपड़ा, रहने के लिए छत और मन के लिए थोड़ा सा प्रेम, सम्मान और संतुष्टि । और क्या चाहिये जीने के लिये ! यह सब पाना…

गांव से ग्लोबल का दौर ख़त्म

राहु के गोचर चक्र में गांव से ग्लोबल की यात्रा पूरी हो गई है, अब केतु का गोचर चक्र शुरू हो रहा है, अब ग्लोबल से गांव की ओर लौटना ही होगा ! तैयारी कर लीजिए वरना बहुत पछताएंगे ।…

आपका कोई शत्रु नहीं है

कोई भी आपका दुश्मन नहीं है, हम दुनिया को अपने तरह से चलाने के लिये लोगों को अपना दुश्मन बन लेते हैं ! हम अक्सर अपनी परेशानियों, असफलताओं या रिश्तों में कड़वाहट का दोष दूसरों पर मढ़ देते हैं और…

ईश्वर को जानने की शर्त

अक्सर इंसान सोचता है कि जीवन को समझने का मतलब सिर्फ खुद को, अपने करियर को, अपने परिवार को या इंसानी समाज को समझ लेना है। लेकिन शिव इस भ्रम को तोड़ते हैं। वह कहते हैं कि जब तक हमारी…

ईश्वर को अन्दर नहीं तलाश पाये, तो बाहर कैसे तलाशोगे

अंतर्यात्रा का परम सूत्र: गुरुदेव योगेश कुमार मिश्रा के दर्शन का निचोड़ गुरुदेव योगेश कुमार मिश्रा के विचार मनुष्य को भ्रम और धार्मिक मनोरंजन से मुक्त करके आत्म-केंद्रित इन्द्रियगत संकीर्णता से परे ब्रह्मांडीय चेतना और आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाते…

RO का नहीं अभिमंत्रित जल पीजिए

भारतीय संस्कृति में जल को केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन, ऊर्जा और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। प्राचीन काल से ही पूजा-पाठ में ‘आचमन’ और ‘अभिमंत्रित जल’ (मंत्रों से सिद्ध किया हुआ पानी) का उपयोग होता…

आपकी उत्सुकता ही आपका बंधन है

मानव मस्तिष्क इस तरह से विकसित हुआ है कि जब भी कोई नई जानकारी, नया रहस्य या अनिश्चितता सामने आती है, तो हमारे भीतर डोपामीन नामक हार्मोन का स्राव होता है। यह हार्मोन हमें संतुष्टि ही नहीं देता, बल्कि और…