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भक्ति अब व्यर्थ का विषय है

विश्व के बदलते बौद्धिक परिवर्तन के अनुसार अब भक्ति की कोई आवश्यकता नहीं है, इस सत्य को विश्व में लगभग सभी धर्मों ने तार्किक दृष्टि से स्वीकार कर लिया है, इसीलिये अब योरोप जहाँ से ईसाइयत पुर दुनियां में फैली…

अंतिम विकल्प शिवत्व की साधना है

मानवता का अंतिम विकल्प शिवत्व की साधना है शिवत्व साधना का अर्थ कृतिम सांसारिक बंधनों और अहंकार से मुक्त होकर स्व का आत्म-साक्षात्कार करना है। यह महज पूजा-पाठ कर्मकाण्ड नहीं, बल्कि स्वयं के रूपांतरण और भीतर दिव्यता के अवतरण की…

एल.आई.सी. आई.पी.ओ. विदेशी कारण की शुरुआत

पहले से ही अति लाभ में चल रही एल.आई.सी. कंपनी का बहुप्रतीक्षित आई.पी.ओ. अंतत: 4 मई 2022 को लॉन्च हो गया है ! जिसका 9 मई, 2022 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा। सरकार अगले 4 दिनों में इस आईपीओ…

स्ट्रेस और डिप्रेस में अंतर व सटीक समाधान

तनाव और अवसाद में अंतर तनाव और अवसाद  दोनों मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियाँ हैं और कई बार लोग इन्हें एक ही समझ लेते हैं, लेकिन इनमें बहुत गहरा और बुनियादी अंतर होता है। संक्षेप में कहें तो तनाव किसी…

सामान्य से महान बनने का सूत्र

महान बनने के लिये किसी बड़ी डिग्री की जरुरत नहीं है, न ही किसी उच्च कुल या संपन्न परिवार में पैदा होने की जरुरत है ! महान व्यक्ति बस सिर्फ ईश्वर का कार्य करके बनता है, जिसे जीवों का कल्याण…

साधक को मांसाहार क्यों नहीं खाना चाहिए

मांसाहार का प्रभाव साधक के शरीर और मन दोनों पर नकारात्मक पड़ता है। इसके सेवन से मस्तिष्क की रक्त-वाहिकाएँ संकुचित होने लगती हैं, जिससे दिमाग तक पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती। परिणामस्वरूप स्मरण शक्ति कमजोर होती है, एकाग्रता…

सम्पन्नता का रहस्य पैसा कामना नहीं है, वह स्वत: आना चाहिये

सम्पन्नता पर शोध परक लेख जब हम अपना पूरा ध्यान सिर्फ पैसा कमाने पर केंद्रित कर देते हैं, तो हमारे भीतर तनाव, लालच और असंतोष जन्म लेता है। यह एक ऐसी अंधी दौड़ है जिसकी कोई आखिरी मंजिल नहीं होती;…

जीवन में सफल का वास्तविक अर्थ

जीवन की वास्तविक सार्थकता उसकी गुणवत्ता में निहित है, न कि आपकी आयु क्या है इसमें निहित है ! यह गुणवत्ता तब अपने सर्वोच्च आयाम को प्राप्त करती है, जब आप लोक कल्याण और जीव सेवा से अपने जीवन को…

सत्ता सदन से नहीं गुफाओं से चलती है

यह बहुत बड़ा भ्रम है कि सत्ता दिल्ली या प्रदेश के सदनों से चलती है, बल्कि बहुत ही नंगा सच यह है कि सत्ता तांत्रिकों के आश्रम या तंत्र की गुप्त गुफाओं से चलती है ! कहने को तो भारत…

सच्चे संतों के पास शिष्यों की भीड़ क्यों नहीं होती है

शोध परक लेख वर्तमान समय में यह एक बहुत ही सामान्य प्रश्न है कि जो संत वास्तव में सिद्ध, पहुंचे हुए और आत्मज्ञानी होते हैं, उनके आश्रमों में अक्सर बहुत कम लोग क्यों दिखाई देते हैं? वहीं, दूसरी ओर जहाँ…