जानिए बाधक ग्रह की आपके जीवन में बाधा !!

वैदिक ज्योतिष के अन्तर्गत अनगिनत योगों का उल्लेख मिलता है ! बहुत से योग अच्छे हैं तो बहुत से योग खराब भी हैं ! जन्म कुंडली में अरिष्ट की व्याख्या भावों के आधार पर भी की जाती है ! कुछ भाव ऎसे हैं जो जीवन में बाधा उत्पन्न करने का काम करते हैं ! इन भावों के स्वामियो को बाधक ग्रह अथवा बाधकेश का नाम दिया गया है !

हर लग्न के लिए भिन्न – भिन्न भावों के स्वामी बाधक होते हैं ! इसमें सभी बारह राशियों के स्वभाव के आधार पर बाधक ग्रह का निर्णय किया जाता है ! मेष, कर्क, तुला और मकर राशि चर स्वभाव की राशियाँ मानी गई हैं ! चर अर्थात चलायमान रहती है !

वृष, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशियाँ स्थिर स्वभाव की राशि मानी गई हैं ! स्थिर अर्थात ठहराव रहता है ! मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशियाँ द्वि-स्वभाव की राशि मानी जाती है अर्थात चर व स्थिर दोनो का समावेश इनमें होता है !

जन्म लग्न में स्थित राशि के आधार पर बाधक ग्रह का निर्णय करते हैं ! जन्म लग्न में चर राशि मेष, कर्क, तुला या मकर स्थित हैं तब एकादश भाव का स्वामी ग्रह बाधकेश का काम करता है ! जन्म लग्न में स्थिर राशि वृष, सिंह, वृश्चिक या कुंभ स्थित है तब नवम भाव का स्वामी ग्रह बाधकेश का काम करता है ! यदि जन्म लग्न में द्वि-स्वभाव राशि मिथुन, कन्या, धनु या मीन स्थित है तब सप्तम भाव का स्वामी ग्रह बाधकेश का काम करता है !

बहुत से विद्वानो के मतानुसार बाधक भावों – एकादश, नवम व सप्तम में बैठे ग्रह भी बाधकेश की भूमिका अदा करते हैं !

अब हम बाधक ग्रह के कारकत्वों के बारे में जानेगें कि वह किस तरह से काम करता है ! जैसा की नाम से ही स्पष्ट है, बाधक ग्रह अपनी दशा/अन्तर्दशा में बाधा व रुकावट पहुंचाने का काम करते हैं ! व्यक्ति के जीवन में जब बाधक ग्रह की दशा आती है तब वह बाधक ग्रह स्वयं ज्यादा हानि पहुंचाते हैं या वह जिन भावों में स्थित हैं वहाँ के कारकत्वों में कमी कर सकता है !

व्यक्ति विशेष की कुंडली में बाधक ग्रह जब कुंडली के अशुभ भावों के साथ मिलते हैं तब ज्यादा अशुभ हो जाते हैं ! यही बाधक ग्रह जब जन्म कुंडली के शुभ ग्रहों के साथ मिलते हैं तब उनकी शुभता में कमी भी कर सकते हैं ! बाधक ग्रह सबसे ज्यादा अशुभ तब होते हैं जब वह दूसरे भाव, सप्तम भाव या अष्टम भाव के स्वामी के साथ स्थित होते हैं !

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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