Category Shaivism & Vaishnavism

क्या हमारा धर्म ही हमें नष्ट कर रहा है : Yogesh Mishra

महाभारत के सिद्धांतों पर आधारित मनुस्मृति की वह उक्ति जो कि आठवें अध्याय के पन्द्रहवें श्लोक में वर्णित है ! ‘धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः ! तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत् !’ इस वाक्यांश का अर्थ…

रावण का सिद्धांतवादी चरित्र : Yogesh Mishra

आर्यों से बहिस्कृत करोड़ों व्यक्तियों को जब पूरी दुनियां में किसी ने आश्रय नहीं दिया, तब उन्हें आश्रय और संरक्षण ही नहीं, सम्मान के साथ भर पेट भोजन और आधुनिकतम सुविधा देकर “रक्ष संस्कृति” का निर्माण करने वाला रावण खलनायक…

वैष्णव शासक जन्मेजय के शासन में शैव उपासक नागवंशियों का पलायन : Yogesh Mishra

यह बात उस समय की है, जब महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था ! शैव उपासक कौरवों के हार के कारण धृतराष्ट्र अपना राजपाठ वैष्णव उपासक युधिष्ठिर को सौंप कर, अपनी पत्नी गांधारी और छोटे भाई विदुर सहित जंगल…

क्या धर्मयुद्ध करने वाला विष्णु ही सर्वाधिक धर्म विरोधी था : Yogesh Mishra

जैसा कि आपको वैष्णव कथा वाचकों द्वारा बतलाया गया है कि पृथ्वी पर विष्णु ने बार-बार धर्म की स्थापना के लिये विधर्मियों के साथ 12 महा युद्ध लड़े ! जिसके लिये विष्णु को 8 अलग-अलग अवतार लेने पड़े ! लेकिन…

रावण का दयालु चरित्र : Yogesh Mishra

स्वयं महर्षि वाल्मीकि ने रावण की प्रशंसा करते हुये कहा है कि उनमें दस गुण थे ! जो उसके दस सिर का प्रतीक थे ! उनके अनुसार रावण महापंडित, महायोद्धा होने के साथ साथ सुन्दर, दयालु, तपस्वी, उदार हृदय के…

राम रावण युद्ध का अज्ञात इतिहास : Yogesh Mishra

सभी वैष्णव इतिहासकारों ने राम को मर्यादा पुरुषोत्तम और रावण को खलनायक बतलाया ! जबकि यह मात्र उस युद्ध का परिणाम था, जो इंद्र के अहंकार के कारण हुआ था ! उस समय पृथ्वी पर अनेक संस्कृतियों अपने-अपने तरीके से…

वैष्णव लेखक कैसे-कैसे बच्चे पैदा कर सकते हैं : Yogesh Mishra

जैसा कि मैं जानता हूँ कि यह मैथुनिक सृष्टि है ! ईश्वर ने इस सृष्टि के संचालन के लिये, प्रत्येक योनि में नर और मादा दो प्रजाति विकसित की हैं ! जिनके मैथुन क्रिया से वंश वृद्धि होती है !…

अवतारवाद की अवधारणा धूर्त वैष्णव लेखकों की देन है : Yogesh Mishra

जब पूरी पृथ्वी पर मात्र एक शैव धर्म ही था और वैष्णव लोगों ने पूरी दुनिया पर आक्रमण करके युद्ध के द्वारा अपनी नगरीय वैष्णव संस्कृति को बढ़ावा देना शुरू किया था ! तब उस समय बहुत बड़े पैमाने पर…

क्या महाभारत का युद्ध शैव और वैष्णव संस्कृति के मध्य का युद्ध था : Yogesh Mishra

मुझे यह बात कभी समझ में नहीं आयी कि एक परिवार के आपसी संपत्ति के झगड़े ने कैसे विश्वयुद्ध का स्वरूप ले लिया ! मैंने इस पर बहुत गहराई से अनेक ग्रंथों का अध्ययन किया और यह निष्कर्ष निकाला कि…

राम की सेना में बंदरों नहीं वन नर थे : Yogesh Mishra

वानर अर्थात “वने भवं वानम्, राति (रा आदाने) गृह्णाति ददाति वा ! वानं वन सम्बन्धिनं फलादिकं गृह णाति ददाति वा !! दूसरे शब्दों में जो वन में उत्पन्न होने वाले फलादि को खा कर जीवन निर्वाह करता है ! वह…