“बगलामुखी” के सत्य स्वरूप को जानिये ! Yogesh Mishra

लोक सभा चुनाव आ गया है आज कल बगलामुखी अनुष्ठान के नाम पर खूब ठगी हो रही है ! प्रायः चुनाव के समय इसके अनुष्ठान चुनाव जीतने के लिये खूब होते हैं ! पर चुनाव जीतता तो कोई एक ही है ! अर्थात चुनाव जीतना तो मेहनत और पुरुषार्थ का परिणाम है ! पर बगलामुखी अनुष्ठान करवाने वाले इस मौके का खूब लाभ उठाते हैं ! अब हम बगलामुखी के सत्य का वर्णन करते हैं !

कई लोग अज्ञान वश बगलामुखी का संधि विच्छेद कर उन्हें बगला और मुखी होने से उनके चेहरे के बगुला पक्षी समझ लेते हैं ! पर असल में बगला शब्द “वल्गा” का अपभ्रंस है ! जैसे कोई लोग लखनऊ को ‘नखलऊ’ बोल देते हैं ! उसी तरह से मूलतः इनका नाम “वल्गामुखी” ही है ! जिसका बगुला जैसा होने से कोई सम्बन्ध नहीं है !

माता बगलामुखी दसमहाविद्या में आठवीं महाविद्या हैं ! इनका प्रकाट्य स्थल गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में माना जाता है ! हल्दी रंग के जल से इनका प्रकट होना बताया जाता है ! हल्दी का रंग पीला होने से इन्हें पीताम्बरा देवी भी कहते हैं ! ये स्तम्भन की देवी हैं ! शास्त्रों के अनुसार सारे ब्रह्माण्ड की शक्ति मिल कर भी इनका मुकाबला नहीं कर सकती ! बगलामुखी महाविद्या भगवन विष्णु के तेज से युक्त होने के कारण वैष्णवी भी कही जाती है ! मंगलयुक्त चतुर्दशी की अर्धरात्रि में इसका प्रादुर्भाव हुआ था ! इसलिये इसे “मंगला” भी कहते हैं ! श्री बगलामुखी को ब्रह्मास्त्र के नाम से भी जाना जाता है !

वैसे तो बगलामुखी देवी के प्रादुर्भाव की कोई निश्चित कथा नहीं है ! कहा जाता है कि एक बार आंधी-तूफान से पीड़ित होकर देवता भगवान शंकर के पास पहुंचे ! शंकर जी ने देवी के पास उनको भेजा कि यह कार्य देवी ही कर सकती हैं ! देवी भगवती के शरीर से एक शक्ति का जन्म हुआ जो बगलामुखी कहलाईं ! बगलामुखी ने आंधी तूफान को शांत कर दिया और देवताओं को अभय दिया !

मारण, वशीकरण और स्तम्भन, इन तीन रूपों में देवी पीतांबरा की पूजा होती है ! देवी बगलामुखी स्तम्भन की पूर्ण शक्ति हैं ! तीनों लोकों के कष्ट हरती हैं ! कहीं भी कैसी भी विपत्ति हो, वह तुरंत दूर कर देती हैं ! सामान्यतया इनकी पूजा कुछ कार्य विशेष पर की जाती है ! यदि मुकदमेबाजी हो, शत्रु परेशान कर रहे हैं, असाध्य रोगों से ग्रस्त हों, मानसिक अशांति हो, गृह क्लेश हों, वाणी पर नियंत्रण नहीं हों, बने-बनाए काम रुक जाते हों, पैसा आता हो और चला जाता हो यानी आर्थिक संकट हो ! तब देवी पीतांबरा की शरण में जाएं ! सारे कार्य सिद्ध होंगे ! वह अपने भक्तो को रूप देती हैं, जय देती हैं, धन देती हैं, यश देती हैं और शत्रुओं का दमन करती हैं ! देवी शक्ति साक्षात ब्रह्म-अस्त्र हैं, जिसका संधान त्रिभुवन में किसी के द्वारा संभव नहीं हैं ! सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की शक्ति का समावेश देवी बगलामुखी में हैं !

इसकी शक्ति बहुत ही प्रचंड है ! यह मात्र उन्हीं साधकों को अच्छी तरह पता है जो इनकी साधना करते हैं ! इनके साधकों का कोई भी किसी भी तरह के टोने, टोटके, कृत्या और प्रबलतम तांत्रिक प्रयोग से कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते हैं ! इसीलिए पारलौकिक विषयों के ज्ञाता इनकी शरण जरूर लेते हैं और जब भी मौका मिले इनकी साधना करते हैं ! इनकी साधना दक्षिण और वाम दोनों मार्ग से होती है ! सिद्धों के अनुसार दक्षिण मार्ग से इनकी साधना पूर्ण फलदाई होती है ! वाम मार्गी साधना यथा शक्ति नहीं करनी चाहिये !

आत्म रक्षा के लिये की गई साधना दक्षिण मार्गी साधना है और दूसरे के विनाश के लिये की गई साधना वाम मार्गी साधना है ! सामान्यतया शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद विवाद में विजय के लिए इनकी उपासना की जाती है ! इनकी उपासना से शत्रुओं का स्तम्भन होता है तथा जातक का जीवन निष्कंटक हो जाता है ! किसी छोटे कार्य के लिए 10,000 तथा असाध्य से लगाने वाले कार्य के लिए एक लाख मंत्र जाप का अनुष्ठान करना चाहिए ! बगलामुखी मंत्र के जाप से पूर्व बगलामुखी कवच का सिद्ध पाठ अवश्य करना चाहिए !

माँ का स्वरुप नवयोवना है और पीले रंग की सा‌‌ङी धारण करती हैं ! सोने के सिंहासन पर विराजती हैं ! तीन नेत्र और चार हाथ हैं ! सिर पर सोने का मुकुट है ! स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत हैं ! शरीर पतला और सुंदर है ! रंग गोरा और स्वर्ण जैसी कांति है ! सुमुखी हैं ! मुख मंडल अत्यंत सुंदर है जिस पर मुस्कान छाई रहती है जो मन को मोह लेता है !

साधना के लिये पीले आसन पर बैठें, पीले वस्त्र धारण करें ! देवी भगवती की पूजा भी हल्दी, पीले फूल, पीली सरसो से करें ! देवी को किशमिश का भोग लगाएं ! सरसो केतेल का दीपक जलाकर आराधना करें ! उद्देश्य अनुसार बगलामुखी चालीसा, बगलामुखी कवच, बगलामुखी मंत्रों से उनकी आराधना करें !

“ऊं ह्लीं ऊं” देवी पीतांबरा का बीज मंत्र है। हल्दी की माला से इस मंत्र की पांच माला या तीन माला रोज जप करें !

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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