बुद्धिजीवियों को सत्ता से दूर रखने के लिये हुई थी लोकतंत्र की उत्पत्ति : Yogesh Mishra

यह सुनने में बड़ा अजीब लग रहा होगा ! लेकिन सत्य यही है कि अंग्रेजों ने जब पूरी एशिया पर अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया ! तब उनके साम्राज्य को चुनौती देने वाला वर्ग बस सिर्फ एक ही था और वह था बुद्धिजीवी ब्राह्मण वर्ग !

जिसने गुरुकुलों के माध्यम से समाज को संगठित करके अट्ठारह सौ सत्तावन में ही अंग्रेजों के विरुद्ध प्रथम स्वतंत्रता संग्राम छोड़ दिया था ! जिसमें देश के कुछ गद्दार राजाओं के कारण असफलता हाँथ लगी ! फिर भी इससे अंग्रेजों को बहुत बड़ी क्षति का सामना करना पड़ा !

जिसका परिणाम यह हुआ कि अंग्रेजों के नीति निर्माताओं ने इंग्लैंड में बैठ कर इस विषय पर बहुत गहराई से चिंतन किया कि समाज के नियन्ता ब्राह्मणों को प्रभावहीन कैसे बनाया जाये !

क्योंकि गुरुकुल में ब्राह्मण जो समाज के हर वर्ग को शस्त्र और शास्त्र की शिक्षा देते थे ! इसलिये ब्राह्मणों से दीक्षित समाज ब्राह्मणों की इच्छा के विरुद्ध कोई भी कार्य नहीं करता था ! ऐसी स्थिति में अंग्रेजों के लिये यह सबसे बड़ी चुनौती थी कि ब्राह्मणों को भारतीय समाज में प्रभावहीन कैसे बना कर समाज से दूर रखा जाये !

अंग्रेजों ने इस समस्या के समाधान के लिये “लोकतंत्र” नामक शब्द की उत्पत्ति की और समाज का वह वर्ग जिसे ब्राह्मण समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिये अनुशासित करता था ! उस वर्ग को शोषित वर्ग कह कर यह समझाने की चेष्टा शुरू की गयी कि ब्राह्मणों ने तुम्हारा शोषण सदियों से किया है और यदि तुम्हें ब्राह्मण के शोषण से मुक्त होना है ! तो तुम्हें अपने भारत में अपनी बिरादरी के लोगों को संगठित करके लोकतंत्र की स्थापना करनी होगी !

क्योंकि लोकतंत्र ही एक मात्र वह माध्यम है जो तुम्हें ब्राह्मणों के शोषण से मुक्त करा सकता है ! क्योंकि ब्राह्मण पठन-पाठन के कार्य में लगा रहता है ! अतः उसका परिवार छोटा होता है और तुम लोग जो श्रम कार्य करते हो तो तुम लोगों का परिवार श्रम कार्य करने के कारण बड़ा होता है ! अतः ऐसी स्थिति में यदि श्रम कार्य करने वाले सभी संगठित होकर मतदान द्वारा अपने मुखिया का चयन करें तो तुम ब्राह्मणों के प्रभाव से तुम मुक्त हो सकते हो !

और इसके लिये उन्होंने विधिवत इंग्लैंड के विश्वविद्यालयों में अंबेडकर जैसे व्यक्तियों का ब्रेनवाश किया और उन्हें हरिजन नेता घोषित कर शासन सत्ता का पूरा समर्थन दिया ! पेरियार बाबा जैसे व्यक्ति को दक्षिण भारत के आदिवासियों के बीच में ब्राह्मणों के विरुद्ध द्रविण नेता के रूप में उभारा और बुद्धिजीवियों के लिये अंबेडकर को हरिजन नेता के रूप में उभारा ! जबकि हरिजनों ने उन्हें कभी अपना नेता नहीं माना तभी तो वह जीवन में कभी कोई भी चुनाव नहीं जीत पाये !

अंबेडकर योग्य हैं इस बात को प्रचारित प्रसारित करने के लिये अंबेडकर को बहुत सी डिग्रियां अंग्रेजों के विश्वविद्यालय से पुरस्कार के तौर पर दी गई ! जिन का बखान आज अंबेडकरवादी किया करते हैं और दूसरी तरफ कानून बना कर गुरुकुल शिक्षा पध्यति को विधि विरुद्ध घोषित कर अपराध की श्रेणी में डाल दिया ! जिससे धीरे धीरे गुरुकुल नष्ट होने लगे और ब्राह्मणों का प्रभाव समाज में ख़त्म होने लगा !

लोकतंत्र की यह खासियत है कि समाज में समाज को दिशा देने वाले बुद्धिजीवी विचारक, शुभचिंतक, विचारशील भविष्य दृष्टा आदि का प्रतिशत समाज में हमेशा कम होता है और समाज में मंदबुद्धि, स्वार्थी, धूर्त, बेईमान, अवसरवादी व्यक्तियों का प्रतिशत सदैव से ज्यादा रहा है और आगे भी रहेगा !

ऐसी स्थिति में यदि बुद्धिजीवी विचारशील चिंतक का वोट और धूर्त, बेईमान, स्वार्थी, मंदबुद्धि व्यक्ति के वोट का मूल्य यदि समाज में एक बराबर होगा ! तो स्वाभाविक है कि बुद्धिजीवी चिंतक वर्ग सत्ता से बाहर हो जायेगा ! जो आज की राजनीति में हो रहा है और प्रशासनिक सेवाओं में आरक्षण लागू करके बुद्धिजीवी, चिंतक वर्ग को सत्ता से दूर कर दिया गया है ! यही देश का दुर्भाग्य है !

इस सब के पीछे कुछ और नहीं बल्कि मात्र भारत के प्राकृतिक संसाधनों को कब्जा करने की रणनीति है और सत्ता के केंद्र से लोकतंत्र और आरक्षण के द्वारा बुद्धिजीवी चिंतक, विचारशील, भविष्य दृष्टा, राष्ट्र प्रेमीयों को सत्ता से अलग करके यह विदेशी षड्यंत्रकारी भारतीय संसाधनों पर अपना कब्जा जमाना चाह रहे हैं !

इसीलिये आपने देखा होगा कि जब भी पूर्ण बहुमत से किसी निम्न वर्ग के व्यक्ति की सरकार आती है तो देश रत्ती-रत्ती बिकना शुरू हो जाता है और यदि उस व्यक्ति के गलत निर्णयों का बुद्धजीवियों द्वारा विरोध किया जाये तो पहले तो उस विरोध करने वाले को गाली देने के लिये सोशल मीडिया में बैठे हुये राजनैतिक दलों के नुमाइंदे और दलाल निरंतर अपमानजनक शब्दों की बौछार करते हैं ! फिर किसी फर्जी केस में फंसा कर उसको जेल में डाल देते हैं या उसकी हत्या कर देते हैं !

यह सब भारत को नष्ट करने का एक सुनियोजित षड्यंत्र है ! जो भारत में लोकतंत्र के माध्यम से चलाया जा रहा है ! जिस का अगला चरण बहुत शीघ्र ही शुरू होने वाला है और वह है भारत पर विश्व सत्ता का कब्जा !

अगर सामर्थ है तो इस षड्यंत्र को समझ कर अपने देश को बचा लीजिये ! वरना आने वाली पीढ़ियों को देने के लिये न तो तुम्हारे पास अपने मेहनत से कमाया हुआ धन ही होगा और न सम्पत्ति ही होगी ! क्योंकि आगे अब यही होने जा रहा है !!

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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