जानिए ! कर्ण पिशाचिनी साधना की विधि । Yogesh Mishra

॥ कर्ण पिशाचिनी साधना ॥

यह अत्यंत उग्र साधना है और शीघ्र फलप्रद है,इस साधना से सिद्धि न मिले यह तो सम्भव ही नहीं है इसलिये यह साधना संपन्न करने योग्य है.यह साधना जिस व्यक्ति को सिद्ध है उसके पास कोई भी जाये तो वह साधक उसका भूत, भविष्य-वर्तमान सहज ही बता देता है.

कर्णपिशाचिनी साधना प्रारम्भ करने के मेरी सलाह है कि वह किसी योग्य गुरु निर्देश मे ही इस साधना को सम्पन्न करेँ , और साधना प्रारम्भ के पूर्व गुरु मंत्र का कम से कम 11 लाख बार जप अवश्य करें क्योकि कई बार साधना में त्रुटि हो जाने पर साधक पागल के समान भी हो जाता है ।

इस साधना में 11 दिन का समय लगता है । इसमेँ कासे की थाली मे सिन्दूर का त्रिशूल बनाकर उसका पूजन करे और दिन मेँ शुद्ध गाय के घी का दीपक जला कर 11 सौ मन्त्र जप करे तथा रात मेँ भी इसी प्रकार त्रिशूल का पूजन कर घी का दीपक जलाकर 1100 बार मंत्र जप करे ।

इस प्रकार 11 दिन तक प्रयोग करने पर कर्णपिशाचिनी सिद्ध हो जाती है, और वह साधक के कान मे प्रश्नो का उत्तर सही सही देती है , इस साधना मे साधक को एक समय भोजन करना चाहिये और यथा सम्भव काले वस्त्र धारण करने चाहिए, साधना काल मे व्यर्थ बातचीत , स्त्री गमन , पर स्त्री से बातचीत आदि सर्वथा वर्जित है ।
मंत्र–

ॐ नमः कर्ण पिशाचिनी अमोघ सत्यवादिनि मम कर्णे अवतरावतर अतीतनागतवर्तमानानि दर्शय दर्शय मम भविष्य कथय ह्रीँ कर्णपिशाचिनी स्वाहा ।

वस्तुतः कर्ण पिशाचिनी साधना आसान दिखाई देती है परन्तु थोडी सी भी त्रुटि साधक के लिए नुकसानदायक हो सकती है,
फिर भी प्रारम्भ मे साधको को यह सलाह दी जाती है कि वे किसी गुरु के समीप बैठ कर ही उनके सान्निध्य मे ही साधना सम्पन्न करनी चाहिए ।
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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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