राम को इंसान से भगवान बनाने की कोशिश : Yogesh Mishra

भगवान श्री राम न ही इंसान है और न ही भगवान हैं ! भगवान श्रीराम का व्यक्तित्व एक ऐसा व्यक्तित्व है जिसे आप इंसान के दृष्टिकोण से देखें तो वह एक मर्यादा पुरुषोत्तम इंसान के रूप में नजर आते हैं…

भगवान श्री राम न ही इंसान है और न ही भगवान हैं ! भगवान श्रीराम का व्यक्तित्व एक ऐसा व्यक्तित्व है जिसे आप इंसान के दृष्टिकोण से देखें तो वह एक मर्यादा पुरुषोत्तम इंसान के रूप में नजर आते हैं…

वैष्णव ढोंगीयों ने ईश्वर की प्राप्ति का माध्यम भगवान की भक्ति को बतलाया है ! इसीलिए वैष्णव लोग ईश्वर की प्राप्ति के लिए भगवान भजन पर बहुत दबाव बनाते हैं ! जबकि सच्चाई यह है कि ईश्वर की प्राप्ति के…

उस समय 18 वीं शताब्दी में साम्राज्यवादी ताकतों ने पूरी पृथ्वी पर अपने पैर फैलाने शुरू कर दिए थे ! विश्व के हर देश के प्राकृतिक संसाधनों पर अधिक से अधिक कब्जा करने की होड़ यूरोप के सभी देशों के…

आज कल भारतीय शेयर बाजार में पुन: गिरावट के साथ क्लोजिंग हो रही है ! आज जहां सेंसेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ ! वहीं निफ्टी भी गिरावट के साथ ही बंद हुई है ! इसके अलावा बी.एस.ई. में कुल…

काम और यौन आनंद दोनों अलग अलग विषय हैं किन्तु ज्ञान के अभाव में समाज ने अज्ञानता वश यौन आनंद को ही काम ऊर्जा मान लिया है ! यहीं से सारे विकार और विकृतियां समाज में फैलती चली गई !…

शैव जीवन शैली में काम और क्रोध को एक ऊर्जा माना गया है जबकि वैष्णव जीवन शैली में काम और क्रोध को एक विकार माना गया है और काम को लेकर सारी गलती यही से शुरू हुई ! अपने को…

मनोवैज्ञानिकों की अवधारणा है कि कोई भी व्यक्ति यदि निरंतर एक ही समय पर 40 दिन तक कोई भी क्रिया करता है, तो उस मनुष्य के अंदर उस क्रिया को निरंतर करते रहने का अभ्यास हो जाता है ! जिसे…

सोलहवीं सदी तक एशिया और यूरोप में चेचक, खसरा या प्लेग (काली मौत) जैसी बीमारियाँ आम हो चुकी थी ! इसकी पहली विस्तृत खेप में बड़ी जनसंख्या खत्म हुई और धीरे धीरे कुछ समय बाद लोगों में इन्हें लेकर प्रतिरोधक…

मांसाहारी भोजन क्यों नहीं करना चाहिए : Yogesh Mishra जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हर शरीर के अंदर एक विशेष तरह का डी.एन.ए. अर्थात डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल होता है ! जो प्रत्येक व्यक्ति की अनुवांशिक विशेषज्ञता को बतलाता…

सत्य और सिद्धांत सदैव सापेक्ष होते हैं ! इनका कोई निश्चित स्वरूप नहीं होता है ! एक काल में कहा गया वाक्य सत्य हो सकता है किंतु दूसरे काल में वही वाक्य असत्य हो जाता है ! इसी तरह कर्म…