ज्योतिष के ये दस गुप्त सूत्र आपके बड़े काम के हो सकते हैं एक बार जरूर पढ़ें ।

निम्नलिखित ज्योतिष के ये 10 सूत्र पंडित योगेश मिश्र द्वारा स्व अनुभूत किए गये है । जो आपके लिए बहुत लाभकारी हो सकते है,विस्तार से पढ़ें ।

1- त्रिक भावों के स्वामी यदि 6,8,12 में ही हो या केंद्र त्रिकोण में बलवान राशि में हों तो सारी कुंडली को अधिक बल देते हैं, तब सारी कुंडली ही सुधर जाती है,

2- उच्च ग्रह के साथ कोई और ग्रह हो तो इनमे से किसी एक की महादशा में या इन दोनों की परस्पर दशा भुक्ति में कोई लम्बे समय तक चलने वाला रोग विकार आता है,

3- उच्च से नीच तक अवरोही और नीच से उच्च तक आरोही है, उच्च राशि और उससे 2,3 राशियों में बलवान, चौथी राशि में मध्यम, 5,6,7 राशियों में क्रमशः घटता बल जो नीच पर आकर आधा रह जाता है,

4- बाधक ग्रह तब तक बाधक नहीं हैं जब तक उसका सम्बन्ध किसी भी तरह से अष्टम भाव या अष्टमेश से नहीं है, यदि वह 22 द्रेष्काण के स्वामी से सम्बन्ध बनाये तो बहुत घातक है,

5- जब दो जोड़ा ग्रह साथ हों तो बाद में कहे ग्रह का फल ज्यादा होता है – सूर्य और शनि, शनि और मंगल, मंगल और गुरु, गुरु और चन्द्र, चन्द्र और शुक्र, शुक्र और बुध, बुध और चन्द्र |

6- महापुरुष योग तब अपना पूरा फल नहीं देते जब योगकारक ग्रह सूर्य या चन्द्र के साथ हो और अशुभ वेला में जन्म हो | उस कुंडली में कोई ग्रह नीच का हो, तब उस ग्रह की दशा में ही काफी अच्छे फल मिलते हैं |

7- जन्म समय कौनसा हो, कई मत पुराने ऋषियों ने बताएं हैं, गर्ग और उनके शिष्यों ने पैरों से प्रसव में टखने ( घुटने ) दिखने का समय जन्म का कहा है, सीधे प्रसव में कंधे दिखने पर जन्म का समय कहा है कुछ ऋषी माता के शरीर से बच्चे का शरीर अलग होने का समय ही असली जन्म समय मानते हैं ,लेकिन सही समय की गणना के लिये मेरा “जन्म का सही समय” शोध लेख पढ़िये |

8- पंचांग के पांच तत्वों को देखना कुंडली विश्लेषण का प्रवेश द्वार है, जन्म वारपति यदि कुंडली में बलवान होकर स्थित हो तो कुंडली को अतिरिक्त बल देता है,

9- लग्नादि भावों से चलते हुए 5 या 6 या 7 भावों में सारे सात ग्रह हों तो मालिका योग बनता है, इन योगों में धन, सम्मान, पद, मिलता है, लेकिन 8 और 12 भावों से शुरू होने वाली मालिका सदा ख़राब होती है !

10- विद्वान तांत्रिक बनने के योग 1,2,5,9,12 में पाप ग्रह; केंद्र में पाप के साथ बुध; सूर्य मंगल का कोई सम्बन्ध; बुध शनि का केंद्र में बना सम्बन्ध; दशम में पाप को शुभ गृह देखे; राहु या केतु 3,11 में इन योगों का प्रभाव बढ़ाते हैं !

अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !

योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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