संविधान में परिवर्तन क्यों जरुरी है ? Yogesh Mishra

झूठ बोलने वाले शासक से मौन शासक फिर भी अच्छा है, कम से कम वह जनता को गुमराह तो नहीं करता ! लोकतंत्र से राजतंत्र फिर भी अच्छा था ! राजाओ के शासन काल में भारत के लोग ज्यादा सुखी…

झूठ बोलने वाले शासक से मौन शासक फिर भी अच्छा है, कम से कम वह जनता को गुमराह तो नहीं करता ! लोकतंत्र से राजतंत्र फिर भी अच्छा था ! राजाओ के शासन काल में भारत के लोग ज्यादा सुखी…

आम भौतिक चमक-दमक से दूर भारत के किसी कोने में एक गांव था ! वह गांव इतना छोटा था कि उसने मात्र 5 परिवार रहते थे ! गांव का मुखिया “ठाकुर साहब” बहुत ही कर्मठ, ईमानदार, न्याय प्रिय और गांव…

कहने को तो भारत का संविधान अपनी उद्देशिका में भारत के नागरिकों से यह वादा कर है कि वह भारत के प्रत्येक नागरिक के साथ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय करेगा तथा उसे अवसर की समता प्रदान करेगा ! इसी…

धर्म पर राजनीति का इतना प्रभाव पड़ा कि अयोध्या में रामलला त्रिपाल में बैठ गए ! हिंदू धर्म संस्थाओं व मंदिरों की संपत्ति को हड़पने के लिए नए-नए कानूनी प्रयोग किए जाने की तैयारियां शुरू हो गई है ! हिंदुओं…

मेरा यह लेख समर्पित है श्री अब्दुल कलाम और सोली सोराबजी जैसे राष्ट्रप्रेमी बुद्धिजीवियों को ! किंतु ऐसे लोग हमारे देश में बहुत कम संख्या में हैं और इसका मूल कारण है ! देश की राष्ट्रद्रोही शिक्षा व्यवस्था ! “बुद्धिजीवी”…

धर्म के तीन उद्देश्य हैं ! पहला समाज को व्यवस्थित तरीके से चलाना ! दूसरा राष्ट्र की सुरक्षा करना और तीसरा उद्देश्य है आने वाली पीढ़ियों का उत्तरोत्तर विकास करना ! जो भी धर्म इन कार्यों में सफल है, इसको…

2019 में बनारस लोकसभा का चुनाव बड़ा दिलचस्प है ! बनारस संसदीय सीट ने नामांकन दाखिला की अंतिम तिथि को भी दो रिकार्ड बनाये हैं ! पहला वाराणसी संसदीय सीट से इस बार 102 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है…

पिछले लोकसभा चुनाव के पहले “सोशल मीडिया”, “प्रिंट मीडिया” और “इलेक्ट्रॉनिक मीडिया” यह तीनों ही भारत की गंभीर-गंभीर समस्यायें गिनाया करते थे ! जैसे कि भारत के अंदर छह करोड़ बांग्लादेशी घुस आए हैं और पूरे भारत में स्लीपिंग सेल्स…

एक अति विकसित गांव था ! उस गांव के अंदर गांव की आवश्यकता के अनुरूप सभी चीजों का निर्माण होता था ! लोग कोल्हू से तेल निकालते थे, वैध आयुर्वेदिक दवा बनाते थे ! खाने-पीने का सामान बनाते थे !…

जैसा कि मेरे निजी संज्ञान में है कि राजीव दीक्षित एक ऐसे राष्ट्रवादी चिंतक, विचारक और वक्ता थे ! जिन्होंने अपना पूरा जीवन “भारत के विनाश के मूल कारणों” को खोजने में लगा दिया और इतना ही नहीं इस “विनाश…