प्रश्न विहीन समाज के निर्माण की शुरुआत वैष्णव लेखकों ने की थी : Yogesh Mishra

जैसा कि मैं पहले के लेखों में लिख चुका हूं कि प्रश्न ही समाज की धड़कन है ! जिस समाज में प्रश्न खड़े नहीं होते हैं, वह समाज उस मरे हुए व्यक्ति की तरह है ! जिसकी धड़कन बंद हो चुकी है अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाये तो एक संवेदनशील और विचारशील समाज ही किसी से भी प्रश्न खड़े कर सकता है !

जब समाज में संवेदनशीलता और विचारशीलता खत्म हो जाती है, तो समाज चिंतन करना बंद कर देता है और एक चिंतन विहीन समाज कभी भी किसी से प्रश्न खड़े नहीं कर सकता है !

और जब किसी भी समाज में प्रश्न खड़े नहीं होते हैं, तब वहां की सत्ता अपने मनमाने तरीके से कार्य करती है ! दुनिया के सारे आंदोलन और क्रांति तभी संभव हो सके, जब आम जनमानस के मन मस्तिष्क में प्रश्न खड़े हुए और इन सभी प्रश्नों की बौछार जब समाज ने सत्ता से की और सत्ता ने प्रश्नों का उत्तर नहीं दिये तब समाज में वास्तविक क्रांति शुरू हुयी !

प्राचीन काल में पूरी दुनिया को लूटने वाले वैष्णव यह कभी नहीं चाहते थे कि उनकी कार्य पद्धति पर समाज में कभी कोई प्रश्न खड़ा हों ! इसके लिए उन्होंने तरह-तरह के झूठ बोले, सामान्य षड्यंत्रकारी लुटेरे राजाओं को उन्होंने दूसरे लोकों का भगवान बतला दिया और समाज को यह सोचने के लिए मजबूर किया कि भगवान बहुत ताकतवर है ! उसके नाराज होने पर वह बहुत बड़े-बड़े अनिष्ट कर सकता है ! इसलिए उसके प्रति श्रद्धा और विश्वास जागृत करो, न कि उनकी कार्यशैली पर कभी कोई प्रश्न खड़ा करो ! यह ज्ञात डर ही वैष्णव के साम्राज्य विस्तार का आधार था !

पूरी दुनिया में हत्या, डकैती, बलात्कार, लूट, अपहरण जैसे घिनौने अपराध करने वाले यह वैष्णव राजा सदैव से समाज के प्रश्नों से बचते रहे हैं ! क्योंकि इनके कथनी और करनी में फर्क था !
इसके लिए उन्होंने समाज को एक ही तरीके से सोचने के लिए प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से गुरुकुलों की स्थापना की ! इन्हीं गुरुकुलों के शिष्य भविष्य में वैष्णव राजाओं के प्रशासनिक अधिकारी और सैनिक बने ! जिन्होंने समाज में राजा के विरुद्ध प्रश्न खड़े करने वाले विचारशील व्यक्तियों को सार्वजनिक रूप से क्रूरता पूर्वक मार डाला !

जिससे क्रूर मृत्यु के भय से भयभीत समाज ने फिर कभी इन दरिंदे वैष्णव राजाओं के विरुद्ध आवाज उठाना ही बंद कर दिया और जो लोग इन वैष्णव राजाओं के राज्य क्षेत्र के बाहर निवास करते थे ! उनको एक साजिश के तहत इन वैष्णव राजाओं ने दैत्य, दानव, राक्षस, असुर आदि आदि नामों से संबोधित कर समय-समय पर उनके ऊपर अपने सैनिकों के साथ आक्रमण कर उनकी सभ्यता और संस्कृति को ही खत्म कर दिया ! जो वैष्णव राजाओं के घिनौनी कृत्यों के विरुद्ध बार-बार आवाज उठाते थे !

वैष्णव दरिंदे राजाओं के इस घिनौने कृत्य को छुपाने के लिए वैष्णव लेखकों ने पूरे के पूरे इतिहास के तथ्यों को ही बदल दिया और अपने आता ताई, अत्याचारी राजाओं को इन्होंने भगवान कहकर संबोधित करना शुरू कर दिया और अपने संवेदना विहीन क्रूर राजाओं को in वैष्णव लेखकों ने अपने ऐतिहासिक ग्रंथों में अत्यंत दयालु, निष्ठावान, समर्पित, स्नेही और तारणहार कहकर प्रस्तुत किया ! जिन्हें अब हम धर्म ग्रन्थ कहते हैं !

जबकि सत्य इसके एकदम विपरीत था ! वैष्णव धर्म ग्रंथों में कभी भी वैष्णव राजाओं के विपरीत किसी भी शासक को अच्छा नहीं कहा गया ! अब प्रश्न यह खड़ा होता है कि यदि गैर वैष्णव राजा अच्छा नहीं था तो उसके समाज ने कभी अपने राजा के विरुद्ध कभी कोई आंदोलन या क्रांति क्यों नहीं की ! जबकि वैष्णव राजाओं के विरुद्ध जन विद्रोह से इतिहास भरा पड़ा है !

भक्ति योग, ज्ञान योग, कर्म योग, श्रद्धा, आस्था, समर्पण, विश्वास आदि जैसे खतरनाक शब्द इन्हीं वैष्णव लेखकों की देन हैं ! जिसके ओट में इन वैष्णव लेखकों ने समाज में अपने राजा की कृतियों के विरुद्ध प्रश्न खड़े होना ही बंद करवा दिया ! जिससे निरंकुश वैष्णव राजा पूरी दुनिया में अपने विरोधियों को निर्ममता से कुचल सका और पूरी दुनिया में गैर वैष्णव संस्कृतियों को उजाड़ कर वैष्णव साम्राज्यों को स्थापित हो सका !

जिसका यश गान विभिन्न तथाकथित वैष्णव धर्म ग्रंथों में किया गया है ! जिस पर आज भी प्रश्न खड़ा करने पर सबसे ज्यादा पीड़ा वैष्णव कथावाचकों तथा वैष्णव धर्म गुरुओं को होती है ! जो इन्हीं वैष्णव धर्म ग्रंथों के नाम पर कमा खा रहे हैं !
यही आज कभी पूरी दुनिया में साम्राज्य करने वाले वैष्णव जीवन शैली के पतन का कारण है और आज दुनिया के छोटे-छोटे गुटों से निकले हुये धर्म वैष्णव के तथाकथित धर्म को ठीक उसी तरह निकल रहे हैं, जैसे कभी वैष्णव ने पूरी दुनिया के विभिन्न सभ्यता और संस्कृति को तलवार और षड्यंत्र की ताकत से निगला था !

इसलिए अपने धार्मिक इतिहास को जानो ! “सत्य सनातन शैव संस्कृति” की ओर बढ़ो और मानवता की रक्षा के लिए त्याग और समर्पण पर आश्रित “शैव जीवन शैली” को अपनाओ ! तभी यह सृष्टि बच सकती है ! मनुष्य बच सकता है और मनुष्य का अद्भुत ज्ञान बच सकता है ! अन्यथा सब कुछ नष्ट हो जाएगा !!

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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